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बाघों के लिए कम पड़ने लगा वाल्मीकि टाइगर रिजर्व का जंगल
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वाल्मीकि टाइगर रिजर्व में भ्रमण करता बाघ।
- फोटो : KUSHINAGAR
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बाघों के लिए कम पड़ने लगा वाल्मीकि टाइगर रिजर्व का जंगल
खड्डा (कुशीनगर)। जनपद की सीमा से सटे बिहार के 900 वर्ग किमी में फैला वाल्मीकि टाइगर रिजर्व बाघों के लिए कम पड़ने लगा है। यहां बाघों की संख्या बढ़ने से पर्यावरण प्रेमी खुश हैं, तो वन विभाग इनके आपसी संघर्ष व रिहाइशी इलाके में घुस जाने से चिंतित हैं। इनमें से कुछ बाघों को कैमूर के जंगल में भेजकर संख्या सीमित करने पर विचार चल रहा है। वर्तमान में वीटीआर में बाघों की संख्या लगभग 50 है।
वाल्मीकि टाइगर रिजर्व में बाघों की बढ़ती संख्या से पर्यावरण प्रेमी तो खुश हैं, लेकिन वन विभाग बाघों के आपसी संघर्ष व रिहाइशी इलाके में जाने को लेकर चिंतित है। बाघों तथा उनसे अन्य लोगों की सुरक्षा को लेकर उच्च स्तर पर बैठक होने वाली है। वर्तमान में वीटीआर के जंगल में बाघों की संख्या लगभग 50 है। इससे ज्यादा बाघ होने पर जंगल का एरिया कम पड़ने लगेगा। इसके चलते बाघों की आपसी लड़ाई व रिहाइशी इलाके में पहुंच जाने का खतरा ज्यादा बढ़ जाएगा। इसे लेकर वीटीआर प्रशासन सतर्क हो गया है। कुछ बाघों को बिहार के ही कैमूर वन्यजीव आश्रयणी (वाइल्ड लाइफ सेल्टर) में भेजने की योजना पर मंथन चल रहा है।
इसे लेकर मार्च के प्रथम सप्ताह में महाराष्ट्र के चंद्रपुर में उच्चस्तरीय बैठक होनी थी, जो किसी कारण नहीं हो पाई। यह बैठक शीघ्र ही होने की उम्मीद की जा रही है। जानकारों की मानी जाए तो बैठक में इन जानवरों के रहने वभोजन की क्षमता व वैज्ञानिक अध्ययन पर चर्चा सहित स्थानांतरित करने पर मुहर लगेगी।
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589.79 वर्ग किमी का हिस्सा बाघों के लिए मुफीद
वीटीआर के 900 वर्ग किमी के जंगल में से 589.79 वर्ग किमी का हिस्सा बाघों के लिए मुफीद (कोर एरिया) है। बाकी बचा 270.58 वर्ग किमी का हिस्सा पर्यटन के लिए निर्धारित है। कोर एरिया में लोगों के आवागमन से बाघ दूसरे क्षेत्र में पहुंच जा रहे हैं। वन विभाग के जानकारों के मुताबिक बाघों के आदर्श क्षेत्र में भी लोग घुसपैठ कर देते हैं। ऐसे में इनके पसंदीदा भोजन शाकाहारी जानवर दूर चले जाते हैं और पेट भरने के लिए बाघ जंगल से निकलकर रिहाइशी इलाके में पहुंच जाते हैं। अगर क्षमता से ज्यादा संख्या होगी तो बाघ आपसी संघर्ष में घायल या जान गवां सकते हैं। आबादी में इनके घुसने की घटना बढ़ जाएगी ।
‘बाघों को कैमूर भेजा जा सकता है’
मुख्य वन संरक्षक हेमकांत राय ने बताया कि वाल्मीकि टाइगर रिजर्व का जितनी कैटरिंग कैपेसिटी थी, उतनी बाघों की संख्या पहुंच चुकी है। इसे लेकर केंद्र व राज्य सरकार को प्रस्ताव भेजने की तैयारी की जा रही है। संख्या अधिक बढ़ने पर बाघों को कैमूर भेजा जा सकता है। बिहार में सरकार कैमूर को डेवलप कर रही है।
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खड्डा (कुशीनगर)। जनपद की सीमा से सटे बिहार के 900 वर्ग किमी में फैला वाल्मीकि टाइगर रिजर्व बाघों के लिए कम पड़ने लगा है। यहां बाघों की संख्या बढ़ने से पर्यावरण प्रेमी खुश हैं, तो वन विभाग इनके आपसी संघर्ष व रिहाइशी इलाके में घुस जाने से चिंतित हैं। इनमें से कुछ बाघों को कैमूर के जंगल में भेजकर संख्या सीमित करने पर विचार चल रहा है। वर्तमान में वीटीआर में बाघों की संख्या लगभग 50 है।
वाल्मीकि टाइगर रिजर्व में बाघों की बढ़ती संख्या से पर्यावरण प्रेमी तो खुश हैं, लेकिन वन विभाग बाघों के आपसी संघर्ष व रिहाइशी इलाके में जाने को लेकर चिंतित है। बाघों तथा उनसे अन्य लोगों की सुरक्षा को लेकर उच्च स्तर पर बैठक होने वाली है। वर्तमान में वीटीआर के जंगल में बाघों की संख्या लगभग 50 है। इससे ज्यादा बाघ होने पर जंगल का एरिया कम पड़ने लगेगा। इसके चलते बाघों की आपसी लड़ाई व रिहाइशी इलाके में पहुंच जाने का खतरा ज्यादा बढ़ जाएगा। इसे लेकर वीटीआर प्रशासन सतर्क हो गया है। कुछ बाघों को बिहार के ही कैमूर वन्यजीव आश्रयणी (वाइल्ड लाइफ सेल्टर) में भेजने की योजना पर मंथन चल रहा है।
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इसे लेकर मार्च के प्रथम सप्ताह में महाराष्ट्र के चंद्रपुर में उच्चस्तरीय बैठक होनी थी, जो किसी कारण नहीं हो पाई। यह बैठक शीघ्र ही होने की उम्मीद की जा रही है। जानकारों की मानी जाए तो बैठक में इन जानवरों के रहने वभोजन की क्षमता व वैज्ञानिक अध्ययन पर चर्चा सहित स्थानांतरित करने पर मुहर लगेगी।
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589.79 वर्ग किमी का हिस्सा बाघों के लिए मुफीद
वीटीआर के 900 वर्ग किमी के जंगल में से 589.79 वर्ग किमी का हिस्सा बाघों के लिए मुफीद (कोर एरिया) है। बाकी बचा 270.58 वर्ग किमी का हिस्सा पर्यटन के लिए निर्धारित है। कोर एरिया में लोगों के आवागमन से बाघ दूसरे क्षेत्र में पहुंच जा रहे हैं। वन विभाग के जानकारों के मुताबिक बाघों के आदर्श क्षेत्र में भी लोग घुसपैठ कर देते हैं। ऐसे में इनके पसंदीदा भोजन शाकाहारी जानवर दूर चले जाते हैं और पेट भरने के लिए बाघ जंगल से निकलकर रिहाइशी इलाके में पहुंच जाते हैं। अगर क्षमता से ज्यादा संख्या होगी तो बाघ आपसी संघर्ष में घायल या जान गवां सकते हैं। आबादी में इनके घुसने की घटना बढ़ जाएगी ।
‘बाघों को कैमूर भेजा जा सकता है’
मुख्य वन संरक्षक हेमकांत राय ने बताया कि वाल्मीकि टाइगर रिजर्व का जितनी कैटरिंग कैपेसिटी थी, उतनी बाघों की संख्या पहुंच चुकी है। इसे लेकर केंद्र व राज्य सरकार को प्रस्ताव भेजने की तैयारी की जा रही है। संख्या अधिक बढ़ने पर बाघों को कैमूर भेजा जा सकता है। बिहार में सरकार कैमूर को डेवलप कर रही है।