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आंधी-बारिश से जनजीवन अस्त-व्यस्त
कुशीनगर
Updated Sat, 28 May 2016 11:27 PM IST
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बारिश के बाद कलेक्ट्रेट परिसर में लगा पानी ।
- फोटो : अमर उजाला
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पडरौना/हाटा/कप्तानगंज। शनिवार को दिन के लगभग एक बजे आई आंधी-बारिश में भी काफी नुकसान हुआ। आंधी के कारण नगर के छावनी मोहल्ले में ट्रांसफॉर्मर के पास स्थित बरगद का एक विशालकाय पेड़ उखड़कर दो गुमटियों पर गिर गया।
उसमें बैठे दुकानदारों ने भागकर अपनी जान बचाई।
पेड़ की मोटी डाल टूटकर बिजली के तार पर गिर गई, जिससे पोल सहित तार जमीन पर आ गया। इससे पडरौना-कसया हाइवे पर आवागमन प्रभावित हुआ। सोहरौना में भी आंधी के चलते एक पेड़ तार पर ही गिर गया।
नतीजतन आंधी-बारिश के दौरान कटी बिजली रात आठ बजे तक भी नहीं आई। बिजली नहीं रहने से पानी आपूर्ति पर भी इसका असर पड़ा। इस तरह कई जगह आंधी से पेड़, बिजली के खंभे और तार, टिनशेड, फूस की झोपड़ी आदि को नुकसान पहुंचा। कलेक्ट्रेट परिसर में पानी भर जाने से फरियादियों को आने-जाने में परेशानी का सामना करना पड़ा।
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उधर, हाटा में शनिवार को दोपहर बाद मौसम ने एकाएक करवट बदली और आसमान में काले बादल छा गए। देखते ही देखते पहले अंधेरा छा गया और उसके बाद तेज हवाओं से दुकानों के बोर्ड, टिनशेड आदि उड़ने लगे। कुछ ही देर बाद जोर से बारिश होने लगी। कस्बे की पुरानी बर्फ फैक्ट्री के पास स्थित एक पेड़ जड़ से उखड़ गया। वहीं ट्रांसफॉर्मर के पास लगे पोल का ऊपरी हिस्सा टूट गया, जिससे बिजली के तार आपस में उलझ गए।
इससे बिजली आपूर्ति बाधित हो गई। कस्बे के बस स्टेशन रोड पर करीब दो फीट बारिश का पानी भर गया। बारिश बंद होने के करीब एक घंटे बाद सड़क से पानी हटा। नालियों के ओवरफ्लो होने से इस सड़क के किनारे की कई दुकानों में पानी घुस गया, जिससे कई दुकानदारों को नुकसान उठाना पड़ा। कप्तानगंज में शनिवार को दोपहर में ही रात का नजारा देखने को मिला।
काले घने बादलों के कारण इतना अंधेरा हो गया कि वाहन चालकों को लाइट जलाकर चलना पड़ा। 52 मिनट की बारिश के बाद मौसम काफ ी खुशनुमा हो गया, वहीं कस्बे का लालचौक जलमग्न हो गया। कस्बे की सोलर लाइट दिन में ही जलने लगीं। करीब डेढ़ बजे तक मूसलाधार बारिश हुई। कस्बे की कई दुकानों में पानी घुस गया, जिससे दुकानदार भी परेशान हो गए।
दूसरी ओर, खड्डा कस्बे के गांधीनगर मोहल्ले में तेज आंधी से अनिल मोदनवाल के मकान का बारजा गिरने पर अफ रातफ री मच गई। गनीमत रही कि कोई उसकी चपेट में नहीं आया। शाहपुर गांव में सुदामा की झोपड़ी पर अचानक पेड़ गिर गया।
