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यूपी चुनाव 2022: प्रियंका गांधी बोलीं- धार्मिक उन्माद और सांप्रदायिकता का जहर घोलकर सत्ता में रहना चाहती योगी सरकार, आम लोगों की कोई चिंता नहीं
Mon, 28 Feb 2022 08:47 PM IST
सुशील कुमार
संवाद न्यूज एजेंसी, तमकुहीरोड (कुशीनगर)
संवाद न्यूज एजेंसी, तमकुहीरोड (कुशीनगर)
Published by: सुशील कुमार
Updated Mon, 28 Feb 2022 08:47 PM IST
सार
प्रियंका गांधी ने भाजपा पर हमला करते हुए कहा कि मोदी-योगी सरकार में जनता की बात नहीं सुनी जा रही है। सरकार के विरोध में उठने वाली आवाज का गला घोंटा जा रहा है। उन्हें फर्जी मुकदमों में फंसाकर जेल में डाल दिया जाता है।
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प्रियंका गांधी।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विस्तार
कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव एवं यूपी प्रभारी प्रियंका गांधी वाड्रा ने सोमवार को कहा कि प्रदेश सरकार समाज में धार्मिक उन्माद और सांप्रदायिकता का जहर घोलकर सत्ता में बने रहना चाहती है। उसे प्रदेश के किसानों, बेरोजगारों और महंगाई से परेशान आम लोगों की कोई चिंता नहीं है। चीनी मिलों पर किसानों का 14 हजार करोड़ बकाया है, लेकिन उसका भुगतान करने के बजाय सरकार पूंजीपतियों के हाथ की कठपुतली बनी हुई है। वह संवैधानिक मूल्यों को कुचलना चाहती है। ऐसी सरकार को सत्ता से हटाए बिना यूपी को आत्मनिर्भर बनाना मुश्किल होगा।
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वह लोकनायक इंटर कॉलेज गौरीनगर के मैदान में तमकुहीराज के कांग्रेस प्रत्याशी एवं प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू के लिए जनसभा को संबोधित कर रही थीं। उन्होंने भाजपा पर हमला करते हुए कहा कि मोदी-योगी सरकार में जनता की बात नहीं सुनी जा रही है। सरकार के विरोध में उठने वाली आवाज का गला घोंटा जा रहा है। उन्हें फर्जी मुकदमों में फंसाकर जेल में डाल दिया जाता है। यही नहीं 70 वर्षों में जिस रेल, हवाई अड्डे और अन्य पब्लिक सेक्टर की यूनिटों को अपने पूंजीपति मित्रों के हाथों कौड़ियों के भाव बेचा जा रहा है, उससे रोजगार के अवसर प्रभावित होंगे तथा बेरोजगारी और बढ़ेगी।
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उन्होंने कहा कि देश के किसानों का चीनी मिलों पर 14 हजार करोड़ गन्ना मूल्य बाकी है, लेकिन उनके कर्ज माफी के लिए सरकार के पास धन नहीं है, पर वह पूंजीपति मित्रों का कर्ज माफ कर सकती है। स्थिति यह हो गई है कि उनके पूंजीपति मित्र एक दिन में एक हजार करोड़ कमाते हैं। वहीं प्रति किसान की एक दिन की आमदनी मात्र 27 रुपये है। यही नहीं प्रधानमंत्री के घूमने-फिरने के लिए दो विमान जरूर खरीद लिए गए हैं।
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उन्होंने किसानों, छुट्टा जानवरों, महंगाई, बेरोजगारी, छोटे व्यापारियों सहित आम मुद्दे को उठाते हुए कहा कि सरकार इनकी समस्याओं का समाधान नहीं करना चाहती है, बल्कि मुफ्त राशन व नमक की याद दिलाकर वोट बटोरना चाहती है। उन्हें लगता है कि ऐसा करके वह आम लोगों पर एहसान कर रही है और चुनावी सभाओं में नमक खिलाने की बात जोर शोर से उछाली जा रही है। उन्होंने चुनौती भरे अंदाज में कहा कि सरकार को गरीबों की इतनी ही फिक्र है तो उसे घोषणा करनी चाहिए कि मार्च के बाद भी यह योजना पूर्व की तरह चालू रखी जाएगी।