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एसआईआर : रिश्तों की डोर मजबूत... पर मत के अधिकार पर संकट
Sun, 30 Nov 2025 11:31 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Sun, 30 Nov 2025 11:31 PM IST
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- 2003 के बाद नेपाल से ब्याह कर आई महिलाओं का नहीं भर पा रहा है एसआईआर फॉर्म
- सीमावर्ती समेत जिले के अन्य हिस्सों से भी नेपाल के मध्य इलाके में हुई है बड़ी संख्या में शादियां
- प्रशासन के पास नहीं है कोई विकल्प, चक्कर लगा रहे मतदाता
- नए आदेश के इंतजार में है प्रशासन, अपलोड नहीं हो पाएगा डाटा
सिद्धार्थनगर। जिले के सीमावर्ती गांवों में रिश्तों की डोर नेपाल की धरती से भले ही जुड़ी हो, लेकिन वहां रहने वाली हजारों महिलाओं को विशेष मतदाता पुनरीक्षण अभियान में नाम हटने का डर सता रहा है। 2003 से पहले आने वाली महिलाएं, जिनका नाम लिस्ट में है, उन्हें तो इसकी चिंता नहीं है, लेकिन इसके बाद ब्याह कर आई महिलाओं के एसआईआर फाॅर्म नहीं भर पा रहा है।
ऐसा इसलिए कि दूसरे फेज में उन्हें मताधिकार को पुख्ता करने के लिए 2003 की सूची में शामिल मां-बाप में किसी का पहचान पत्र देना होगा। मगर उनके माता-पिता का मूल निवास नेपाल होने और उनका नाम मतदाता सूची में शामिल न होने से समस्या हो रही है। जिले के अन्य हिस्सों में भी बड़ी संख्या में ऐसे विवाह हुए हैं। अब प्रक्रिया पूरी करने के लिए यह लोग बीएलओ और अफसरों के पास चक्कर लगा रहे हैं। वहीं प्रशासनिक जिम्मेदार दिशा-निर्देश का इंतजार करने का हवाला देकर उन्हें इंतजार करने की सलाह दे रहे हैं।
सबसे बड़ा असर पंचायत और नगर निकाय क्षेत्र की महिलाओं पर पड़ रहा है। मतदाता बनने का अधिकार सिर्फ कागजों की कमी के कारण अधर में है। दूसरी तरफ जिले के तमाम परिवारों ने नेपाल के मध्य और तराई क्षेत्रों में बेटियों की शादी की है। इधर से गई बेटियों को किसी तरह की परेशानी नहीं है, क्योंकि उनके और परिवार वालों के दस्तावेज पहले से पंजीकृत है, लेकिन नेपाल से आई महिलाओं का न तो सरकार की योजनाओं में आसानी से नाम जुड़ पा रहा है और न ही राशन कार्ड में ही उनका नाम है। अधिकारी भी मानते हैं कि मामला संवेदनशील है क्योंकि इसमें सीमावर्ती संबंधों की सामाजिक जटिलता भी जुड़ी है।
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समस्या के कारण
तकनीकी खामी के कारण एसआईआर अपलोड सिस्टम की बंदी
उच्च स्तर से नए आदेश की प्रतीक्षा
सीमा-पार विवाहों का बढ़ा ग्राफ
दस्तावेज सत्यापन प्रक्रिया का जटिल होना
मतदाता सूची अपडेट की समय-सीमा निकट होना है।
नेपाल से आई महिलाओं के सामने प्रमुख संकट
एसआईआर अपलोड न होने से पहचान प्रक्रिया अधूरी
मतदाता सूची में नाम दर्ज नहीं हो पा रहा
सरकारी योजनाओं का लाभ अटका
तकनीकी सिस्टम बंद, अधिकारी भी असहाय है।
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पड़ताल में यह बात आई सामने, लोगों ने व्यक्त किया दर्द
घोसियारी। एसआईआर फॉर्म भरने के लिए बीएलओ को सबसे ज्यादा परेशानी गांव की महिलाओं का फॉर्म भरने में हो रही है। बीएलओ शिवकुमार मिश्र ने बताया कि 2003 की वोटर लिस्ट में जिसका नाम नहीं है। उनके माता-पिता या माता-पिता का नाम नहीं मिलने पर उनके बाबा दादी का नाम क्रमांक बूथ संख्या विधानसभा का विवरण देना होता है, जिसको भरने में बहुत परेशानी हो रही है।
