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आयुष्मान योजना : 28 अस्पतालों के 12 करोड़ से अधिक फंसे

Sat, 10 Jun 2023 11:27 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर Updated Sat, 10 Jun 2023 11:27 PM IST
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problem of ayusman plan payment
फोटो है।
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- जिले में अब तक 34,974 मरीजों का अब तक हुआ है आयुष्मान भारत योजना से इलाज
- इन मरीजों के इलाज में दिए जाने थे कुल 59 करोड़ रुपये
- 30,085 मरीजों के इलाज के खर्च का अस्पतालों को 47 करोड़ रुपये किया जा चुका है भुगतान
- 23 सितंबर 2018 को देश भर में लागू हुई थी यह योजना
संवाद न्यूज एजेंसी
कुशीनगर। प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना या आयुष्मान भारत योजना में चयनित जिले के लाभार्थियों में से इलाज कराने वाले 4,889 मरीजों का करीब 12 करोड़ रुपये भुगतान अब तक संबंधित अस्पतालों को नहीं हो पाया है। जिले में कुल 40 अस्पताल इस योजना के तहत चयनित हैं, जहां जिले के मरीजों का इलाज होता है, उनमें से 28 निजी अस्पताल हैं। अस्पताल संचालकों की रकम तो फंसी है, लेकिन खुलकर न तो वे सामने आ रहे हैं और न ही मरीज ही यह बताने को तैयार हैं कि भुगतान न मिलने की दशा में डॉक्टर नकद भुगतान के लिए जोर दे रहे हैं। इस बारे में भर्ती मरीजों से बात की गई तो उनका कहना था कि इलाज अथवा ऑपरेशन में रुपये नहीं देने पड़े, गोल्डन कार्ड पर ही इलाज हो गया है।
जानकारी के मुताबिक, कुशीनगर जिले में जिला अस्पताल और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को मिलाकर 12 सरकारी और 28 निजी अस्पताल आयुष्मान योजना से जुड़े हैं। इन अस्पतालों में आयुष्मान योजना के लाभार्थियों का निशुल्क इलाज होता है। हर दिन इन अस्पतालों में 200 से अधिक मरीज इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। इनमें जनरल सर्जरी से लेकर बड़ी सर्जरी तक के मरीज शामिल हैं।सर्जरी की बात करें तो करीब 50 से अधिक सर्जरी भी हो रही है। अलग-अलग सर्जरी के अलग-अलग रेट भी आयुष्मान योजना में तय है।
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अस्पताल संचालक इन मरीजों का ऑपरेशन तो कर दे रहे हैं, लेकिन सर्जरी के नाम पर रुपये लेने में अस्पताल संचालकों का पसीना छूट जा रहा है। नाम न छापने की शर्त पर एक संचालक ने बताया कि ऑपरेशन के बाद रुपये लेना थोड़ा कठिन है। एक भी कागजात अगर वेरीफाई के दौरान छूट जा रहा है, तो फिर से नए सिरे से कागजात जमा करने के प्रोसेस शुरू हो जाते हैं। जबकि, नियम के तहत 21 दिन बाद भुगतान हो जाना चाहिए। लेकिन, 50 फीसदी मामलों में ऐसा नहीं है। एक-एक केस में तीन से चार माह बाद भुगतान हो रहा है। यही वजह है कि योजना शुरू होने से लेकर अब तक 4,889 मरीजों के इलाज का करीब 12 करोड़ रुपये अस्पतालों को भुगतान नहीं हो पाया है।
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क्लेम करने 21 दिन बाद है भुगतान का नियम
आयुष्मान योजना के तहत अगर किसी मरीज का निजी अस्पताल में इलाज होता है, तो वह 21 दिन के अंदर क्लेम कर सकता है। क्लेम करने के 21 दिन बाद ही उसका भुगतान करने का नियम है। अगर 21 दिनों के अंदर कोई क्लेम नहीं करता है तो उसे भुगतान नहीं किया जाएगा।

