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Kushinagar News: दो परिवारों में वर्चस्व की जंग... बुझ गए कई चिराग
Sun, 19 Jan 2025 12:13 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Sun, 19 Jan 2025 12:13 AM IST
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हाटा। नब्बे के दशक में एक विद्यालय के प्रबंधकीय व्यवस्था को लेकर शुरू हुई अदावत कब दो परिवारों के बीच वर्चस्व की लड़ाई बन गई, कोई समझ नहीं पाया। अब तक इस लड़ाई में कई जानें जा चुकी हैं, बावजूद खूनी संघर्षों पर विराम नहीं लगा है।
पिछले साल पूर्व ब्लॉक प्रमुख के बेटे ने राधाकृष्ण सिंह के बेटे की गोली मारकर हत्या कर दी। इस मामले में पूर्व ब्लॉक प्रमुख और इसके बेटे जेल में बंद है। पूर्व ब्लॉक प्रमुख का घर ग्रेनाइट और बम से उड़ाने के आरोप में जमानत पर जेल से बाहर आए राधाकृष्ण को जिला जज पडरौना कोर्ट ने शुक्रवार को जेल भेज दिया।
एक विद्यालय की प्रबंधकीय व्यवस्था के विवाद में 1992 में पूर्व ब्लॉक प्रमुख सुकदेव पासवान के परिवार के एक व्यक्ति की हत्या हुई थी। उसका आरोप बगल के गांव के एक यादव परिवार पर लगा था। यादव परिवार राधाकृष्ण सिंह का परिचित था। उस वक्त पासवान परिवार के ज्यादातर लोग बैंकाक में रहते थे। भाई की हत्या होने के बाद ये लोग गांव चले आए। एक वर्ष बाद ही वर्ष 1993 में यादव परिवार के मुखिया की बमबारी कर हत्या कर दी गई। इसका आरोप पासवान परिवार के लोगों पर लगा। धीरे-धीरे पूर्व ब्लाॅक प्रमुख सुकदेव पासवान और पूर्व ग्राम प्रधान राधाकृष्ण सिंह के परिवार के बीच खाई बढ़ती गई। दोनों पक्ष एक दूसरे को नुकसान पहुंचाने का कोई भी मौका हाथ से नहीं गंवाते है। इसी का परिणाम डेढ़ वर्ष पहले राधा कृष्ण सिंह के पुत्र कमलेश सिंह की हत्या के रूप में लोग देख चुके है।
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कमलेश सिंह की हत्या के आरोप में पूर्व प्रमुख सहित परिवार के कई सदस्य अभी भी जेल में है। वर्ष 2000 में सुकरौली के ब्लाॅक प्रमुख पद पर पासवान परिवार का कब्जा था और गांव के प्रधान पद पर राधाकृष्ण सिंह काबिज हुए। गांव के हर मामले में प्रधान और ब्लाॅक प्रमुख की ठनती रही। इसी बीच दोनों परिवारों की वर्चस्व की लड़ाई में फरवरी 2004 में क्षेत्र पंचायत सुकरौली कार्यालय में हुई मारपीट के दौरान सुकरौली के तत्कालीन बीडीओ की हत्या हो गई। इसका आरोप कमलेश सिंह के भाई अनिरुद्ध सिंह उर्फ बड़े पर लगा। वर्ष 2004 में ही राधाकृष्ण सिंह के बड़े बेटे अनिरुद्ध सिंह ने सरेआम धर्मेंद्र पासवान के चाचा जयकिशुन की गोली मारकर हत्या कर दी। इसमें बाद में उन्हें उम्रकैद की सजा हो गई। वर्ष 2005 में एक बार फिर से दोनों परिवारों के बीच खूनी संघर्ष हुआ। इसमें राधाकृष्ण सिंह के पक्ष पर पूर्व प्रमुख के घर को बम और ग्रेनाइट लगाकर उड़ाकर परिवार के लोगों की हत्या की कोशिश की गई। इसमें राधाकृष्ण सिंह समेत 13 लोगों पर पूर्व प्रमुख की तरफ से केस दर्ज कराया गया था, जबकि इस घटना में राधाकृष्ण सिंह के पक्ष के दो लोगों की हत्या हो गई थी। इस मामले में पूर्व प्रमुख के परिवार के कुछ लोगों पर केस दर्ज हुआ था। इस घटना के बाद दोनों परिवारों की अदावत और बढ़ गई थी। खागी मुंडेरा गांव निवासी जेल भेजा गया राधाकृष्ण सिंह के बाद इस मामले जेल से बाहर 12 आरोपियों पर वारंट कोर्ट ने जारी किया है। इससे खलबली मची है।