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नेपाल की महिला के एसआईआर फाॅर्म में पहचान पत्र बन रहा अड़चन
सकारपार। नेपाल की महिलाओं का एसआईआर फाॅर्म भरने में पहचान पत्र अड़चन बन रहा है। जिन पुरुष और महिलाओं का 2003 की मतदाता सूची में नाम नहीं है, उन महिलाओं का एसआईआर फाॅर्म भरने के लिए उनके माता-पिता से संपर्क न होना भी फाॅर्म भरने की प्रक्रिया में बाधक बन रहा है। बांसी विकास क्षेत्र के बूथ संख्या 283 गोनहा ताल में माया पत्नी सुरेंद्र चौरसिया, जिनका मायका नेपाल देश में है। माया का नाम 2003 की मतदाता सूची में नहीं है, लेकिन 2025 की सूची में है। माया का फार्म भरने के लिए नेपाल का पहचान पत्र मान्य नहीं हो रहा है। वहीं, बीएलओ आशीष कुमार पांडेय ने बताया कि नेपाल की जिन महिला की शादी यहां पर हुई है और उनका नाम 2003 की मतदाता सूची में नहीं है। ऐसी स्थिति में समझ में नहीं आ रहा कि नोटिस में क्या जवाब लगाया जाए और प्रमाण पत्र के तौर पर कौन सा कागज लगाया जाए। साथ ही जिन मतदाताओं नाम 2003 की सूची में नहीं है और 2025 की सूची में है। उनकी मैपिंग नहीं हो पा रही है। ऐसी स्थिति में इनका फॉर्म कैसे भरा जाएगा।
इस संबंध में एसडीएम बांसी और तहसीलदार से कई बार वार्ता करने की कोशिश की गई, लेकिन उनका फोन कनेक्ट न होने के कारण वार्ता नहीं हो सकी।
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एक परिवार में भी सबका नाम नहीं
शोहरतगढ़। एसआईआर लिस्ट में शोहरतगढ़ विधानसभा क्षेत्र के प्रत्येक गांव में हर परिवार एक से दो सदस्यों का नाम नहीं होने पर वह लोग परेशान हैं। वह बीएलओ से पूछते नजर आ रहे कि मेरा एसआईआर फाॅर्म कैसे भरा जाएगा। खुरहुरिया निवासी ओम प्रकाश शुक्ला ने बताया कि परिवार में एसआईआर फॉर्म सबका भरा गया, लेकिन हमारा नहीं आया है। शोहरतगढ़ कस्बे में जैकी वर्मा, रिंकू, राधेश्याम पटवा, नेंबूलाल, शैल कुमारी ने कहा कि एसआईआर फाॅर्म में घर के पांच मतदाता में दो का नाम आया है, तीन का नाम नहीं है। इसी प्रकार सज्जाद हुसैन ने कहा कि एसआईआर लिस्ट में मेरा नाम है बाकी घर के अन्य मतदाता का नाम ही नहीं है। सभी वार्डों के मतदाता सूची में खोज डाला कहीं नहीं दिखा।
एसडीएम विवेकानंद मिश्रा ने कहा कि जिन मतदाताओं का नाम एसआईआर लिस्ट में नहीं है। उन्हें फाॅर्म संख्या-6 भरना होगा। यह कार्य बीएलओ 9 दिसंबर के बाद गांव में जाकर फाॅर्म देकर करवाएंगे। मतदाता का आधार कार्ड और फोटो लगेगी।
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एसआईआर पुनरीक्षण में नेपाली विवाहित महिलाओं के नाम जुड़ने में अड़चन
खुनुवां। एसआईआर (विशेष मतदाता पुनरीक्षण) के तहत मतदाता सूची विशेष गहन पुनरीक्षण का कार्य जारी है, लेकिन भारत-नेपाल सीमा से जुड़े क्षेत्रों में नेपाली विवाहित महिलाओं के नाम जोड़ने को लेकर गंभीर चुनौतियां सामने आ रही हैं। वर्षों से भारत में रह रही इन महिलाओं के सामने मतदाता सूची से बाहर होने का भय लगातार बढ़ता जा रहा है। स्थानीय स्तर पर यह मुद्दा अब सामाजिक, प्रशासनिक और कूटनीतिक तीनों ही स्तरों पर संवेदनशील बन गया है।
