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मेडिकल कॉलेज : समय से ओपीडी में नहीं पहुंच रहे डॉक्टर, परेशान हो रहे मरीज व परिजन
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ओपीडी में डॉक्टर का इंतजार में खड़े मरीज और तीमारदार।
सुबह 8:00 बजे से निर्धारित ओपीडी का समय, बावजूद देर से बैठ रहे डॉक्टर
वार्डों में मरीजों की समुचित देखभाल का अभाव, समय से नहीं हो पा रहा मरहम पट्टी
नवजात एवं शिशु रोग, मानसिक रोग व हड्डी रोग विभाग में मरीजों की लग रही कतारें
डॉक्टरों के समय से नहीं बैठने से जांच व दवा को लेकर फजीहत
पडरौना। कुशीनगर मेडिकल कॉलेज में मरीजों को दी जा रही स्वास्थ्य सुविधाओं की व्यवस्था बेपटरी हो गई है। ओपीडी से लेकर भर्ती वार्डों तक में मरीजों को बेहतर देखभाल नहीं मिल पा रही है। दूर-दराज से इलाज कराने आने वाले मरीजों और उनके तीमारदारों को घंटों इंतजार करना पड़ रहा है। कॉलेज प्रशासन बेहतर सुविधाएं मुहैया कराने का दावा कर रहा है जबकि जमीनी हकीकत इसके विपरीत है।
मेडिकल कॉलेज में उपचार कराने के लिए हर रोज करीब 1500 से 2000 हजार मरीज आते हैं। जहां डॉक्टर ओपीडी में देखकर उचित सलाह व उपचार करते हैं लेकिन वर्तमान में ओपीडी से लेकर भर्ती वार्ड तक व्यवस्थाएं बदहाल हैं। एक तरफ ओपीडी में समय से डॉक्टरों के गैर मौजूद रह रहे तो वहीं भर्ती वार्डों में समय से मरीजों का मरहम पट्टी तक नहीं हो पा रहा है। इसके कारण मरीजों व तीमारदार दोनों को फजीहत झेलनी पड़ी है। यह तस्वीर नवजात एवं शिशु रोग विभाग, मानसिक रोग विभाग से लेकर हड्डी रोग विभाग की ओपीडी में बुधवार को पड़ताल में सामने आई।
भर्ती वार्डों में हालात ठीक नहीं
नई बिल्डिंग में बने वार्डों में भी भर्ती मरीजों को भी बेहतर उपचार नहीं मिल पा रहा है। यह भर्ती मरीज ही बता रहे हैं। बुधवार को मेडिसिन विभाग के जनरल वार्ड में भर्ती सुभासी देवी ने बताया कि समय से समय से डॉक्टर राउंड नहीं कर रहे हैं। इससे दिक्कत हो रही है। इसके अलावा सर्जरी व हड्डी वार्ड में भर्ती रंभा देवी ने बताया कि समय से मरहम पट्टी आदि भी नहीं हो रहा है।
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स्पीकअप
अपने आठ वर्षीय बेटे को सुबह 8:10 बजे ही अस्पताल लेकर पहुंचा था। शिशु एवं बाल रोग विभाग की ओपीडी में कोई डॉक्टर मौजूद नहीं था। इंतजार के बाद जब डॉक्टर पहुंचे, तो उन्होंने पर्ची पर जांच कराने के लिए सलाह दे दी। इसके चलते घंटों जांच रिपोर्ट के लिए इंतजार करना पड़ा।
-आकाश, सनेरा मलछपरा
00000
बेटी को लेकर सुबह 8:15 बजे अस्पताल पहुंचा तो हड्डी रोग विभाग में कोई डॉक्टर नहीं मिला। ओपीडी के बाहर कतार में खड़े होकर डॉक्टर के आने का इंतजार करना पड़ा। मेडिकल कॉलेज प्रशासन को ओपीडी में डॉक्टरों को निर्धारित समय से बैठने के लिए बंदोबस्त किया जाना चाहिए।
