{"_id":"649c7c7adc0739dae80cbe39","slug":"problem-dams-kushinagar-news-c-205-1-sgkp1014-670-2023-06-29","type":"story","status":"publish","title_hn":"Kushinagar News: झाड़ियों में छिपी चूहों की मांद, बचाव कार्य कागज में, कमजोर हुए बांध","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Kushinagar News: झाड़ियों में छिपी चूहों की मांद, बचाव कार्य कागज में, कमजोर हुए बांध
Thu, 29 Jun 2023 12:01 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Thu, 29 Jun 2023 12:01 AM IST
विज्ञापन
खड्डा और तमकुहीराज तहसील क्षेेत्र में प्रभावित होते हैं सबसे अधिक गांव, लोगों को सता रहा बाढ़ का डर
झाड़ियों की सफाई न होने से बरसात में बंधे में रिसाव का नहीं चल पाएगा पता
संवाद न्यूज एजेंसी
पडरौना/खड्डा। बरसात का मौसम शुरू हो जाने के बाद भी एहतियात के तौर पर गंडक नदी की प्रलयकारी बाढ़ से बचाव के लिए बने छितौनी तटबंध में रेनकट से बने गड्ढे तथा रैट होल नहीं भरे जा सके हैं। झाड़ियों की सफाई न होने से बांध के नीचे से होने वाले रिसाव नहीं दिख पाएंगे। इसी तरह नौतार तटबंध में बनाई जा रही साइफनयुक्त पुलिया का निर्माण अधूरा है। तेज बारिश व बाढ़ से बंधे को नुकसान पहुंचने की आशंका से ग्रामीण भयभीत हैं।
15 जून से बरसात का मौसम शुरू हो जाता है। गंडक नदी के अचानक उग्र रूप धारण करने का इतिहास रहा है। 14.400 किलोमीटर लंबे छितौनी तटबंध में जगह-जगह रेन कट से गड्ढे बन गए हैं। तटबंध पर उगी झाड़ियों से रैट होल (चूहों के बनाए गए सुराख) दिखाई नहीं दे रहे हैं। इन्हें बंद करने या सुरक्षा इंतजाम होता नहीं दिख रहा है।
तटबंध की दायीं तरफ बांध की मजबूती के लिए प्लेटफाॅर्म बनाया गया था। इसके पीछे यह सोच थी कि बाढ़ के समय पानी का रिसाव हो तो उसे तुरंत बंद किया जा सके, लेकिन इस स्थान पर जोतकर खेती की जा रही है।
विज्ञापन
महराजगंज जनपद के कलनही तटबंध से जुड़ने वाला छितौनी तटबंध मदनपुर सुकरौली, सिसई दधीचि, भेड़ीहारी, सिसवा गोपाल, सारंग छपरा, सोहरौना, खड्डा कस्बा, गोरखपुर-नरकटियागंज रेल लाइन, भैसहां, पकड़ी बृजलाल, कोटवा टोला, हनुमानगंज, गंगवा छापर, तेलिया टोला, पड़रहवा, तुर्कहां, शाहपुर, नौका टोला, रंजीता, लक्ष्मीपुर, माघी, भगवानपुर, नौतार आदि गांवों की सुरक्षा करता है।
ग्रामीण रामानंद गिरी, दिलीप मोदनवाल, मुन्ना यादव, भोला गुप्ता, हरिशंकर सिंह, आनंद सिंह, मारकंडेय मिश्रा, संतोष राय, गोलू गुप्ता, सुदामा जायसवाल, अंगद जायसवाल, केदार ,नंदलाल आदि बताते हैं कि जितने रुपये बंधों की मरम्मत में खर्च हो चुके हैं, अगर ईमानदारी से एवं दूरगामी सोच से कार्य हुआ होता तो उतने रुपये में कंक्रीट या लोहे की दीवार बन गई होती। हर वर्ष रुपये खर्च हो रहे हैं, लेकिन तटबंध टूटने का खतरा भयभीत करता रहता है।