1. रोटी–बेटी का रिश्ता बना फांस
भारत–नेपाल के बीच सदियों से चले आ रहे रोटी–बेटी के संबंधों के कारण दोनों देशों के नागरिकों का आवागमन और आपसी विवाह काफी सामान्य है, लेकिन यही रिश्ता अब वोटर सूची में नामांकन के दौरान बड़ी बाधा बन रहा है। नेपाल से विवाह कर भारत आई महिलाएं वर्षों से सीमा के भारतीय गांवों में रह रही हैं, फिर भी कागजी जटिलताओं के चलते वे अपने राजनीतिक अधिकारों से वंचित हो रही हैं।
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2. मूल मुद्दा : दस्तावेजों की कमी सबसे बड़ी चुनौती
अधिकांश नेपाली मूल की विवाहित महिलाओं के पास ऐसे पर्याप्त दस्तावेज नहीं हैं, जिनसे वे भारतीय नागरिकता या दीर्घकालिक निवास सिद्ध कर सकें। पुरानी पीढ़ी के लोगों के पास जन्म प्रमाणपत्र नहीं, स्कूल प्रमाणपत्र नेपाल का है, विवाह के बाद भारत में पते की स्थायी पुष्टि में दिक्कत इन कारणों से बूथ स्तर अधिकारियों/कर्मचारियों को भी प्रक्रिया पूरी करने में कठिनाई हो रही है।
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3. उलझा रहीं वर्ष 2003 में नाम और जन्मतिथि की शर्तें
मतदाता सूची में नाम जोड़ने के लिए लागू नियमों के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति 1 जुलाई 1987 से 2 दिसंबर 2004 के बीच भारत में जन्मा है, तो वह सूची में शामिल किया जा सकता है। बशर्ते पर्याप्त प्रमाण हों। नेपाली विवाहित महिलाओं के मामले में यह शर्त और कट ऑफ वर्ष (2003) स्थिति को और जटिल बना देते हैं। क्योंकि, उनके पास भारत में जन्म संबंधी कोई भी दस्तावेज नहीं है।
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4. माओवादी आंदोलन और सीमा पर आकर बसने वाले लोगों से बढ़ी जटिलता
नेपाल में माओवादी आंदोलन के चरम पर (लगभग 1996-2006) बड़ी संख्या में परिवार सुरक्षा के लिए भारतीय सीमा क्षेत्र में आकर बस गए थे। ऐसे अधिकांश परिवारों की कानूनी स्थिति स्पष्ट नहीं है। इनमें कई महिलाएं वर्षों से भारत में रहती हैं, लेकिन न तो नागरिकता प्रक्रिया पूरी हुई और न ही मतदाता सूची में इनके नाम ही शामिल हो सके। यह वर्ग प्रशासन के लिए सबसे ज्यादा चुनौतीपूर्ण है।
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5. बढ़ती आबादी और दोहरी नागरिकता का सवाल
सीमा से सटे क्षेत्रों में जनसंख्या लगातार बढ़ रही है। यह विस्तार केवल प्राकृतिक वृद्धि नहीं बल्कि अंतरदेशीय विवाह और बसावट का मिश्रित परिणाम है। इस स्थिति में दोहरी नागरिकता (भारत और नेपाल) को लेकर भी सवाल उठते रहे हैं, क्योंकि नेपाली नागरिकता लेने के बाद भारतीय मतदाता सूची में नाम जुड़ना भारत के कानून के अनुरूप नहीं। प्रशासन इसी संवेदनशीलता को देखते हुए जांच में काफी सावधानी बरत रहा है।
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6. भारत-नेपाल संबंधों पर संभावित असर, कूटनीतिक संवेदनशीलता बढ़ी
इस पूरे मामले को सिर्फ स्थानीय समस्या मानना गलत होगा। भारत और नेपाल दोनों के लिए यह मामला कूटनीतिक रूप से संवेदनशील है। नागरिकता और मतदान अधिकार से जुड़े निर्णय द्विपक्षीय संबंधों पर प्रभाव डाल सकते हैं, इसलिए प्रशासन किसी भी प्रकार की जल्दबाजी या गलती से बचना चाहता है।
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वोटिंग से वंचित रहने का सता रहा है डर