राजेश राय, धर्मपुर
00000
सर्दी, खांसी व जुकाम से पीड़ित बेटी बेटी उपचार के लिए मेडिकल कॉलेज पहुंचा तो ओपीडी में कोई डॉक्टर नहीं मिला। ओपीडी के बाहर इंतजार करने के बाद डॉक्टर आए, देर से ओपीडी में डॉक्टर के पहुंचने के चलते परेशानी हुई। समय से ओपीडी में डॉक्टरों को बैठना चाहिए।
अजय कुमार, बांसगांव,विशुनुपरा
00000
सुबह 8:25 बजे हड्डी रोग विभाग में भाई को उपचार के लिए लेकर आया था वहां ओपीडी में डॉक्टर की कुर्सी खाली थी। लंबे समय तक इंतजार के बाद डॉक्टर पहुंचे तो उपचार शुरू हो पाया। इससे अव्यवस्था से परेशानी हुई। ओपीडी में डॉक्टरों को समय से बैठना चाहिए।
शिवम, कठकुइयां
00000
8:30 बजे अपनी बेटी को लेकर उपचार के लिए अस्पताल पहुंची थी, मानसिक रोग विभाग में कोई डॉक्टर नहीं मिला। इंतजार के बाद जब डॉक्टर पहुंचे तो मरीजों का उपचार शुरू हुआ। समय से ओपीडी में डॉक्टरों के नहीं होने से परेशानी हुई है।
दुर्गावती देवी, कप्तानगंज
वर्जन
अस्पताल में भर्ती मरीजों की देखभाल करना प्राथमिकता में होता है। इसलिए ओपीडी से पहले वार्डों में भर्ती मरीजों का डॉक्टर राउंड कर देखते हैं और उनके स्वास्थ्य की स्थिति के मुताबिक छुट्टी देने व आगे के लिए उपचार के लिए सलाह देते हैं। ऐसे में ओपीडी व वार्डों में भर्ती मरीजों दोनों के बीच समन्वय स्थापित कर सुविधाएं मुहैया कराई जा रही हैं।
डॉ. दिलीप कुमार, सीएमएस, मेडिकल कॉलेज, कुशीनगर
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वार्डों में मरीजों की समुचित देखभाल का अभाव, समय से नहीं हो पा रहा मरहम पट्टी
नवजात एवं शिशु रोग, मानसिक रोग व हड्डी रोग विभाग में मरीजों की लग रही कतारें
डॉक्टरों के समय से नहीं बैठने से जांच व दवा को लेकर फजीहत
पडरौना। कुशीनगर मेडिकल कॉलेज में मरीजों को दी जा रही स्वास्थ्य सुविधाओं की व्यवस्था बेपटरी हो गई है। ओपीडी से लेकर भर्ती वार्डों तक में मरीजों को बेहतर देखभाल नहीं मिल पा रही है। दूर-दराज से इलाज कराने आने वाले मरीजों और उनके तीमारदारों को घंटों इंतजार करना पड़ रहा है। कॉलेज प्रशासन बेहतर सुविधाएं मुहैया कराने का दावा कर रहा है जबकि जमीनी हकीकत इसके विपरीत है।
मेडिकल कॉलेज में उपचार कराने के लिए हर रोज करीब 1500 से 2000 हजार मरीज आते हैं। जहां डॉक्टर ओपीडी में देखकर उचित सलाह व उपचार करते हैं लेकिन वर्तमान में ओपीडी से लेकर भर्ती वार्ड तक व्यवस्थाएं बदहाल हैं। एक तरफ ओपीडी में समय से डॉक्टरों के गैर मौजूद रह रहे तो वहीं भर्ती वार्डों में समय से मरीजों का मरहम पट्टी तक नहीं हो पा रहा है। इसके कारण मरीजों व तीमारदार दोनों को फजीहत झेलनी पड़ी है। यह तस्वीर नवजात एवं शिशु रोग विभाग, मानसिक रोग विभाग से लेकर हड्डी रोग विभाग की ओपीडी में बुधवार को पड़ताल में सामने आई।
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भर्ती वार्डों में हालात ठीक नहीं