इससे पूरा घर तहस नहस हो गया। घर के सदस्य बाहर भागकर जान बचाए। इस गांव में कई पेड़ उखड़कर गिर गए। बोधीछपरा गांव में कई झोपड़ियां ढह र्गइं। पनियहवा से बोधीछपरा जाने वाले मार्ग पर वन विभाग की ओर से लगवाए गए कई पेड़ जड़ से उखड़कर जमीन पर आ गए। इस आंधी-बारिश ने केला के किसानों की तो कमर तोड़कर रख दी है।
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उसमें बैठे दुकानदारों ने भागकर अपनी जान बचाई।
पेड़ की मोटी डाल टूटकर बिजली के तार पर गिर गई, जिससे पोल सहित तार जमीन पर आ गया। इससे पडरौना-कसया हाइवे पर आवागमन प्रभावित हुआ। सोहरौना में भी आंधी के चलते एक पेड़ तार पर ही गिर गया।
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नतीजतन आंधी-बारिश के दौरान कटी बिजली रात आठ बजे तक भी नहीं आई। बिजली नहीं रहने से पानी आपूर्ति पर भी इसका असर पड़ा। इस तरह कई जगह आंधी से पेड़, बिजली के खंभे और तार, टिनशेड, फूस की झोपड़ी आदि को नुकसान पहुंचा। कलेक्ट्रेट परिसर में पानी भर जाने से फरियादियों को आने-जाने में परेशानी का सामना करना पड़ा।
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उधर, हाटा में शनिवार को दोपहर बाद मौसम ने एकाएक करवट बदली और आसमान में काले बादल छा गए। देखते ही देखते पहले अंधेरा छा गया और उसके बाद तेज हवाओं से दुकानों के बोर्ड, टिनशेड आदि उड़ने लगे। कुछ ही देर बाद जोर से बारिश होने लगी। कस्बे की पुरानी बर्फ फैक्ट्री के पास स्थित एक पेड़ जड़ से उखड़ गया। वहीं ट्रांसफॉर्मर के पास लगे पोल का ऊपरी हिस्सा टूट गया, जिससे बिजली के तार आपस में उलझ गए।
इससे बिजली आपूर्ति बाधित हो गई। कस्बे के बस स्टेशन रोड पर करीब दो फीट बारिश का पानी भर गया। बारिश बंद होने के करीब एक घंटे बाद सड़क से पानी हटा। नालियों के ओवरफ्लो होने से इस सड़क के किनारे की कई दुकानों में पानी घुस गया, जिससे कई दुकानदारों को नुकसान उठाना पड़ा। कप्तानगंज में शनिवार को दोपहर में ही रात का नजारा देखने को मिला।
काले घने बादलों के कारण इतना अंधेरा हो गया कि वाहन चालकों को लाइट जलाकर चलना पड़ा। 52 मिनट की बारिश के बाद मौसम काफ ी खुशनुमा हो गया, वहीं कस्बे का लालचौक जलमग्न हो गया। कस्बे की सोलर लाइट दिन में ही जलने लगीं। करीब डेढ़ बजे तक मूसलाधार बारिश हुई। कस्बे की कई दुकानों में पानी घुस गया, जिससे दुकानदार भी परेशान हो गए।
दूसरी ओर, खड्डा कस्बे के गांधीनगर मोहल्ले में तेज आंधी से अनिल मोदनवाल के मकान का बारजा गिरने पर अफ रातफ री मच गई। गनीमत रही कि कोई उसकी चपेट में नहीं आया। शाहपुर गांव में सुदामा की झोपड़ी पर अचानक पेड़ गिर गया।
इससे पूरा घर तहस नहस हो गया। घर के सदस्य बाहर भागकर जान बचाए। इस गांव में कई पेड़ उखड़कर गिर गए। बोधीछपरा गांव में कई झोपड़ियां ढह र्गइं। पनियहवा से बोधीछपरा जाने वाले मार्ग पर वन विभाग की ओर से लगवाए गए कई पेड़ जड़ से उखड़कर जमीन पर आ गए। इस आंधी-बारिश ने केला के किसानों की तो कमर तोड़कर रख दी है।