डुमरियागंज। निर्वाचन आयोग द्वारा चलाए जा रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान के तहत डिजिटाइजेशन का कार्य अब अंतिम चरण में पहुंच गया है। वहीं, दूसरी तरफ डुमरियागंज क्षेत्र के कई गांवों के दर्जनो बूथों पर नेटवर्क प्राॅब्लम और वोटर लिस्ट की मैपिंग न होने से तमाम मतदाताओं के फॉर्म की फीडिंग फर्स्ट, सेकेंड ऑप्शन में न होकर थर्ड ऑप्शन में हो रही है। इससे उन्हें नोटिस और नाम कटने का डर सता रहा है। कुछ ऐसे लोग भी हैं, जिनका वोटर लिस्ट में नाम होने के बावजूद उन्हें एसआईआर सर्वे फाॅर्म नहीं मिला है।
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एसआईआर अभियान में हो रही असुविधा को दूर करे प्रशासन
हमारी पत्नी प्रीति का एसआईआर फाॅर्म बीएलओ के द्वारा उपलब्ध नहीं कराया गया है, जिससे एसआईआर फाॅर्म नहीं भरा जा रहा है। फाॅर्म के लिए जब गांव के बीएलओ रोजगार सेवक अनिल यादव से बात की गई तो उन्होंने बताया कि 11 दिसंबर के बाद फाॅर्म उपलब्ध होने की संभावना है। निर्वाचन अधिकारी का जैसा भी निर्देश मिलेगा उसका अनुपालन किया जाएगा।
- विनोद कुमार, सेमरा बनकसिया
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हम पिछले एक सप्ताह से एसआईआर फॉर्म जमा करने और फीडिंग कराने के लिए बीएलओ के पास दौड़ लगा रहे हैं, लेकिन नेटवर्क प्राॅब्लम और वोटर लिस्ट की मैपिंग न होने से उनका डाटा अपडेट नहीं हो पा रहा है। चिंता सता रही है कि कहीं एसआईआर प्रपत्र जमा करने की तिथि गुजर जाए और वह वोटर सूची में शामिल ही न हो पाएं।
बब्लू , ग्राम हल्लौर
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शासन ने एसआईआर फाॅर्म जमा और फीडिंग की तिथि एक सप्ताह बढ़ा कर मतदाताओं को राहत दी है। इस बढ़ी हुई तिथि में जो वोटर अपने फाॅर्म कंप्लीट नहीं कर पाए थे, उन्हें मौका मिल जाएगा।
सुफियान अख्तर ग्राम टिकरिया
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हल्लौर के बूथ संख्या 173 के 90 मतदाता अज्ञात
डुमरियागंज। डुमरियागंज तहसील क्षेत्र के ग्राम हल्लौर स्थित माॅडर्न हायर सेकेंडरी स्कूल के बूथ संखया-173 के 90 मतदाताओं की अभी तक शिनाख्त नहीं हो पाई है। इसकी वजह से उनका एसआईआर प्रपत्र नहीं वितरित हो पाया है। बीएलओ अमृतलाल ने बताया कि डोर टू डोर और गांव के गणमान्य व्यक्तियों से संपर्क कर उनके नाम पता की पुष्टि का प्रयास किया जा रहा है। वहीं ग्राम भंटगवा स्थित प्राथमिक विद्यालय के बूथ संख्या 179 पर दो मतदाताओं के चिह्नित न हो पाने से उनके एसआईआर प्रपत्र वितरित नहीं हो पा रहे हैं। बीएलओ जवाहिर लाल ने बताया कि नाम पते की शिनाख्त करने का प्रयास किया जा रहा है।
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बोले जिम्मेदार
किन्ही कारणवश एसआईआर प्रपत्र न प्राप्त करने वाले मतदाताओं को परेशान होने की जरूरत नहीं है। ऐसे लोग अपना ईपीआईसी (मतदाता पहचान पत्र ) दिखाकर बीआरसी कार्यालय डुमरियागंज से एसआईआर फॉर्म लेकर उसे भर सकते हैं। साथ ही जिनके फॉर्म फर्स्ट और सेकेंड ऑप्शन में नहीं लोड हो पा रहे हैं और वे थर्ड ऑप्शन में फीडिंग कराएं, उनको चिंतित होने की जरूरत नहीं है।एसआईआर फीडिंग प्रकिया पूरी होने के बाद उन्हें नोटिस मिलने पर परिवार रजिस्टर की नकल या मतदाता सूची, हाईस्कूल का अंक पत्र आदि की छाया प्रति बीएलओ को देनी होगी।