नई बिल्डिंग में बने वार्डों में भी भर्ती मरीजों को भी बेहतर उपचार नहीं मिल पा रहा है। यह भर्ती मरीज ही बता रहे हैं। बुधवार को मेडिसिन विभाग के जनरल वार्ड में भर्ती सुभासी देवी ने बताया कि समय से समय से डॉक्टर राउंड नहीं कर रहे हैं। इससे दिक्कत हो रही है। इसके अलावा सर्जरी व हड्डी वार्ड में भर्ती रंभा देवी ने बताया कि समय से मरहम पट्टी आदि भी नहीं हो रहा है।
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अपने आठ वर्षीय बेटे को सुबह 8:10 बजे ही अस्पताल लेकर पहुंचा था। शिशु एवं बाल रोग विभाग की ओपीडी में कोई डॉक्टर मौजूद नहीं था। इंतजार के बाद जब डॉक्टर पहुंचे, तो उन्होंने पर्ची पर जांच कराने के लिए सलाह दे दी। इसके चलते घंटों जांच रिपोर्ट के लिए इंतजार करना पड़ा।
-आकाश, सनेरा मलछपरा
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बेटी को लेकर सुबह 8:15 बजे अस्पताल पहुंचा तो हड्डी रोग विभाग में कोई डॉक्टर नहीं मिला। ओपीडी के बाहर कतार में खड़े होकर डॉक्टर के आने का इंतजार करना पड़ा। मेडिकल कॉलेज प्रशासन को ओपीडी में डॉक्टरों को निर्धारित समय से बैठने के लिए बंदोबस्त किया जाना चाहिए।
राजेश राय, धर्मपुर
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सर्दी, खांसी व जुकाम से पीड़ित बेटी बेटी उपचार के लिए मेडिकल कॉलेज पहुंचा तो ओपीडी में कोई डॉक्टर नहीं मिला। ओपीडी के बाहर इंतजार करने के बाद डॉक्टर आए, देर से ओपीडी में डॉक्टर के पहुंचने के चलते परेशानी हुई। समय से ओपीडी में डॉक्टरों को बैठना चाहिए।
अजय कुमार, बांसगांव,विशुनुपरा
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सुबह 8:25 बजे हड्डी रोग विभाग में भाई को उपचार के लिए लेकर आया था वहां ओपीडी में डॉक्टर की कुर्सी खाली थी। लंबे समय तक इंतजार के बाद डॉक्टर पहुंचे तो उपचार शुरू हो पाया। इससे अव्यवस्था से परेशानी हुई। ओपीडी में डॉक्टरों को समय से बैठना चाहिए।
शिवम, कठकुइयां
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8:30 बजे अपनी बेटी को लेकर उपचार के लिए अस्पताल पहुंची थी, मानसिक रोग विभाग में कोई डॉक्टर नहीं मिला। इंतजार के बाद जब डॉक्टर पहुंचे तो मरीजों का उपचार शुरू हुआ। समय से ओपीडी में डॉक्टरों के नहीं होने से परेशानी हुई है।
दुर्गावती देवी, कप्तानगंज
वर्जन
अस्पताल में भर्ती मरीजों की देखभाल करना प्राथमिकता में होता है। इसलिए ओपीडी से पहले वार्डों में भर्ती मरीजों का डॉक्टर राउंड कर देखते हैं और उनके स्वास्थ्य की स्थिति के मुताबिक छुट्टी देने व आगे के लिए उपचार के लिए सलाह देते हैं। ऐसे में ओपीडी व वार्डों में भर्ती मरीजों दोनों के बीच समन्वय स्थापित कर सुविधाएं मुहैया कराई जा रही हैं।
डॉ. दिलीप कुमार, सीएमएस, मेडिकल कॉलेज, कुशीनगर