आंकड़े एक नजर में
जनपद में कुल लाभार्थियों की संख्या-14,35,537
लाभार्थी परिवारों की संख्या-3,35,036
जनपद में कुल गांवों की संख्या-1,549
पिछले माह बनाए गए गोल्डन कार्ड की संख्या-2,476
बनाए गए गोल्डन कार्ड की कुल संख्या- 5,57,677
लाभार्थियों का प्रतिशत, जिनके गोल्डन कार्ड बन गए-38.85 प्रतिशत
ऐसे लाभार्थी परिवारों की संख्या, जिनमें कम से कम एक गोल्डन कार्ड बन गया है-2,30,666
योजना शुरू होने के बाद से अब तक 34,974 मरीजों का लगभग 59 करोड़ रुपये का इलाज हुआ है।
इसमें से 30,065 मरीजों के इलाज का 47 करोड़ रुपये अस्पताल संचालकों को भुगतान हो चुका है। शेष रकम बाकी है।

केस-एक
सत्रह लाख रुपये भुगतान पाना बाकी
पडरौना शहर के एक चिकित्सक ने नाम प्रकाशित न किए जाने की शर्त पर बताया कि उनका अस्पताल भी आयुष्मान भारत योजना में चयनित था। 17 लाख रुपये तक का इलाज किया गया, लेकिन एक मामले में अस्पताल में विवाद हो जाने के बाद योजना हटा ली गई, लेकिन भुगतान अभी नहीं मिल सका है।

केस-दो
पडरौना शहर के ही एक अन्य चिकित्सक का खुद का निजी अस्पताल है। वहां सर्जरी भी होती है। उन्होंने बताया कि योजना शुरू होने से लेकर अब तक 400 से अधिक मरीजों के इलाज का बिल वाउचर भेजा गया था, लेकिन उसे निरस्त कर दिया गया। करीब 35 लाख रुपये भुगतान बाकी था। यह कोरोना काल के समय का था। डीएम की अध्यक्षता में हुई बैठक में इस तरफ ध्यान आकृष्ट कराया गया। उनकी पहल पर कुछ बिल बाउचर जो मानक के अनुरूप थे, उनका भुगतान हुआ है।

केस-तीन
कसया के एक निजी अस्पताल के संचालक ने बताया कि उनके यहां भी यह योजना संचालित होती है। वर्ष 2021 से अब तक ढाई सौ मरीजों का इलाज किया जा चुका है, जिनमें सात मरीजों के इलाज का भुगतान बाकी है।

केस-4
कसया के एक अन्य निजी अस्पताल में भी ऑपरेशन अधिक होता है। यह अस्पताल भी योजना में चयनित है। इस योजना के तहत 500 मरीजों का इलाज किया गया है, लेकिन पांच का भुगतान बाकी है।

यह होती है भुगतान की प्रक्रिया
कुछ अस्पताल संचालकों ने बताया कि स्टेट हेल्थ एजेंसी (एसएचए) ही इस योजना की निगरानी करती है। उसी की तरफ से भुगतान किया जाता है। इलाज या ऑपरेशन के बाद मरीज की कई एंगिल से फोटो लिया जाता है। इसके अलावा शरीर के जिस हिस्से का ऑपरेशन हुआ होता है, उसका भी कई एंगिल से फोटो भेजा जाता है। इससे जुड़े सभी साक्ष्य प्रस्तुत किए जाते हैं। इस योजना में इलाज और भुगतान की कई प्रक्रियाएं हैं, जिन्हें पूरा करने के बाद ही भुगतान होता है, अन्यथा बिल रद्द होता है और भुगतान रुक जाता है।

कोट
आयुष्मान भारत योजना के तहत इलाज के मद में खर्च हुई धनराशि का क्लेम अस्पताल संचालकों को ही करना है। स्टेट हेल्थ एजेंसी इसकी निगरानी और भुगतान करती है। वहां कोई अड़चन आती है तब हमारे पर शिकायतें आती हैं। हमारे जिले में भुगतान की स्थिति ठीक है। गोल्डन कार्डों में नाम-पतों में त्रुटियां हैं, इस वजह से उसका लक्ष्य पूरा करने में विलंब हो रहा है।
-डॉ. सुरेश पटारिया, सीएमओ
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