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अगले तीन वर्षों में गिने-चुने ही रह जाएंगे राजस्व निरीक्षक
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अगले तीन वर्षों में गिने-चुने ही रह जाएंगे राजस्व निरीक्षक
राजस्व निरीक्षक के 34, लेखपाल के 108 पद खाली
वरासत से लगायत फसलों की पड़ताल, जमीन की पैमाइश सहित अनेक कार्य हैं इनके जिम्मे
संवाद न्यूज एजेंसी
पडरौना। राजस्व विभाग की महत्वपूर्ण कड़ियों में शामिल लेखपाल और राजस्व निरीक्षक के पद एक-एक कर रिक्त होते जा रहे हैं। सृजित पद के सापेक्ष लेखपालों की संख्या 108 तो राजस्व निरीक्षक की 34 कम है। एक-एक लेखपाल और राजस्व निरीक्षक के जिम्मे एक से अधिक गांवों की जिम्मेदारी है। ऐसे में वरासत से लगायत जमीन की पैमाइश, फसलों की पड़ताल, पट्टा आवंटन, जाति, आय और निवास प्रमाण पत्रों सहित अनेक आवेदनों पर रिपोर्ट लगवाने के लिए लोगों को भटकना पड़ रहा है।
जमीन संबंधी सभी प्रकार के अभिलेखों के रख-रखाव और उनके प्रबंधन की जिम्मेदारी राजस्व विभाग की होती है। जिले के 1657 राजस्व गांवों में विभागीय कार्यों को सही ढंग से क्रियान्वित करने के लिए राजस्व निरीक्षक के 63 पद सृजित हैं। इस विभाग से जुड़े लोगों की मानें तो 14 साल के इंतजार के बाद कुछ वर्ष पहले वरिष्ठ लेखपालों की पदोन्नति कर राजस्व निरीक्षक बनाया गया था। उनमें कई राजस्व निरीक्षक तो दो वर्षों से नायब तहसीलदार के पद पर पदोन्नति पाने के इंतजार में सेवानिवृत्त हो गए। अब जो 29 राजस्व निरीक्षक बचे हैं, उनमें भी ज्यादातर आगामी तीन वर्षों में सेवानिवृत्त हो जाएंगे। क्योंकि दो वर्षों से इस पदोन्नति की प्रक्रिया रुकी हुई है। इसी तरह लेखपालों के लिए सृजित 427 पदों के सापेक्ष 319 ही कार्यरत हैं। यह संख्या भी वर्ष 2016 में नियुक्ति के बाद बढ़ी थी। उस समय जिले को 189 नए लेखपाल मिले थे। हालांकि, कुछ महीनों बाद अन्य विभागों में नौकरी लग जाने पर करीब 20 लेखपाल इस्तीफा देकर चले गए थे। राजस्व निरीक्षक और लेखपालों की संख्या कम होने के कारण उपलब्ध लोगों को अतिरिक्त गांवों की जिम्मेदारी सौंपी गई है। (संवाद)
लेखपालों के जिम्मे होते हैं ये कार्य
राजस्व विभाग के मुताबिक लेखपालों के जिम्मे सरकार की योजनाओं के क्रियान्वयन में सहयोग, फसलों की पड़ताल, जमीन की पैमाइश, अतिक्रमण हटवाना, पट्टा आवंटन, आय, जाति और निवास प्रमाण पत्रों के आवेदनों पर सर्वे कर रिपोर्ट लगाना, कृषि गणना, पशु गणना, निर्वाचन संबंधी कार्य, जनगणना, अभिलेखों को तैयार करना, खसरा-खतौनी आवंटन, कृषि भूमि आवंटन, कुम्हारी कला, जमीन आवंटन, मत्स्य पालन के लिए पट्टा, ग्राम सभा की भूमि की देखभाल, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि और वरासत आदि के कार्य होते हैं। इनके अन्य क्षेत्र में होने अथवा व्यस्तता के चलते इनसे मुलाकात होना लोगों के लिए अक्सर ही मुश्किल रहता है।
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राजस्व निरीक्षक व लेखपाल के सृजित पदों के सापेक्ष तहसीलवार संख्या
तहसील राजस्व निरीक्षक के सृजित पद तैनात लेखपाल के सृजित पद तैनात
पडरौना 12 05 88 69
हाटा 09 04 58 47
कसया 10 04 72 52
तमकुहीराज 14 04 95 77
कप्तानगंज 09 06 61 41
खड्डा 08 05 53 33
योग 63 29 427 319
बोले पदाधिकारी-
राजस्व निरीक्षक संघ के जिला मंत्री दिनेश लाल श्रीवास्तव का कहना है कि वरिष्ठ लेखपाल पदोन्नति के बाद राजस्व निरीक्षक के पद पर नियुक्त होते हैं। राजस्व निरीक्षकों की संख्या सेवानिवृत्ति के चलते घटती जा रही है, जो बचे हैं उनमें भी अधिकतर लोग आगामी तीन वर्षों में सेवानिवृत्त हो जाएंगे। संख्या कम होने से जनता और विभागीय कार्य प्रभावित होता है।
उत्तर प्रदेश लेखपाल संघ कुशीनगर के अध्यक्ष निलेश रंजन राव ने बताया कि लेखपाल और राजस्व निरीक्षक यदि सृजित पदों के सापेक्ष तैनात रहते तो कार्य समय से होते। लेखपालों की संख्या कम होनेे के कारण शेष लोगों को अतिरिक्त जिम्मेदारी संभालनी पड़ती है। ऐसे में कार्य प्रभावित होता है।
