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Kushinagar News: त्याग और धर्मपालन का संदेश है दक्ष यज्ञ और सती प्रसंग
Mon, 16 Feb 2026 02:16 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Mon, 16 Feb 2026 02:16 AM IST
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कनौरा गांव में कथा सुनाते आचार्य विरेन्द्र तिवारी ।स्रोत-सोशल मीडिया
जौरा बाजार। क्षेत्र के कनौरा गांव में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के पहले दिन कथावाचक ने दक्ष यज्ञ और सती का प्रसंग सुनाया। कहा कि श्रीमद्भागवत कथा धर्म, त्याग और मर्यादा की कथा है।
कथा का शुभारंभ आयोजक छट्ठू गिरी, कमला देवी, जटाशंकर गोस्वामी, राजन गोस्वामी, वाल्मीकि गोस्वामी आदि ने व्यासपीठ की पूजन कर किया। कथा वाचक आचार्य पंडित बीरेंद्र तिवारी ने कहा कि राजा दक्ष ने यज्ञ का आयोजन किया। उन्होंने अहंकारवश भगवान शिव को यज्ञ में आने के लिए आमंत्रित नहीं किया। माता सती ने जब यज्ञ में जाने की इच्छा प्रकट की तो भगवान शिव ने उन्हें बिना निमंत्रण जाने से रोका, लेकिन सती पिता के घर जाने के आग्रह को रोक न सकीं।
यज्ञ स्थल पर पहुंचने पर माता सती ने भगवान शिव का अपमान होते देखा, तो वे आहत हुईं। पति का अपमान सहन न कर पाने के कारण सती ने यज्ञ अग्नि में आत्माहुति दे दी। कथा वाचक ने कहा कि अहंकार विनाश का कारण बनता है। जबकि श्रद्धा और सम्मान ही संबंधों की नींव है। उन्होंने कहा कि जहां ईश्वर और संतों का अपमान होता है, वहां शुभ फल नहीं मिलता। जीवन में अहंकार का त्याग कर विनम्रता अपनानी चाहिए। दक्ष का अहंकार ही उसके यज्ञ के विनाश का कारण बना।
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इस दौरान नंदलाल विद्रोही, देवेंद्र उर्फ इंदू उपाध्याय, गुरुदत्त उपाध्याय, अरविंद मिश्र, रामभरोसा कुशवाहा, जयश्री प्रसाद, शिव निषाद, वशिष्ठ गौड़, सुरेश यादव, दिनेश यादव, धर्मेंद्र यादव, सुनील यादव, शम्भू गौड़, रमाशंकर गौड़, मोतीलाल गौड़, धनेश यादव आदि मौजूद रहे।
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कथा का शुभारंभ आयोजक छट्ठू गिरी, कमला देवी, जटाशंकर गोस्वामी, राजन गोस्वामी, वाल्मीकि गोस्वामी आदि ने व्यासपीठ की पूजन कर किया। कथा वाचक आचार्य पंडित बीरेंद्र तिवारी ने कहा कि राजा दक्ष ने यज्ञ का आयोजन किया। उन्होंने अहंकारवश भगवान शिव को यज्ञ में आने के लिए आमंत्रित नहीं किया। माता सती ने जब यज्ञ में जाने की इच्छा प्रकट की तो भगवान शिव ने उन्हें बिना निमंत्रण जाने से रोका, लेकिन सती पिता के घर जाने के आग्रह को रोक न सकीं।
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यज्ञ स्थल पर पहुंचने पर माता सती ने भगवान शिव का अपमान होते देखा, तो वे आहत हुईं। पति का अपमान सहन न कर पाने के कारण सती ने यज्ञ अग्नि में आत्माहुति दे दी। कथा वाचक ने कहा कि अहंकार विनाश का कारण बनता है। जबकि श्रद्धा और सम्मान ही संबंधों की नींव है। उन्होंने कहा कि जहां ईश्वर और संतों का अपमान होता है, वहां शुभ फल नहीं मिलता। जीवन में अहंकार का त्याग कर विनम्रता अपनानी चाहिए। दक्ष का अहंकार ही उसके यज्ञ के विनाश का कारण बना।
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इस दौरान नंदलाल विद्रोही, देवेंद्र उर्फ इंदू उपाध्याय, गुरुदत्त उपाध्याय, अरविंद मिश्र, रामभरोसा कुशवाहा, जयश्री प्रसाद, शिव निषाद, वशिष्ठ गौड़, सुरेश यादव, दिनेश यादव, धर्मेंद्र यादव, सुनील यादव, शम्भू गौड़, रमाशंकर गौड़, मोतीलाल गौड़, धनेश यादव आदि मौजूद रहे।