फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Kushinagar News ›   Rampant disarray at the medical college; a long, arduous process for tests and treatment.

Kushinagar News: मेडिकल कॉलेज में अव्यवस्था बेलगाम, जांच-इलाज के लिए लंबी दौड़

Sun, 26 Jul 2026 02:16 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर Updated Sun, 26 Jul 2026 02:16 AM IST
विज्ञापन
Rampant disarray at the medical college; a long, arduous process for tests and treatment.
मेडिकल कॉलेज में डाक्टर कक्ष केबाहर इलाज के लिए खड़े मरीज।संवाद
पडरौना। मेडिकल कॉलेज में बेलगाम अव्यवस्था के चलते मरीजों की दुश्वारियां बढ़ गई हैं। पर्ची काउंटर, ओपीडी और दवा काउंटर तक हर जगह लंबी कतारें लग रही हैं। मरीजों की भीढ़ के आगे जगह कम पड़ रही है। पर्चा बनवाने से लेकर डॉक्टर को दिखाने तक मरीजों को घंटों खड़े इंतजार करना पड़ रहा है। मर्ज की जांच कराने के लिए उन्हें दूसरे दिन पड़ता है और दोबारा मशक्कत करनी पड़ रही है।
विज्ञापन

मेडिकल कॉलेज में मरीजों की भीड़ के आगे जगह और विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी को परेशानी का कारण बताया जा रहा है। यही नहीं, कई डॉक्टरों के समय से ओपीडी में नहीं बैठने की वजह से मरीजों का इंतजार और बढ़ जाता है। डॉक्टर को दिखाने मेें ही इतना समय लग जा रहा है कि जब मरीज दवा काउंटर पर पहुंचता हैं वहां भी उन्हें लाइन में इंतजार करना पड़ता है।
विज्ञापन

असली दुश्वारी तब शुरू होती है जब डॉक्टर कोई जांच लिख देते हैं। पैथोलॉजी और रेडियोलॉजी की अव्यवस्था के चलते जांच कराने के लिए मरीज को अगले दिन फिर से लंबी दूरी तय कर अस्पताल आना पड़ता है। दूर-दराज से आने वाले मरीज बीमारी से ज्यादा भाग-दौड़ से बेहाल हो रहे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

ग्रामीण इलाकों से बड़ी संख्या में मरीज इलाज की उम्मीद लेकर मेडिकल कॉलेज में पहुंचते हैं। अस्पताल की दहलीज पर कदम रखते ही उन्हें अव्यवस्था का सामना करना पड़ रहा है। पर्ची काउंटर से शुरू हुआ इंतजार का सिलसिला डॉक्टर के चैंबर और फिर दवा काउंटर तक खत्म होने का नाम नहीं लेता। मेडिकल कॉलेज के प्रथम तल पर ओपीडी है। डॉक्टर को दिखाने के लिए मरीज या तीमारदार पहले पर्ची बनवाने पहुंचते हैं। यहां चार पर्ची काउंटर हैं। मरीजों की भीड़ के सामने पर्ची काउंटर पर जगह कम पड़ जाती है। पर्ची बनवाने में ही घंटे भर का समय लग जाता है।
इसके बाद मरीज ओपीडी कक्ष में पहुंचते हैं। वहां डॉक्टरों की लापरवाही मरीजों की बीमारी को और बढ़ा देते हैं। लोगों का कहना है कि ओपीडी में डॉक्टर समय से नहीं बैठते हैं। शुरुआत में कुछ मरीजों को देखने के बाद जूनियर डॉक्टरों के भरोसे छोड़कर विशेषज्ञ डॉक्टर चले जाते हैं। देर से पहुंचने वाले मरीजों को जूनियर डाॅक्टर से ही दिखाना पड़ता है। दवा काउंटर पर भी मरीजों की मुश्किलें कम नहीं होती हैं। दवा वितरण के लिए बनाए गए चार काउंटर में दो से तीन काउंटर ही सक्रिय रहते हैं। दवा लेने के लिए मरीजों को घंटों लाइन में खड़े होकर अपनी बारी का इंतजार करना पड़ता है।
वहीं इमरजेंसी वार्ड में आए मरीजों को भी अपनी बारी के लिए इंतजार करना पड़ता है। सबसे ज्यादा परेशानी उन मरीजों को झेलनी पड़ रही है, जिन्हें डॉक्टर जांच (पैथोलॉजी व एक्स-रे) लिख देते हैं। दोपहर तक कतार में लगकर डॉक्टर को दिखाने के बाद उसी दिन जांच मुमकिन नहीं हो पाती। ऐसे में मरीजों को अगले दिन फिर से अस्पताल पहुंचना पड़ता है। इससे मरीजों की तबीयत और बिगड़ने की आशंका बनी रहती है। मेडिकल कॉलेज में इलाज कराने पहुंचे मरीज व तीमारदारों की परेशानी कम नहीं हो रही है। शनिवार को मेडिकल कॉलेज की पड़ताल की गई। मरीजों व तीमारदारों ने कहा कि यहां पर इलाज के नाम पर सिर्फ परेशान किया जा रहा है। हर जगी घंटों इंतजार के बाद भी मुकम्मल इलाज नहीं हो पा रहा है।