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पिछले साल पूर्व ब्लॉक प्रमुख के बेटे ने राधाकृष्ण सिंह के बेटे की गोली मारकर हत्या कर दी। इस मामले में पूर्व ब्लॉक प्रमुख और इसके बेटे जेल में बंद है। पूर्व ब्लॉक प्रमुख का घर ग्रेनाइट और बम से उड़ाने के आरोप में जमानत पर जेल से बाहर आए राधाकृष्ण को जिला जज पडरौना कोर्ट ने शुक्रवार को जेल भेज दिया।
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एक विद्यालय की प्रबंधकीय व्यवस्था के विवाद में 1992 में पूर्व ब्लॉक प्रमुख सुकदेव पासवान के परिवार के एक व्यक्ति की हत्या हुई थी। उसका आरोप बगल के गांव के एक यादव परिवार पर लगा था। यादव परिवार राधाकृष्ण सिंह का परिचित था। उस वक्त पासवान परिवार के ज्यादातर लोग बैंकाक में रहते थे। भाई की हत्या होने के बाद ये लोग गांव चले आए। एक वर्ष बाद ही वर्ष 1993 में यादव परिवार के मुखिया की बमबारी कर हत्या कर दी गई। इसका आरोप पासवान परिवार के लोगों पर लगा। धीरे-धीरे पूर्व ब्लाॅक प्रमुख सुकदेव पासवान और पूर्व ग्राम प्रधान राधाकृष्ण सिंह के परिवार के बीच खाई बढ़ती गई। दोनों पक्ष एक दूसरे को नुकसान पहुंचाने का कोई भी मौका हाथ से नहीं गंवाते है। इसी का परिणाम डेढ़ वर्ष पहले राधा कृष्ण सिंह के पुत्र कमलेश सिंह की हत्या के रूप में लोग देख चुके है।
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कमलेश सिंह की हत्या के आरोप में पूर्व प्रमुख सहित परिवार के कई सदस्य अभी भी जेल में है। वर्ष 2000 में सुकरौली के ब्लाॅक प्रमुख पद पर पासवान परिवार का कब्जा था और गांव के प्रधान पद पर राधाकृष्ण सिंह काबिज हुए। गांव के हर मामले में प्रधान और ब्लाॅक प्रमुख की ठनती रही। इसी बीच दोनों परिवारों की वर्चस्व की लड़ाई में फरवरी 2004 में क्षेत्र पंचायत सुकरौली कार्यालय में हुई मारपीट के दौरान सुकरौली के तत्कालीन बीडीओ की हत्या हो गई। इसका आरोप कमलेश सिंह के भाई अनिरुद्ध सिंह उर्फ बड़े पर लगा। वर्ष 2004 में ही राधाकृष्ण सिंह के बड़े बेटे अनिरुद्ध सिंह ने सरेआम धर्मेंद्र पासवान के चाचा जयकिशुन की गोली मारकर हत्या कर दी। इसमें बाद में उन्हें उम्रकैद की सजा हो गई। वर्ष 2005 में एक बार फिर से दोनों परिवारों के बीच खूनी संघर्ष हुआ। इसमें राधाकृष्ण सिंह के पक्ष पर पूर्व प्रमुख के घर को बम और ग्रेनाइट लगाकर उड़ाकर परिवार के लोगों की हत्या की कोशिश की गई। इसमें राधाकृष्ण सिंह समेत 13 लोगों पर पूर्व प्रमुख की तरफ से केस दर्ज कराया गया था, जबकि इस घटना में राधाकृष्ण सिंह के पक्ष के दो लोगों की हत्या हो गई थी। इस मामले में पूर्व प्रमुख के परिवार के कुछ लोगों पर केस दर्ज हुआ था। इस घटना के बाद दोनों परिवारों की अदावत और बढ़ गई थी। खागी मुंडेरा गांव निवासी जेल भेजा गया राधाकृष्ण सिंह के बाद इस मामले जेल से बाहर 12 आरोपियों पर वारंट कोर्ट ने जारी किया है। इससे खलबली मची है।