राजेश कुमार, एसडीएम डुमरियागंज
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बोले जिम्मेदार
निर्वाचन आयोग के नियमानुसार जिले में एसआईआर की प्रक्रिया चल रही है, जिसमें निर्धारित प्रपत्र पर संबंधित सूचनाएं भरकर अपलोड की जा रही है। अभी शादी कर यहां आई नेपाल की महिलाओं के लिए कोई अलग से दिशा-निर्देश नहीं मिला है। जैसा निर्देश मिलेगा उसी के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
- गौरव श्रीवास्तव, एडीएम
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- सीमावर्ती समेत जिले के अन्य हिस्सों से भी नेपाल के मध्य इलाके में हुई है बड़ी संख्या में शादियां
- प्रशासन के पास नहीं है कोई विकल्प, चक्कर लगा रहे मतदाता
- नए आदेश के इंतजार में है प्रशासन, अपलोड नहीं हो पाएगा डाटा
सिद्धार्थनगर। जिले के सीमावर्ती गांवों में रिश्तों की डोर नेपाल की धरती से भले ही जुड़ी हो, लेकिन वहां रहने वाली हजारों महिलाओं को विशेष मतदाता पुनरीक्षण अभियान में नाम हटने का डर सता रहा है। 2003 से पहले आने वाली महिलाएं, जिनका नाम लिस्ट में है, उन्हें तो इसकी चिंता नहीं है, लेकिन इसके बाद ब्याह कर आई महिलाओं के एसआईआर फाॅर्म नहीं भर पा रहा है।
ऐसा इसलिए कि दूसरे फेज में उन्हें मताधिकार को पुख्ता करने के लिए 2003 की सूची में शामिल मां-बाप में किसी का पहचान पत्र देना होगा। मगर उनके माता-पिता का मूल निवास नेपाल होने और उनका नाम मतदाता सूची में शामिल न होने से समस्या हो रही है। जिले के अन्य हिस्सों में भी बड़ी संख्या में ऐसे विवाह हुए हैं। अब प्रक्रिया पूरी करने के लिए यह लोग बीएलओ और अफसरों के पास चक्कर लगा रहे हैं। वहीं प्रशासनिक जिम्मेदार दिशा-निर्देश का इंतजार करने का हवाला देकर उन्हें इंतजार करने की सलाह दे रहे हैं।
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सबसे बड़ा असर पंचायत और नगर निकाय क्षेत्र की महिलाओं पर पड़ रहा है। मतदाता बनने का अधिकार सिर्फ कागजों की कमी के कारण अधर में है। दूसरी तरफ जिले के तमाम परिवारों ने नेपाल के मध्य और तराई क्षेत्रों में बेटियों की शादी की है। इधर से गई बेटियों को किसी तरह की परेशानी नहीं है, क्योंकि उनके और परिवार वालों के दस्तावेज पहले से पंजीकृत है, लेकिन नेपाल से आई महिलाओं का न तो सरकार की योजनाओं में आसानी से नाम जुड़ पा रहा है और न ही राशन कार्ड में ही उनका नाम है। अधिकारी भी मानते हैं कि मामला संवेदनशील है क्योंकि इसमें सीमावर्ती संबंधों की सामाजिक जटिलता भी जुड़ी है।
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समस्या के कारण
तकनीकी खामी के कारण एसआईआर अपलोड सिस्टम की बंदी
उच्च स्तर से नए आदेश की प्रतीक्षा
सीमा-पार विवाहों का बढ़ा ग्राफ
दस्तावेज सत्यापन प्रक्रिया का जटिल होना
मतदाता सूची अपडेट की समय-सीमा निकट होना है।
नेपाल से आई महिलाओं के सामने प्रमुख संकट
एसआईआर अपलोड न होने से पहचान प्रक्रिया अधूरी
मतदाता सूची में नाम दर्ज नहीं हो पा रहा
सरकारी योजनाओं का लाभ अटका
तकनीकी सिस्टम बंद, अधिकारी भी असहाय है।
पड़ताल में यह बात आई सामने, लोगों ने व्यक्त किया दर्द