00000
एक घंटे कतार में लगने के बाद बना पर्चा
चर्म रोग के इलाज के लिए सुबह करीब 11 बजे मेडिकल कॉलेज आ गया था। एक घंटे तक कतार में धक्का-मुक्की सहने के बाद पर्चा बन सका। अब डॉक्टर ने जांच लिख दी है। उसके लिए अब सोमवार को फिर से आना पड़ेगा। -जिम्मा रहीम, हफुआ बलराम।

0
बीमारी से ज्यादा पीड़ादायक चक्कर लगाना

पिताजी के पैर में गंभीर संक्रमण है। उनके इलाज के लिए सुबह 11:30 बजे ही मेडिकल कॉलेज में पहुंच गया था। उम्मीद थी कि इलाज हो जाएगा लेकिन पर्ची से लेकर डॉक्टर तक कतार लगानी पड़ी। डॉक्टर ने परामर्श दिया है और कुछ जांच लिखी है। उसके लिए सोमवार को दोबारा आना पड़ेगा। -विवेक विश्वकर्मा, निवासी सिरसिया।
0
बिजली-पानी के लिए डीएम से मिले थे छात्र-छात्राएं

मेडिकल कॉलेज कुशीनगर के हरका के एकेडमिक ब्लॉक में रहने वाले छात्रों ने जून में बिजली-पानी की बदइंतजामी को लेकर डीएम महेंद्र सिंह तंवर से मुलाकात की थी। बैच 2024 व 2025 के मेडिकल विद्यार्थियों ने बताया था कि उन्हें चार दिन से बिजली व पानी की आपूर्ति नहीं हो रही है। आरोप लगाया था कि जनरेटर होने के बावजूद उसे चलाया नहीं जा रहा है। इससे पढ़ाई व प्रशिक्षण प्रभावित होने का भी जिक्र किया था। छात्र-छात्राओं ने प्रयोगशालाएं बंद होने, लिफ्ट न चलने, शौचालयों की खराब हालत, विभागों में शिक्षकों की कमी, केंद्रीय वातानुकूलन प्रणाली बंद होने सहित तमाम शिकायतें दर्ज कराई थीं। डीएम ने एसडीएम ऋषभ पुंडीर को जांच का आदेश दिया था। एसडीएम ने प्राचार्य से मिलकर समस्याओं से जुड़ी जानकारी ली थी।

0
मेडिकल कॉलेज की व्यवस्था बेहतर करने के लिए लगातार प्रयास किया जा रहा है। इसके लिए डाॅक्टर और नर्स समेत अन्य स्वास्थ्य कर्मियों की बैठक कर उनसे सुझाव लिए जा रहे हैं। कुछ दिन पहले ही प्राचार्य का दायित्व मिला है। बहुत जल्द मेडिकल कॉलेज की व्यवस्थाओं में बदलाव दिखेगा। -डॉ. केपी गौंड़, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज, कुशीनगर।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed