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Kushinagar News: जिला सहकारी बैंक के अध्यक्ष का इस्तीफा मांगा
Mon, 26 Aug 2024 02:46 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Mon, 26 Aug 2024 02:46 PM IST
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पडरौना। जिला सहकारी बैंक देवरिया-कुशीनगर के उपाध्यक्ष राघवेंद्र प्रताप सिंह उमंग ने अध्यक्ष रविंद्र प्रताप मल्ल के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने जिला सहकारी बैंक के अध्यक्ष पर दायित्वों का निर्वहन नहीं करने का आरोप लगाते हुए उनसे इस्तीफे की मांग की है। उन्होंने कहा कि अध्यक्ष अपने पद के दायित्व के निर्वहन में पूरी तरह से नाकाम व अक्षम हैं। इसके चलते संचालक मंडल में घोर असंतोष व्याप्त है। ऐसे अनेक निर्णय उन्होंने लिए हैं, जिसमें बोर्ड को विश्वास में नहीं लिया है।
जिला सहकारी बैंक के उपाध्यक्ष राघवेंद्र प्रताप सिंह रविवार को शहर के एक होटल में पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। उन्होंने कहा कि ऋण सीमा स्वीकृति कमेटी का अध्यक्ष होने के नाते में बोर्ड के संचालक तथा अधिकारियों से विचार-विर्मश कर ऋण वितरण और रिकवरी की रणनीति बनाकर एक संयुक्त स्थापित किया, जिससे वित्तीय वर्ष 2023-24 में 16 कमजोर बैंकों की श्रेणी में सर्वाधिक ऋण वितरण किए जाने का प्रशस्ति पत्र भी सहकारिता मंत्री की ओर से बैंक को प्राप्त हुआ है।
लेकिन, जिला सहकारी बैंक के अध्यक्ष की अरूचि, निष्क्रियता तथा उनके मनमाना रवैया एवं दूरदर्शिता के अभाव के कारण बैंक के माध्यम से अंत्योदय की परिकल्पना पूर्ण नहीं हो पाएगी। अध्यक्ष संचालक मंडल को विश्वास में लेकर कार्य करें अन्यथा अपने पद से इस्तीफा दें। बैंकहित और संचालक मंडल का विश्वास सर्वोपरि है। इसमें अध्यक्ष विफल हैं। ऐसे में नैतिकता के आधार पर उन्हें अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए।
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जिला सहकारी बैंक के उपाध्यक्ष राघवेंद्र प्रताप सिंह रविवार को शहर के एक होटल में पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। उन्होंने कहा कि ऋण सीमा स्वीकृति कमेटी का अध्यक्ष होने के नाते में बोर्ड के संचालक तथा अधिकारियों से विचार-विर्मश कर ऋण वितरण और रिकवरी की रणनीति बनाकर एक संयुक्त स्थापित किया, जिससे वित्तीय वर्ष 2023-24 में 16 कमजोर बैंकों की श्रेणी में सर्वाधिक ऋण वितरण किए जाने का प्रशस्ति पत्र भी सहकारिता मंत्री की ओर से बैंक को प्राप्त हुआ है।
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लेकिन, जिला सहकारी बैंक के अध्यक्ष की अरूचि, निष्क्रियता तथा उनके मनमाना रवैया एवं दूरदर्शिता के अभाव के कारण बैंक के माध्यम से अंत्योदय की परिकल्पना पूर्ण नहीं हो पाएगी। अध्यक्ष संचालक मंडल को विश्वास में लेकर कार्य करें अन्यथा अपने पद से इस्तीफा दें। बैंकहित और संचालक मंडल का विश्वास सर्वोपरि है। इसमें अध्यक्ष विफल हैं। ऐसे में नैतिकता के आधार पर उन्हें अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए।
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