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आरोपियों की दलील को कोर्ट ने किया खारिज
कुश्ाीनगर (ब्यूरो)
Updated Sat, 30 Dec 2017 12:35 AM IST
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अदालत।
- फोटो : amar ujala
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पडराैना। हाईकोर्ट की निगरानी में चल रही मनरेगा घोटाले की सीबीआई जांच के मामले में दाखिल आरोप पत्र को सीबीआई कोर्ट ने संज्ञान में ले लिया है। अब गवाही की कार्रवाई शुरू होगी। इस मामले के आरोपियों की दलिल को सीबीआई कोर्ट ने खारिज कर दिया है। खड्डा ब्लॉक में करोड़ों रुपये के सरकारी धन का गोलमाल का आरोप लगा था। संभावना जताई जा रही है कि खड्डा सहित जनपद के ब्लॉकों में मनरेगा से कराए गए कार्यों की जांच एक बार फिर शुरू हो सकती है।
खड्डा विकास खंड के चार ग्राम सभाओं से तत्कालीन जिला पंचायत सदस्य विजय अग्रवाल के भाई राजेश के नाम ग्राम सभा के बैंक खाते से बियरर चेक के माध्यम से भारी धन निकासी हुई थी। इस मामले में सीबीआई की ओर से दाखिल आरोप पत्र को आरोपियों ने कोर्ट में चुनौती दी थी। लेकिन लखनऊ स्थित सीबीआई के विशेष कोर्ट ने इनकी दलील को ठुकरा दिया और सीबीआई के आरोप पत्र को स्वीकार करते हुए केस की कार्यवाही को आगे बढ़ा दिया है। अब गवाही सहित अन्य न्यायिक कार्यवाही शुरू हो गई है। रोहुआ पुल मामले में भी सीबीआई ने अपनी कार्यवाही तेज कर दी है।
इस बात की पुष्टि करते हुए जांच अधिकारी सीबीआई के डीएसपी पीके श्रीवास्तव ने बताया कि न्यायालय में चार्ज फ्रेम हो गया है। अब साक्ष्य सहित आगे की कार्यवाही शुरू हो गई है। इसके अलावा रोहुआ पुल मामले में भी तेजी की जा रही है। जनपद में मनरेगा योजना की आगे की जांच आदेश मिलने पर शुरू होगी।
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क्या था मामला?
कुशीनगर जनपद के कई विकास खंडों व सिंचाई, वन विभाग आदि में मनरेगा योजना के धन को जिम्मेदारों ने नियम कानून ताक पर रखकर बड़ा गोलमाल किया। वर्ष 2007 से 2010 के बीच मनरेगा योजना की जांच हाईकोर्ट ने सीबीआई को दे रखी है और कोर्ट खुद मानिटरिंग कर रहा है। इस योजना में खड्डा विकास खंड के दर्जनों गांवों में भारी धन विकास के नाम पर लाया गया और करोड़ों रुपये बेयरर चेक के माध्यम से तत्कालीन जिला पंचायत सदस्य के भाई राजेश के नाम निकाल लिया गया था।
इसके अलावा खड्डा विकास खंड के गंडक नदी उस पार रोहुआ नाले पर बना 69 लाख रुपये की लागत का पुल भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ने से ढह गया। दोनों मामलों की जांच सीबीआई ने की और इस मामले के मास्टर माइंड तत्कालीन जिला पंचायत सदस्य विजय अग्रवाल उर्फ मिट्ठू व इनके भाई राजेश सहित खड्डा विकास खंड के तत्कालीन चार ग्राम प्रधान, सेक्रेटरी, तकनीकी सहायक, तत्कालीन जिला पंचायत अध्यक्ष, अपर मुख्य अधिकारी, इंजीनियर, जिला विकास अधिकारी आदि को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। आरोपी जमानत पर बाहर हैं। दोनों मामलों में सीबीआई कोर्ट में आरोप पत्र दाखिल है। इसके साथ ही खड्डा विकास खंड सहित जनपद के अन्य हिस्सों में बने पुल व मनरेगा योजना की जांच अभी शेष है। अब पुन: जांच शुरू हुई तो कई बड़े लोग व तत्कालीन वरिष्ठ अधिकारियों पर आंच आना तय माना जा रहा है।
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खड्डा विकास खंड के चार ग्राम सभाओं से तत्कालीन जिला पंचायत सदस्य विजय अग्रवाल के भाई राजेश के नाम ग्राम सभा के बैंक खाते से बियरर चेक के माध्यम से भारी धन निकासी हुई थी। इस मामले में सीबीआई की ओर से दाखिल आरोप पत्र को आरोपियों ने कोर्ट में चुनौती दी थी। लेकिन लखनऊ स्थित सीबीआई के विशेष कोर्ट ने इनकी दलील को ठुकरा दिया और सीबीआई के आरोप पत्र को स्वीकार करते हुए केस की कार्यवाही को आगे बढ़ा दिया है। अब गवाही सहित अन्य न्यायिक कार्यवाही शुरू हो गई है। रोहुआ पुल मामले में भी सीबीआई ने अपनी कार्यवाही तेज कर दी है।
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इस बात की पुष्टि करते हुए जांच अधिकारी सीबीआई के डीएसपी पीके श्रीवास्तव ने बताया कि न्यायालय में चार्ज फ्रेम हो गया है। अब साक्ष्य सहित आगे की कार्यवाही शुरू हो गई है। इसके अलावा रोहुआ पुल मामले में भी तेजी की जा रही है। जनपद में मनरेगा योजना की आगे की जांच आदेश मिलने पर शुरू होगी।
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क्या था मामला?
कुशीनगर जनपद के कई विकास खंडों व सिंचाई, वन विभाग आदि में मनरेगा योजना के धन को जिम्मेदारों ने नियम कानून ताक पर रखकर बड़ा गोलमाल किया। वर्ष 2007 से 2010 के बीच मनरेगा योजना की जांच हाईकोर्ट ने सीबीआई को दे रखी है और कोर्ट खुद मानिटरिंग कर रहा है। इस योजना में खड्डा विकास खंड के दर्जनों गांवों में भारी धन विकास के नाम पर लाया गया और करोड़ों रुपये बेयरर चेक के माध्यम से तत्कालीन जिला पंचायत सदस्य के भाई राजेश के नाम निकाल लिया गया था।
इसके अलावा खड्डा विकास खंड के गंडक नदी उस पार रोहुआ नाले पर बना 69 लाख रुपये की लागत का पुल भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ने से ढह गया। दोनों मामलों की जांच सीबीआई ने की और इस मामले के मास्टर माइंड तत्कालीन जिला पंचायत सदस्य विजय अग्रवाल उर्फ मिट्ठू व इनके भाई राजेश सहित खड्डा विकास खंड के तत्कालीन चार ग्राम प्रधान, सेक्रेटरी, तकनीकी सहायक, तत्कालीन जिला पंचायत अध्यक्ष, अपर मुख्य अधिकारी, इंजीनियर, जिला विकास अधिकारी आदि को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। आरोपी जमानत पर बाहर हैं। दोनों मामलों में सीबीआई कोर्ट में आरोप पत्र दाखिल है। इसके साथ ही खड्डा विकास खंड सहित जनपद के अन्य हिस्सों में बने पुल व मनरेगा योजना की जांच अभी शेष है। अब पुन: जांच शुरू हुई तो कई बड़े लोग व तत्कालीन वरिष्ठ अधिकारियों पर आंच आना तय माना जा रहा है।