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जिले में साल-दर-साल घट रही गन्ने की खेती
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जिले में साल-दर-साल घट रही गन्ने की खेती
पडरौना। जिले में गन्ने का क्षेत्रफल लगातार घटता जा रहा है। जनपद में जहां वर्ष 2018-19 में 10,1000 हेक्टेयर क्षेत्रफल में कुल उत्पादन हुआ था, वहीं 2020-21 में यह आंकड़ा घटकर 87,600 हेक्टेयर हो गया है। तीन वर्ष के भीतर 13 हजार 400 हेक्टेयर क्षेत्रफल की कमी आई है। इससे गन्ना विभाग के अधिकारी चिंतित हैं। उत्तर प्रदेश गन्ना किसान संस्थान प्रशिक्षण केंद्र पिपराइच (गोरखपुर) के सहायक निदेशक ओपी गुप्ता ने बताया कि यह संकेत ठीक नहीं है। उत्पादन बढ़ाने के लिए किसानों को प्रोत्साहित किया जा रहा है।
जिले में करीब दो लाख 20 हजार किसान गन्ने की खेती करते हैं। क्षेत्रफल कम होने से गन्ना की खेती से किसानों का मोहभंग होने की आशंका है। उत्तर प्रदेश गन्ना किसान संस्थान प्रशिक्षण केंद्र पिपराइच (गोरखपुर) के गन्ना अधिकारियों का कहना है कि गन्ना प्रजातियों में संतुलन घटने का कारण लगातार एक ही प्रजाति को बोना और असमय बारिश होना है।
इसके अलावा गन्ने में कैंसर रोग (रेड राट) लगने से भी फसल पर असर पड़ता है। गन्ने की फसल के लिए 900- 1000 मिलीमीटर पानी की आवश्यकता होती है। पिछले साल जिले में 2500 मिलीमीटर से अधिक पानी बरसा है, जिससे अधिकांश फसल खराब हो गई। उत्तर प्रदेश गन्ना किसान संस्थान प्रशिक्षण केंद्र के सहायक निदेशक के अनुसार, तीन वर्ष के भीतर गन्ने की खेती में 13 हजार 400 हेक्टेयर क्षेत्रफल की कमी आई है।
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हालांकि उ.प्र. गन्ना किसान संस्थान प्रशिक्षण केंद्र पिपराइच के सहायक निदेशक ओपी गुप्ता ने बताया कि जिले में वैज्ञानिक खेती के प्रति कृषकों को जागरूक करने एवं गन्ने के साथ सहफसली खेती को बढ़ावा देने के लिए संस्थान की तरफ से किसानों के खेत तक पहुंचने का अभियान चलाया जा रहा है।
तीन साल में घटी गन्ने की पेराई
जिले में कुल पांच चीनी मिलें हैं। 2020-21 में पांच चीनी मिलों में 215 लाख क्विंटल गन्ने की पेराई हुई। जबकि वर्ष 2019-20 में पांच चीनी मीलों में कुल 320 लाख क्विंटल गन्ना पेरा गया था। 2018-19 में सभी चीनी मिलों ने 392 लाख क्विंटल गन्ने की पेराई की गई थी। तीन साल के आंकड़ों के मुताबिक पेराई में भी कमी आई है।
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पडरौना। जिले में गन्ने का क्षेत्रफल लगातार घटता जा रहा है। जनपद में जहां वर्ष 2018-19 में 10,1000 हेक्टेयर क्षेत्रफल में कुल उत्पादन हुआ था, वहीं 2020-21 में यह आंकड़ा घटकर 87,600 हेक्टेयर हो गया है। तीन वर्ष के भीतर 13 हजार 400 हेक्टेयर क्षेत्रफल की कमी आई है। इससे गन्ना विभाग के अधिकारी चिंतित हैं। उत्तर प्रदेश गन्ना किसान संस्थान प्रशिक्षण केंद्र पिपराइच (गोरखपुर) के सहायक निदेशक ओपी गुप्ता ने बताया कि यह संकेत ठीक नहीं है। उत्पादन बढ़ाने के लिए किसानों को प्रोत्साहित किया जा रहा है।
जिले में करीब दो लाख 20 हजार किसान गन्ने की खेती करते हैं। क्षेत्रफल कम होने से गन्ना की खेती से किसानों का मोहभंग होने की आशंका है। उत्तर प्रदेश गन्ना किसान संस्थान प्रशिक्षण केंद्र पिपराइच (गोरखपुर) के गन्ना अधिकारियों का कहना है कि गन्ना प्रजातियों में संतुलन घटने का कारण लगातार एक ही प्रजाति को बोना और असमय बारिश होना है।
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इसके अलावा गन्ने में कैंसर रोग (रेड राट) लगने से भी फसल पर असर पड़ता है। गन्ने की फसल के लिए 900- 1000 मिलीमीटर पानी की आवश्यकता होती है। पिछले साल जिले में 2500 मिलीमीटर से अधिक पानी बरसा है, जिससे अधिकांश फसल खराब हो गई। उत्तर प्रदेश गन्ना किसान संस्थान प्रशिक्षण केंद्र के सहायक निदेशक के अनुसार, तीन वर्ष के भीतर गन्ने की खेती में 13 हजार 400 हेक्टेयर क्षेत्रफल की कमी आई है।
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हालांकि उ.प्र. गन्ना किसान संस्थान प्रशिक्षण केंद्र पिपराइच के सहायक निदेशक ओपी गुप्ता ने बताया कि जिले में वैज्ञानिक खेती के प्रति कृषकों को जागरूक करने एवं गन्ने के साथ सहफसली खेती को बढ़ावा देने के लिए संस्थान की तरफ से किसानों के खेत तक पहुंचने का अभियान चलाया जा रहा है।
तीन साल में घटी गन्ने की पेराई
जिले में कुल पांच चीनी मिलें हैं। 2020-21 में पांच चीनी मिलों में 215 लाख क्विंटल गन्ने की पेराई हुई। जबकि वर्ष 2019-20 में पांच चीनी मीलों में कुल 320 लाख क्विंटल गन्ना पेरा गया था। 2018-19 में सभी चीनी मिलों ने 392 लाख क्विंटल गन्ने की पेराई की गई थी। तीन साल के आंकड़ों के मुताबिक पेराई में भी कमी आई है।