घोसियारी। एसआईआर फॉर्म भरने के लिए बीएलओ को सबसे ज्यादा परेशानी गांव की महिलाओं का फॉर्म भरने में हो रही है। बीएलओ शिवकुमार मिश्र ने बताया कि 2003 की वोटर लिस्ट में जिसका नाम नहीं है। उनके माता-पिता या माता-पिता का नाम नहीं मिलने पर उनके बाबा दादी का नाम क्रमांक बूथ संख्या विधानसभा का विवरण देना होता है, जिसको भरने में बहुत परेशानी हो रही है।
नेपाल की महिला के एसआईआर फाॅर्म में पहचान पत्र बन रहा अड़चन
सकारपार। नेपाल की महिलाओं का एसआईआर फाॅर्म भरने में पहचान पत्र अड़चन बन रहा है। जिन पुरुष और महिलाओं का 2003 की मतदाता सूची में नाम नहीं है, उन महिलाओं का एसआईआर फाॅर्म भरने के लिए उनके माता-पिता से संपर्क न होना भी फाॅर्म भरने की प्रक्रिया में बाधक बन रहा है। बांसी विकास क्षेत्र के बूथ संख्या 283 गोनहा ताल में माया पत्नी सुरेंद्र चौरसिया, जिनका मायका नेपाल देश में है। माया का नाम 2003 की मतदाता सूची में नहीं है, लेकिन 2025 की सूची में है। माया का फार्म भरने के लिए नेपाल का पहचान पत्र मान्य नहीं हो रहा है। वहीं, बीएलओ आशीष कुमार पांडेय ने बताया कि नेपाल की जिन महिला की शादी यहां पर हुई है और उनका नाम 2003 की मतदाता सूची में नहीं है। ऐसी स्थिति में समझ में नहीं आ रहा कि नोटिस में क्या जवाब लगाया जाए और प्रमाण पत्र के तौर पर कौन सा कागज लगाया जाए। साथ ही जिन मतदाताओं नाम 2003 की सूची में नहीं है और 2025 की सूची में है। उनकी मैपिंग नहीं हो पा रही है। ऐसी स्थिति में इनका फॉर्म कैसे भरा जाएगा।
इस संबंध में एसडीएम बांसी और तहसीलदार से कई बार वार्ता करने की कोशिश की गई, लेकिन उनका फोन कनेक्ट न होने के कारण वार्ता नहीं हो सकी।
एक परिवार में भी सबका नाम नहीं
शोहरतगढ़। एसआईआर लिस्ट में शोहरतगढ़ विधानसभा क्षेत्र के प्रत्येक गांव में हर परिवार एक से दो सदस्यों का नाम नहीं होने पर वह लोग परेशान हैं। वह बीएलओ से पूछते नजर आ रहे कि मेरा एसआईआर फाॅर्म कैसे भरा जाएगा। खुरहुरिया निवासी ओम प्रकाश शुक्ला ने बताया कि परिवार में एसआईआर फॉर्म सबका भरा गया, लेकिन हमारा नहीं आया है। शोहरतगढ़ कस्बे में जैकी वर्मा, रिंकू, राधेश्याम पटवा, नेंबूलाल, शैल कुमारी ने कहा कि एसआईआर फाॅर्म में घर के पांच मतदाता में दो का नाम आया है, तीन का नाम नहीं है। इसी प्रकार सज्जाद हुसैन ने कहा कि एसआईआर लिस्ट में मेरा नाम है बाकी घर के अन्य मतदाता का नाम ही नहीं है। सभी वार्डों के मतदाता सूची में खोज डाला कहीं नहीं दिखा।
एसडीएम विवेकानंद मिश्रा ने कहा कि जिन मतदाताओं का नाम एसआईआर लिस्ट में नहीं है। उन्हें फाॅर्म संख्या-6 भरना होगा। यह कार्य बीएलओ 9 दिसंबर के बाद गांव में जाकर फाॅर्म देकर करवाएंगे। मतदाता का आधार कार्ड और फोटो लगेगी।
एसआईआर पुनरीक्षण में नेपाली विवाहित महिलाओं के नाम जुड़ने में अड़चन
खुनुवां। एसआईआर (विशेष मतदाता पुनरीक्षण) के तहत मतदाता सूची विशेष गहन पुनरीक्षण का कार्य जारी है, लेकिन भारत-नेपाल सीमा से जुड़े क्षेत्रों में नेपाली विवाहित महिलाओं के नाम जोड़ने को लेकर गंभीर चुनौतियां सामने आ रही हैं। वर्षों से भारत में रह रही इन महिलाओं के सामने मतदाता सूची से बाहर होने का भय लगातार बढ़ता जा रहा है। स्थानीय स्तर पर यह मुद्दा अब सामाजिक, प्रशासनिक और कूटनीतिक तीनों ही स्तरों पर संवेदनशील बन गया है।