लगभग दस वर्ष पहले टूट गया था तटबंध
लगभग दस वर्ष पहले गंडक नदी की एक धारा मदनपुर गांव के पास छितौनी तटबंध को दो बार तोड़कर मुख्य पश्चिमी गंडक नहर की बायीं पटरी ध्वस्त कर नहर में समा गई थी। इसके बाद खड्डा कस्बा, रेलवे लाइन, चीनी मिल सहित 50 से ज्यादा गांव खतरे में आ गए थे। गनीमत रही कि नहर की दायीं पटरी को सुरक्षित कर के नुकसान होने से रोक लिया गया। साथ ही नदी का जलस्तर कम होने से राहत मिल गई थी।
नौतार तटबंध में साइफनयुक्त पुलिया का निर्माण अधूरा होने से लोग चिंतित
छितौनी तटबंध से सटे भगवानपुर गांव से निकलकर बोधीछपरा के पास रेलवे लाइन को जोड़ने वाले लगभग पौने तीन किलोमीटर लंबे नौतार तटबंध में पूर्व में बने नौतार ड्रेन का पानी निकलने का रास्ता ध्वस्त होने से गांवों व लोगों की फसलों में बरसात का पानी घुस जाता था। वर्ष 2021 में नाराज लोगों ने तटबंध को काट दिया था। इस पर फाटकयुक्त पुलिया बनाने का निर्णय लिया गया। कुछ माह पूर्व कार्य शुरू हो गया, लेकिन डिवाटरिंग सहित अन्य गड़बड़ी के चलते अभी मात्र नीचे का कुछ हिस्सा ही बन पाया है। ऐसे में अचानक बारिश आने तथा नदी में जलस्तर बढ़ जाने से कार्य रोकना पड़ेगा और बरसात बाद ही शुरू हो पाएगा।
उल्लेखनीय है कि बरसात के समय नौतार ड्रेन का पानी बांध को पार कर पनियहवा पुल के पास नदी में गिरता है। आशंका यह है कि अगर नदी का जलस्तर ज्यादा बढा़ तो इसका पानी वापस इस ड्रेन के रास्ते प्रवेश कर खड्डा कस्बा सहित बड़े हिस्से को प्रभावित कर देगा।
महदेवा से तीन किलोमीटर दूर बहती थी गंडक नदी
परक्यूपाइन लगाकर महदेवा व सालिकपुर गांव को गंडक के कटान से बचाने का प्रयोग सफल होता नहीं दिख रहा है। पांच वर्ष पहले महदेवा गांव से लगभग तीन किलोमीटर दूर गंडक नदी बहती थी। अचानक नदी ने रुख बदला और कटान करते करते गांव के करीब पहुंच गई। जब गांव पर संकट आया तो बाढ़ खंड को बचाव के निर्देश मिले। तीन वर्ष से हर वर्ष प्रयास चल रहा है, लेकिन नदी के रुख में कोई खास परिवर्तन नहीं आया है। दो वर्ष से लगभग तीन करोड़ से ज्यादा रुपये खर्च कर परक्यूपाइन लगाकर कटान रोकने का प्रयास बाढ़ खंड कर रहा है। फिर भी गांव पर खतरा बरकरार है। ग्रामीणों की तरफ से की गई बंधा बनाकर गांव सुरक्षित करने की मांग को अनसुना किया जा रहा है। हर साल बाढ़ आने पर पानी गांव में घुसता है। लोग विस्थापित होकर एनएच 727 पर सालिकपुर पुलिस चौकी पर शरण लेते हैं। ग्राम प्रधान प्रतिनिधि नथुनी कुशवाहा, रमायन, भीमबली, जितेंद्र आदि बताते हैं कि जब बाढ़ आती है तो प्रशासन व नेता बंधे बनाने व गांव को सुरक्षित करने का दावा करते हैं। जैसे ही बाढ खत्म होती है भूल जाते हैं। परक्यूपाइन लगाकर गांव बचाने का प्रयास सफल नहीं होने वाला है।
