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Kushinagar News: टीबी की दवाएं खत्म, बाहर से महंगी खरीदना मजबूरी
Sun, 12 May 2024 02:28 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Sun, 12 May 2024 02:28 AM IST
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पडरौना। टीबी मरीजों की जान पिछले पंद्रह दिनों से मुश्किल में है। कारण यह है कि जिले के सरकारी अस्पतालों में टीबी की दवाएं खत्म गई हैं। इससे टीबी मरीज दवा के लिए हर दिन सरकारी अस्पतालों का चक्कर लगा रहे हैं। कुछ अस्पतालों पर तो दवा नहीं है के बोर्ड भी लगा दिए गए हैं। विभागीय सूत्रों के अनुसार महीनों से टीबी के दवा की किल्लत चल रही है। जैसे-तैसे अप्रैल तक मरीजों को दवा का डोज दिया गया। लेकिन अब दवाओं के नहीं होने से डॉक्टर बाहर की दवा लिख रहे हैं। इससे टीबी मरीजों की जेब पर सीधा असर पड़ रहा है। वहीं, दवा के खत्म होने से मरीजों में मल्टी ड्रग रेजिस्टेंस का खतरा बढ़ गया है।
कुशीनगर जिले में 4225 टीबी के मरीज हैं, जिनका उपचार चल रहा है। इन मरीजों को दी जाने वाली दवा सरकारी अस्पतालों में नहीं है। दवाओं की यह किल्लत महीनों से चल रही है। क्षय रोग विभाग एक ही बार अधिक दवा देने की बजाय एक मरीज को चार से पांच दिन की दवा देकर काम चला रहा था। लेकिन, 15 दिनों से टीबी की दवाएं सरकारी अस्पतालों पर पूरी तरह से खत्म है। दवा की आपूर्ति न होने से मरीजों के सामने संकट खड़ा हो गया है। टीबी क्लीनिक और सीएचसी मेें थ्री एफडीसी और फोर एफडीसी दवाओं की भारी किल्लत है। इसके अलावा इथेपबुटाल भी नहीं है। दुदही सीएचसी पर तो बकायदा बोर्ड लगाकर दवा न होने की जानकारी मरीजों को दी जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि नियमित दवा न लेने से शरीर में बैक्टीरिया का लोड बढ़ जाता है। कुछ दिन बाद वह दवा खाने से असर नहीं करता है। इसके कारण मरीज एमडीआर यानि मल्टी ड्रग रेजिस्टेंस टीबी की श्रेणी में चला जाता है। यह जटिल टीबी मानी जाती है। इस संबंध में जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. एसएन त्रिपाठी ने बताया कि टीबी मरीजों को चिह्नित कर उपचार किया जा रहा है। दवा की कमी है। इसके लिए मांग की गई है। जो लोग सक्षम हैं, वे बाजार से दवा ले सकते हैं। दवा आने पर पूरे कोर्स की दवा उपलब्ध कराई जाएगी। बीच में टीबी मरीजों का दवा नहीं छूटना चाहिए। शासन स्तर से दवा नहीं उपलब्ध हो पा रहा है। सीएमओ के माध्यम से दवा की खरीदारी की गई है। सोमवार से सभी सेंटरों पर दवा भेजा जाएगा।
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कुशीनगर जिले में 4225 टीबी के मरीज हैं, जिनका उपचार चल रहा है। इन मरीजों को दी जाने वाली दवा सरकारी अस्पतालों में नहीं है। दवाओं की यह किल्लत महीनों से चल रही है। क्षय रोग विभाग एक ही बार अधिक दवा देने की बजाय एक मरीज को चार से पांच दिन की दवा देकर काम चला रहा था। लेकिन, 15 दिनों से टीबी की दवाएं सरकारी अस्पतालों पर पूरी तरह से खत्म है। दवा की आपूर्ति न होने से मरीजों के सामने संकट खड़ा हो गया है। टीबी क्लीनिक और सीएचसी मेें थ्री एफडीसी और फोर एफडीसी दवाओं की भारी किल्लत है। इसके अलावा इथेपबुटाल भी नहीं है। दुदही सीएचसी पर तो बकायदा बोर्ड लगाकर दवा न होने की जानकारी मरीजों को दी जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि नियमित दवा न लेने से शरीर में बैक्टीरिया का लोड बढ़ जाता है। कुछ दिन बाद वह दवा खाने से असर नहीं करता है। इसके कारण मरीज एमडीआर यानि मल्टी ड्रग रेजिस्टेंस टीबी की श्रेणी में चला जाता है। यह जटिल टीबी मानी जाती है। इस संबंध में जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. एसएन त्रिपाठी ने बताया कि टीबी मरीजों को चिह्नित कर उपचार किया जा रहा है। दवा की कमी है। इसके लिए मांग की गई है। जो लोग सक्षम हैं, वे बाजार से दवा ले सकते हैं। दवा आने पर पूरे कोर्स की दवा उपलब्ध कराई जाएगी। बीच में टीबी मरीजों का दवा नहीं छूटना चाहिए। शासन स्तर से दवा नहीं उपलब्ध हो पा रहा है। सीएमओ के माध्यम से दवा की खरीदारी की गई है। सोमवार से सभी सेंटरों पर दवा भेजा जाएगा।
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