1. रोटी–बेटी का रिश्ता बना फांस
भारत–नेपाल के बीच सदियों से चले आ रहे रोटी–बेटी के संबंधों के कारण दोनों देशों के नागरिकों का आवागमन और आपसी विवाह काफी सामान्य है, लेकिन यही रिश्ता अब वोटर सूची में नामांकन के दौरान बड़ी बाधा बन रहा है। नेपाल से विवाह कर भारत आई महिलाएं वर्षों से सीमा के भारतीय गांवों में रह रही हैं, फिर भी कागजी जटिलताओं के चलते वे अपने राजनीतिक अधिकारों से वंचित हो रही हैं।
2. मूल मुद्दा : दस्तावेजों की कमी सबसे बड़ी चुनौती
अधिकांश नेपाली मूल की विवाहित महिलाओं के पास ऐसे पर्याप्त दस्तावेज नहीं हैं, जिनसे वे भारतीय नागरिकता या दीर्घकालिक निवास सिद्ध कर सकें। पुरानी पीढ़ी के लोगों के पास जन्म प्रमाणपत्र नहीं, स्कूल प्रमाणपत्र नेपाल का है, विवाह के बाद भारत में पते की स्थायी पुष्टि में दिक्कत इन कारणों से बूथ स्तर अधिकारियों/कर्मचारियों को भी प्रक्रिया पूरी करने में कठिनाई हो रही है।
3. उलझा रहीं वर्ष 2003 में नाम और जन्मतिथि की शर्तें
मतदाता सूची में नाम जोड़ने के लिए लागू नियमों के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति 1 जुलाई 1987 से 2 दिसंबर 2004 के बीच भारत में जन्मा है, तो वह सूची में शामिल किया जा सकता है। बशर्ते पर्याप्त प्रमाण हों। नेपाली विवाहित महिलाओं के मामले में यह शर्त और कट ऑफ वर्ष (2003) स्थिति को और जटिल बना देते हैं। क्योंकि, उनके पास भारत में जन्म संबंधी कोई भी दस्तावेज नहीं है।
4. माओवादी आंदोलन और सीमा पर आकर बसने वाले लोगों से बढ़ी जटिलता
नेपाल में माओवादी आंदोलन के चरम पर (लगभग 1996-2006) बड़ी संख्या में परिवार सुरक्षा के लिए भारतीय सीमा क्षेत्र में आकर बस गए थे। ऐसे अधिकांश परिवारों की कानूनी स्थिति स्पष्ट नहीं है। इनमें कई महिलाएं वर्षों से भारत में रहती हैं, लेकिन न तो नागरिकता प्रक्रिया पूरी हुई और न ही मतदाता सूची में इनके नाम ही शामिल हो सके। यह वर्ग प्रशासन के लिए सबसे ज्यादा चुनौतीपूर्ण है।
5. बढ़ती आबादी और दोहरी नागरिकता का सवाल
सीमा से सटे क्षेत्रों में जनसंख्या लगातार बढ़ रही है। यह विस्तार केवल प्राकृतिक वृद्धि नहीं बल्कि अंतरदेशीय विवाह और बसावट का मिश्रित परिणाम है। इस स्थिति में दोहरी नागरिकता (भारत और नेपाल) को लेकर भी सवाल उठते रहे हैं, क्योंकि नेपाली नागरिकता लेने के बाद भारतीय मतदाता सूची में नाम जुड़ना भारत के कानून के अनुरूप नहीं। प्रशासन इसी संवेदनशीलता को देखते हुए जांच में काफी सावधानी बरत रहा है।
6. भारत-नेपाल संबंधों पर संभावित असर, कूटनीतिक संवेदनशीलता बढ़ी
इस पूरे मामले को सिर्फ स्थानीय समस्या मानना गलत होगा। भारत और नेपाल दोनों के लिए यह मामला कूटनीतिक रूप से संवेदनशील है। नागरिकता और मतदान अधिकार से जुड़े निर्णय द्विपक्षीय संबंधों पर प्रभाव डाल सकते हैं, इसलिए प्रशासन किसी भी प्रकार की जल्दबाजी या गलती से बचना चाहता है।
वोटिंग से वंचित रहने का सता रहा है डर