वर्जन
आवश्यकता के अनुसार व उपलब्ध धन के सापेक्ष तटबंध की मजबूती का कार्य किया जाता है। तटबंध पूरी तरह सुरक्षित है। रेनकट व झाड़ियां समय-समय पर भरी जाती हैं।
-मनोरंजन चौधरी, एसडीओ, बाढ़ खंड
विज्ञापन
झाड़ियों की सफाई न होने से बरसात में बंधे में रिसाव का नहीं चल पाएगा पता
संवाद न्यूज एजेंसी
पडरौना/खड्डा। बरसात का मौसम शुरू हो जाने के बाद भी एहतियात के तौर पर गंडक नदी की प्रलयकारी बाढ़ से बचाव के लिए बने छितौनी तटबंध में रेनकट से बने गड्ढे तथा रैट होल नहीं भरे जा सके हैं। झाड़ियों की सफाई न होने से बांध के नीचे से होने वाले रिसाव नहीं दिख पाएंगे। इसी तरह नौतार तटबंध में बनाई जा रही साइफनयुक्त पुलिया का निर्माण अधूरा है। तेज बारिश व बाढ़ से बंधे को नुकसान पहुंचने की आशंका से ग्रामीण भयभीत हैं।
15 जून से बरसात का मौसम शुरू हो जाता है। गंडक नदी के अचानक उग्र रूप धारण करने का इतिहास रहा है। 14.400 किलोमीटर लंबे छितौनी तटबंध में जगह-जगह रेन कट से गड्ढे बन गए हैं। तटबंध पर उगी झाड़ियों से रैट होल (चूहों के बनाए गए सुराख) दिखाई नहीं दे रहे हैं। इन्हें बंद करने या सुरक्षा इंतजाम होता नहीं दिख रहा है।
विज्ञापन
तटबंध की दायीं तरफ बांध की मजबूती के लिए प्लेटफाॅर्म बनाया गया था। इसके पीछे यह सोच थी कि बाढ़ के समय पानी का रिसाव हो तो उसे तुरंत बंद किया जा सके, लेकिन इस स्थान पर जोतकर खेती की जा रही है।
विज्ञापन
महराजगंज जनपद के कलनही तटबंध से जुड़ने वाला छितौनी तटबंध मदनपुर सुकरौली, सिसई दधीचि, भेड़ीहारी, सिसवा गोपाल, सारंग छपरा, सोहरौना, खड्डा कस्बा, गोरखपुर-नरकटियागंज रेल लाइन, भैसहां, पकड़ी बृजलाल, कोटवा टोला, हनुमानगंज, गंगवा छापर, तेलिया टोला, पड़रहवा, तुर्कहां, शाहपुर, नौका टोला, रंजीता, लक्ष्मीपुर, माघी, भगवानपुर, नौतार आदि गांवों की सुरक्षा करता है।
ग्रामीण रामानंद गिरी, दिलीप मोदनवाल, मुन्ना यादव, भोला गुप्ता, हरिशंकर सिंह, आनंद सिंह, मारकंडेय मिश्रा, संतोष राय, गोलू गुप्ता, सुदामा जायसवाल, अंगद जायसवाल, केदार ,नंदलाल आदि बताते हैं कि जितने रुपये बंधों की मरम्मत में खर्च हो चुके हैं, अगर ईमानदारी से एवं दूरगामी सोच से कार्य हुआ होता तो उतने रुपये में कंक्रीट या लोहे की दीवार बन गई होती। हर वर्ष रुपये खर्च हो रहे हैं, लेकिन तटबंध टूटने का खतरा भयभीत करता रहता है।
लगभग दस वर्ष पहले टूट गया था तटबंध
