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दोपहर में बारिश के कारण नहीं देख पाए सूर्य ग्रहण
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पडरौना नगर में रविवार को दोपहर एक्सरे प्लेट के माध्यम से सूर्य ग्रहण देखने की कोशिश करती महिला।
- फोटो : KUSHINAGAR
दोपहर में बारिश के कारण नहीं देख पाए सूर्य ग्रहण
पडरौना। रविवार को लगे सूर्यग्रहण के दौरान दोपहर में बादल छाए रहने व बरसात होने के चलते लोग सूर्य की बदलती आकृति को नहीं देख पाए। हालांकि इस दौरान लोगों ने टीवी व मोबाइल पर इसके बारे में जानकारी ली। ग्रहण के प्रभाव से बचने के लिए लोग घरों से कम ही बाहर निकले। ग्रहण समाप्त होने के बाद लोगों ने स्नान-दान भी किया।
रविवार को लगने वाले सूर्य ग्रहण को लेकर लोगों में काफी उत्सुकता थी। कई दिन से समाचार माध्यमों से इस ग्रहण के दौरान सूर्य की दुर्लभ आकृति दिखने की बात बताई जा रही थी। इसे लेकर लोग ग्रहण के दौरान सूर्य की स्थिति देखने की तैयारी में लगे थे। सुबह लोगों ने योगाभ्यास किया। सूर्यग्रहण के सूतक के चलते सुबह लोगों ने भोजन नहीं किया। दोपहर में लोग सूर्य के वलय को देखना चाहते थे लेकिन करीब 12 बजे ही बादल छा गए और कुछ ही देर में बारिश शुरू हो गई। जब तक बरसात खत्म हुई और आकाश साफ हुआ, ग्रहण काल समाप्त हो चुका था। ग्रहण काल समाप्त होने के बाद लोगों ने स्नान और दान किया।
बुढ़िया माई मंदिर के पुजारी पंडित सच्चिदानंद शुक्ला के अनुसार ग्रहण काल के दौरान मंदिर का कपाट बंद रहा। दोपहर बाद जब ग्रहण समाप्त हुआ, इसके उपरांत मंदिर व प्रतिमा की सफाई की गई। पंडित हरिओम पांडेय के अनुसार ग्रहण काल के समापन के पश्चात स्नान-दान करना पुण्यकारी माना जाता है।
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पडरौना। रविवार को लगे सूर्यग्रहण के दौरान दोपहर में बादल छाए रहने व बरसात होने के चलते लोग सूर्य की बदलती आकृति को नहीं देख पाए। हालांकि इस दौरान लोगों ने टीवी व मोबाइल पर इसके बारे में जानकारी ली। ग्रहण के प्रभाव से बचने के लिए लोग घरों से कम ही बाहर निकले। ग्रहण समाप्त होने के बाद लोगों ने स्नान-दान भी किया।
रविवार को लगने वाले सूर्य ग्रहण को लेकर लोगों में काफी उत्सुकता थी। कई दिन से समाचार माध्यमों से इस ग्रहण के दौरान सूर्य की दुर्लभ आकृति दिखने की बात बताई जा रही थी। इसे लेकर लोग ग्रहण के दौरान सूर्य की स्थिति देखने की तैयारी में लगे थे। सुबह लोगों ने योगाभ्यास किया। सूर्यग्रहण के सूतक के चलते सुबह लोगों ने भोजन नहीं किया। दोपहर में लोग सूर्य के वलय को देखना चाहते थे लेकिन करीब 12 बजे ही बादल छा गए और कुछ ही देर में बारिश शुरू हो गई। जब तक बरसात खत्म हुई और आकाश साफ हुआ, ग्रहण काल समाप्त हो चुका था। ग्रहण काल समाप्त होने के बाद लोगों ने स्नान और दान किया।
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बुढ़िया माई मंदिर के पुजारी पंडित सच्चिदानंद शुक्ला के अनुसार ग्रहण काल के दौरान मंदिर का कपाट बंद रहा। दोपहर बाद जब ग्रहण समाप्त हुआ, इसके उपरांत मंदिर व प्रतिमा की सफाई की गई। पंडित हरिओम पांडेय के अनुसार ग्रहण काल के समापन के पश्चात स्नान-दान करना पुण्यकारी माना जाता है।
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