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स्वामी का बसपा छोड़ना पहले से ही तय थ्ाा !

Wed, 22 Jun 2016 11:47 PM IST
Kushinagar
Kushinagar Updated Wed, 22 Jun 2016 11:47 PM IST
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swami had already decided to leave the party!
स्वामी प्रसाद मौर्या - फोटो : amar ujala
पडरौना सदर विधायक और विधान सभा में नेता प्रतिपक्ष स्वामी प्रसाद मौर्या का बसपा छोड़ना पहले से तय था। यहां उनके समर्थक पहले से ही ऐसा कयास लगा रहे थे। इसकी इबारत उनकी सीट से इलाहाबाद के जावेद इकबाल की उम्मीदवारी की घोषणा के वक्त ही लिखी जा चुकी थी। बुधवार को उनके पार्टी छोड़ने से उनके कुछ समर्थक जरूर अचंभित हुए लेकिन अधिकांश को इसकी भनक पहले से ही थी। अब उनके बसपा छोड़ने से जिले में बसपा की राजनीति पर पड़ने वाले असर को लेकर चर्चा होनी शुरू हो गई है। समर्थक जहां स्वामी के बसपा छोड़ने को पार्टी के लिए बड़ा नुकसान मान रहे हैं वहीं बसपा समर्थक स्वामी के बसपा छोड़ने से खुश हैं।
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 वर्ष 1989 से ही कुशीनगर में लोकसभा व विधानसभा की सीटों पर बसपा अपने उम्मीदवार उतारती रही है। परंतु पार्टी को वर्ष 2009 के उप चुनाव से पहले यहां कभी सफलता नहीं मिली। यहां तक की वर्ष 1993 में जब सपा-बसपा गठबंधन के तहत उम्मीदवार उतारे गए थे, तब भी यहां बसपा उम्मीदवार चुनाव हार गए थे। वर्ष 2009 के लोकसभा चुनाव में अचानक पार्टी ने प्रदेश अध्यक्ष रहे स्वामी प्रसाद मौर्या को कुशीनगर लोकसभा क्षेत्र से उम्मीदवार बनाया। चुनावी गणित में माहिर मौर्या ने यहां कार्यकर्ताओं के साथ गांव-गांव घूमकर पार्टी के पक्ष में माहौल बनाया। 
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उस चुनाव में मौर्या को 2 लाख से अधिक वोट मिले और वह दूसरे नंबर पर रहे। इसके बाद हुए पडरौना विधानसभा उप चुनाव में उन्होंने बड़े अंतर से जीत हासिल कर पहली बार कुशीनगर जिले में बसपा का परचम लहराया। इस जीत के साथ ही जिले में बसपा कार्यकर्ताओं में उत्साह का संचार हुआ। वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव में भी स्वामी प्रसाद मौर्या ने बसपा के टिकट पर पडरौना विधानसभा सीट से जीत हासिल की। 
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 कुशीनगर, फाजिलनगर और खड्डा विधानसभा क्षेत्र में पार्टी को मुख्य मुकाबले में खड़ा करने का श्रेय भी इन्ही को मिला। मंत्री, नेता प्रतिपक्ष और राष्ट्रीय महासचिव जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभालने के साथ जिले में लगातार सक्रिय रहे स्वामी प्रसाद मौर्या ने गोरखपुर, देवरिया और महराजगंज जिलों में भी बसपा कार्यकर्ताओं का उत्साह बढ़ाया। बताते हैं कि कुशीनगर में अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत कर रहे मौर्या ने बसपा से दलितों के अलावा सवर्ण और पिछड़ी जातियों को भी जोड़ने में सफलता पाई। 

वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में यहां से बसपा ने डॉक्टर संगम मिश्र को मैदान में उतारा था लेकिन वे तीसरे नंबर पर रहे। इसके बाद से ही हालात बदलने शुरू हो गए थे। मौर्या के पार्टी छोड़ने से अगले साल के विधानसभा चुनाव में बसपा के समीकरण के गड़बड़ाने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। मौर्या समर्थकों  की मानें तो पडरौना ही नहीं आस पास के कई जिलों में बसपा का समीकरण गड़बड़ाएगा। फिलहाल मौर्या  कुशीनगर जिले की ही किसी सीट से चुनाव लड़ सकते हैं। स्वामी का अगला पड़ाव क्या होगा, इसे लेकर अटकलों का दौर जारी है।


सिद्धांत से भटक गई है पार्टी ः स्वामी प्रसाद मौर्या के प्रतिनिधि आरके मौर्या ने बुधवार को इस मामले पर अमर उजाला से बातचीत करते हुए कहा कि बसपा अपने मूल सिद्धांतों से भटक गई है। उनके अनुसार मायावती अपने हित के लिए   मूल कार्यकर्ताओं की जगह बाहरी को तरजीह देने लगी हैं। इस मुद्दे पर स्वामी प्रसाद मौर्या ने सीधे मायावती से बात की थी।जब उनकी नहीं सुनी गई तो पार्टी छोड़ने का निर्णय लेना पड़ा।
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