लगभग दस वर्ष पहले गंडक नदी की एक धारा मदनपुर गांव के पास छितौनी तटबंध को दो बार तोड़कर मुख्य पश्चिमी गंडक नहर की बायीं पटरी ध्वस्त कर नहर में समा गई थी। इसके बाद खड्डा कस्बा, रेलवे लाइन, चीनी मिल सहित 50 से ज्यादा गांव खतरे में आ गए थे। गनीमत रही कि नहर की दायीं पटरी को सुरक्षित कर के नुकसान होने से रोक लिया गया। साथ ही नदी का जलस्तर कम होने से राहत मिल गई थी।
नौतार तटबंध में साइफनयुक्त पुलिया का निर्माण अधूरा होने से लोग चिंतित
छितौनी तटबंध से सटे भगवानपुर गांव से निकलकर बोधीछपरा के पास रेलवे लाइन को जोड़ने वाले लगभग पौने तीन किलोमीटर लंबे नौतार तटबंध में पूर्व में बने नौतार ड्रेन का पानी निकलने का रास्ता ध्वस्त होने से गांवों व लोगों की फसलों में बरसात का पानी घुस जाता था। वर्ष 2021 में नाराज लोगों ने तटबंध को काट दिया था। इस पर फाटकयुक्त पुलिया बनाने का निर्णय लिया गया। कुछ माह पूर्व कार्य शुरू हो गया, लेकिन डिवाटरिंग सहित अन्य गड़बड़ी के चलते अभी मात्र नीचे का कुछ हिस्सा ही बन पाया है। ऐसे में अचानक बारिश आने तथा नदी में जलस्तर बढ़ जाने से कार्य रोकना पड़ेगा और बरसात बाद ही शुरू हो पाएगा।
उल्लेखनीय है कि बरसात के समय नौतार ड्रेन का पानी बांध को पार कर पनियहवा पुल के पास नदी में गिरता है। आशंका यह है कि अगर नदी का जलस्तर ज्यादा बढा़ तो इसका पानी वापस इस ड्रेन के रास्ते प्रवेश कर खड्डा कस्बा सहित बड़े हिस्से को प्रभावित कर देगा।
महदेवा से तीन किलोमीटर दूर बहती थी गंडक नदी
परक्यूपाइन लगाकर महदेवा व सालिकपुर गांव को गंडक के कटान से बचाने का प्रयोग सफल होता नहीं दिख रहा है। पांच वर्ष पहले महदेवा गांव से लगभग तीन किलोमीटर दूर गंडक नदी बहती थी। अचानक नदी ने रुख बदला और कटान करते करते गांव के करीब पहुंच गई। जब गांव पर संकट आया तो बाढ़ खंड को बचाव के निर्देश मिले। तीन वर्ष से हर वर्ष प्रयास चल रहा है, लेकिन नदी के रुख में कोई खास परिवर्तन नहीं आया है। दो वर्ष से लगभग तीन करोड़ से ज्यादा रुपये खर्च कर परक्यूपाइन लगाकर कटान रोकने का प्रयास बाढ़ खंड कर रहा है। फिर भी गांव पर खतरा बरकरार है। ग्रामीणों की तरफ से की गई बंधा बनाकर गांव सुरक्षित करने की मांग को अनसुना किया जा रहा है। हर साल बाढ़ आने पर पानी गांव में घुसता है। लोग विस्थापित होकर एनएच 727 पर सालिकपुर पुलिस चौकी पर शरण लेते हैं। ग्राम प्रधान प्रतिनिधि नथुनी कुशवाहा, रमायन, भीमबली, जितेंद्र आदि बताते हैं कि जब बाढ़ आती है तो प्रशासन व नेता बंधे बनाने व गांव को सुरक्षित करने का दावा करते हैं। जैसे ही बाढ खत्म होती है भूल जाते हैं। परक्यूपाइन लगाकर गांव बचाने का प्रयास सफल नहीं होने वाला है।
वर्जन
आवश्यकता के अनुसार व उपलब्ध धन के सापेक्ष तटबंध की मजबूती का कार्य किया जाता है। तटबंध पूरी तरह सुरक्षित है। रेनकट व झाड़ियां समय-समय पर भरी जाती हैं।
-मनोरंजन चौधरी, एसडीओ, बाढ़ खंड