डुमरियागंज। निर्वाचन आयोग द्वारा चलाए जा रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान के तहत डिजिटाइजेशन का कार्य अब अंतिम चरण में पहुंच गया है। वहीं, दूसरी तरफ डुमरियागंज क्षेत्र के कई गांवों के दर्जनो बूथों पर नेटवर्क प्राॅब्लम और वोटर लिस्ट की मैपिंग न होने से तमाम मतदाताओं के फॉर्म की फीडिंग फर्स्ट, सेकेंड ऑप्शन में न होकर थर्ड ऑप्शन में हो रही है। इससे उन्हें नोटिस और नाम कटने का डर सता रहा है। कुछ ऐसे लोग भी हैं, जिनका वोटर लिस्ट में नाम होने के बावजूद उन्हें एसआईआर सर्वे फाॅर्म नहीं मिला है।
एसआईआर अभियान में हो रही असुविधा को दूर करे प्रशासन
हमारी पत्नी प्रीति का एसआईआर फाॅर्म बीएलओ के द्वारा उपलब्ध नहीं कराया गया है, जिससे एसआईआर फाॅर्म नहीं भरा जा रहा है। फाॅर्म के लिए जब गांव के बीएलओ रोजगार सेवक अनिल यादव से बात की गई तो उन्होंने बताया कि 11 दिसंबर के बाद फाॅर्म उपलब्ध होने की संभावना है। निर्वाचन अधिकारी का जैसा भी निर्देश मिलेगा उसका अनुपालन किया जाएगा।
- विनोद कुमार, सेमरा बनकसिया
हम पिछले एक सप्ताह से एसआईआर फॉर्म जमा करने और फीडिंग कराने के लिए बीएलओ के पास दौड़ लगा रहे हैं, लेकिन नेटवर्क प्राॅब्लम और वोटर लिस्ट की मैपिंग न होने से उनका डाटा अपडेट नहीं हो पा रहा है। चिंता सता रही है कि कहीं एसआईआर प्रपत्र जमा करने की तिथि गुजर जाए और वह वोटर सूची में शामिल ही न हो पाएं।
बब्लू , ग्राम हल्लौर
शासन ने एसआईआर फाॅर्म जमा और फीडिंग की तिथि एक सप्ताह बढ़ा कर मतदाताओं को राहत दी है। इस बढ़ी हुई तिथि में जो वोटर अपने फाॅर्म कंप्लीट नहीं कर पाए थे, उन्हें मौका मिल जाएगा।
सुफियान अख्तर ग्राम टिकरिया
हल्लौर के बूथ संख्या 173 के 90 मतदाता अज्ञात
डुमरियागंज। डुमरियागंज तहसील क्षेत्र के ग्राम हल्लौर स्थित माॅडर्न हायर सेकेंडरी स्कूल के बूथ संखया-173 के 90 मतदाताओं की अभी तक शिनाख्त नहीं हो पाई है। इसकी वजह से उनका एसआईआर प्रपत्र नहीं वितरित हो पाया है। बीएलओ अमृतलाल ने बताया कि डोर टू डोर और गांव के गणमान्य व्यक्तियों से संपर्क कर उनके नाम पता की पुष्टि का प्रयास किया जा रहा है। वहीं ग्राम भंटगवा स्थित प्राथमिक विद्यालय के बूथ संख्या 179 पर दो मतदाताओं के चिह्नित न हो पाने से उनके एसआईआर प्रपत्र वितरित नहीं हो पा रहे हैं। बीएलओ जवाहिर लाल ने बताया कि नाम पते की शिनाख्त करने का प्रयास किया जा रहा है।
बोले जिम्मेदार
किन्ही कारणवश एसआईआर प्रपत्र न प्राप्त करने वाले मतदाताओं को परेशान होने की जरूरत नहीं है। ऐसे लोग अपना ईपीआईसी (मतदाता पहचान पत्र ) दिखाकर बीआरसी कार्यालय डुमरियागंज से एसआईआर फॉर्म लेकर उसे भर सकते हैं। साथ ही जिनके फॉर्म फर्स्ट और सेकेंड ऑप्शन में नहीं लोड हो पा रहे हैं और वे थर्ड ऑप्शन में फीडिंग कराएं, उनको चिंतित होने की जरूरत नहीं है।एसआईआर फीडिंग प्रकिया पूरी होने के बाद उन्हें नोटिस मिलने पर परिवार रजिस्टर की नकल या मतदाता सूची, हाईस्कूल का अंक पत्र आदि की छाया प्रति बीएलओ को देनी होगी।
राजेश कुमार, एसडीएम डुमरियागंज
बोले जिम्मेदार
निर्वाचन आयोग के नियमानुसार जिले में एसआईआर की प्रक्रिया चल रही है, जिसमें निर्धारित प्रपत्र पर संबंधित सूचनाएं भरकर अपलोड की जा रही है। अभी शादी कर यहां आई नेपाल की महिलाओं के लिए कोई अलग से दिशा-निर्देश नहीं मिला है। जैसा निर्देश मिलेगा उसी के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
- गौरव श्रीवास्तव, एडीएम