{"_id":"5a5e52db4f1c1ba3268b4c0a","slug":"shitlahar-raises-problems-of-children-and-the-elderly","type":"story","status":"publish","title_hn":"शीतलहर में बच्चों और बुजुर्गों की परेशानी बढ़ी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
शीतलहर में बच्चों और बुजुर्गों की परेशानी बढ़ी
कुश्ाीनगर (ब्यूरो)
Updated Wed, 17 Jan 2018 01:00 AM IST
विज्ञापन
मरीज
- फोटो : कुश्ाीनगर
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पडरौना। पिछले एक महीने से पड़ रही कड़ाके की ठंड में वैसे तो हर उम्र के लोगों को दिक्कतें हो रही हैं, लेकिन बच्चों में हाइपोथर्निया, कोल्ड डायरिया, निमोनिया, सर्दी-जुकाम का खतरा तो बुजुुर्गों को ठंड लगने पर हार्टअटैक, ब्रेनहेमरेज और स्वांस संबंधी तकलीफें बढ़ गई हैं। अस्पतालों में मरीज बढ़ने लगे हैं। डॉक्टर भी मानते हैं कि ऐसे समय में बच्चों और बुजुर्गों को ठंड से बचाना नितांत जरूरी है, हालांकि मंगलवार को दोपहर में धूप होने पर लोगों ने थोड़ी राहत जरूर महसूस की, लेकिन गलन में कोई कमी नहीं रही।
मध्य दिसंबर से ही जिले में कड़ाके की ठंड पड़ रही है। इससे जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है। घरों में लोग अलाव या इलेक्ट्रिक संसाधनों से ठंड से राहत पाने की कोशिश कर रहे हैं। ठंड को देखते हुए प्रशासन और स्वयंसेवी संगठनों ने गरीब तबके के लोगों में गर्म कपड़े भी वितरित किया है। ठंड इतनी बढ़ गई है कि इंसान ही नहीं पशु और परिंदे भी जगह-जगह दुबके रह रहे हैं।
मंगलवार को दोपहर बाद धूप खिली, लेकिन गलन अधिक होने के कारण लोगों को ठंड में कोई कमी महसूस नहीं हुई। दिन ढलते ही लोग फिर अलाव और गर्म कपड़ों का सहारा लेने के लिए विवश हो गए। देर शाम तक सड़कों पर भी सन्नाटा छाने लगा।
विज्ञापन
विज्ञापन
मध्य दिसंबर से ही जिले में कड़ाके की ठंड पड़ रही है। इससे जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है। घरों में लोग अलाव या इलेक्ट्रिक संसाधनों से ठंड से राहत पाने की कोशिश कर रहे हैं। ठंड को देखते हुए प्रशासन और स्वयंसेवी संगठनों ने गरीब तबके के लोगों में गर्म कपड़े भी वितरित किया है। ठंड इतनी बढ़ गई है कि इंसान ही नहीं पशु और परिंदे भी जगह-जगह दुबके रह रहे हैं।
विज्ञापन
मंगलवार को दोपहर बाद धूप खिली, लेकिन गलन अधिक होने के कारण लोगों को ठंड में कोई कमी महसूस नहीं हुई। दिन ढलते ही लोग फिर अलाव और गर्म कपड़ों का सहारा लेने के लिए विवश हो गए। देर शाम तक सड़कों पर भी सन्नाटा छाने लगा।
विज्ञापन