केस-एक
सदर तहसील क्षेत्र के कंठीछपरा गांव के जगदीश बताते हैं कि उनके एक खेत का रकबा पुराने अभिलेख में 1.98 एकड़ है। मौके पर इतना खेत भी उपलब्ध है, लेकिन तहसील से निकलने वाली कंप्यूटराइज्ड खतौनी में यह घटकर 1.52 एकड़ हो गया है। खतौनी दुरुस्त कराने के लिए पिछले कई वर्षों से हलका लेखपाल से लेकर तहसील तक भटक रहे हैं, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हो रहा है।
केस-दो
पडरौना शहर के बेलवा चुंगी निवासी वकील अहमद बताते हैं कि वरासत कराने के लिए छह साल से संबंधित लेखपाल से लगायत तहसील तक भटक रहे हैं। कभी लेखपाल व्यस्त मिलते हैं तो कभी उनसे मुलाकात नहीं हो पाती। इस वजह से इतने दिन बीत गए हैं। इसी उद्देश्य से सोमवार को तहसील में आए थे।
कोट
राजस्व विभाग में पदोन्नति राजस्व परिषद की तरफ से होनी है। शासन स्तर पर इस बारे में प्रक्रिया चल रही है। जनता को राजस्व विभाग से संबंधित किसी प्रकार की परेशानी न हो, इसके लिए संबंधित अधिकारियों-कर्मचारियों को निर्देश दिए गए हैं। उम्मीद है कि यह समस्या शीघ्र दूर होगी।
-भूपेंद्र एस चौधरी, डीएम
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राजस्व निरीक्षक के 34, लेखपाल के 108 पद खाली
वरासत से लगायत फसलों की पड़ताल, जमीन की पैमाइश सहित अनेक कार्य हैं इनके जिम्मे
संवाद न्यूज एजेंसी
पडरौना। राजस्व विभाग की महत्वपूर्ण कड़ियों में शामिल लेखपाल और राजस्व निरीक्षक के पद एक-एक कर रिक्त होते जा रहे हैं। सृजित पद के सापेक्ष लेखपालों की संख्या 108 तो राजस्व निरीक्षक की 34 कम है। एक-एक लेखपाल और राजस्व निरीक्षक के जिम्मे एक से अधिक गांवों की जिम्मेदारी है। ऐसे में वरासत से लगायत जमीन की पैमाइश, फसलों की पड़ताल, पट्टा आवंटन, जाति, आय और निवास प्रमाण पत्रों सहित अनेक आवेदनों पर रिपोर्ट लगवाने के लिए लोगों को भटकना पड़ रहा है।
जमीन संबंधी सभी प्रकार के अभिलेखों के रख-रखाव और उनके प्रबंधन की जिम्मेदारी राजस्व विभाग की होती है। जिले के 1657 राजस्व गांवों में विभागीय कार्यों को सही ढंग से क्रियान्वित करने के लिए राजस्व निरीक्षक के 63 पद सृजित हैं। इस विभाग से जुड़े लोगों की मानें तो 14 साल के इंतजार के बाद कुछ वर्ष पहले वरिष्ठ लेखपालों की पदोन्नति कर राजस्व निरीक्षक बनाया गया था। उनमें कई राजस्व निरीक्षक तो दो वर्षों से नायब तहसीलदार के पद पर पदोन्नति पाने के इंतजार में सेवानिवृत्त हो गए। अब जो 29 राजस्व निरीक्षक बचे हैं, उनमें भी ज्यादातर आगामी तीन वर्षों में सेवानिवृत्त हो जाएंगे। क्योंकि दो वर्षों से इस पदोन्नति की प्रक्रिया रुकी हुई है। इसी तरह लेखपालों के लिए सृजित 427 पदों के सापेक्ष 319 ही कार्यरत हैं। यह संख्या भी वर्ष 2016 में नियुक्ति के बाद बढ़ी थी। उस समय जिले को 189 नए लेखपाल मिले थे। हालांकि, कुछ महीनों बाद अन्य विभागों में नौकरी लग जाने पर करीब 20 लेखपाल इस्तीफा देकर चले गए थे। राजस्व निरीक्षक और लेखपालों की संख्या कम होने के कारण उपलब्ध लोगों को अतिरिक्त गांवों की जिम्मेदारी सौंपी गई है। (संवाद)
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लेखपालों के जिम्मे होते हैं ये कार्य
राजस्व विभाग के मुताबिक लेखपालों के जिम्मे सरकार की योजनाओं के क्रियान्वयन में सहयोग, फसलों की पड़ताल, जमीन की पैमाइश, अतिक्रमण हटवाना, पट्टा आवंटन, आय, जाति और निवास प्रमाण पत्रों के आवेदनों पर सर्वे कर रिपोर्ट लगाना, कृषि गणना, पशु गणना, निर्वाचन संबंधी कार्य, जनगणना, अभिलेखों को तैयार करना, खसरा-खतौनी आवंटन, कृषि भूमि आवंटन, कुम्हारी कला, जमीन आवंटन, मत्स्य पालन के लिए पट्टा, ग्राम सभा की भूमि की देखभाल, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि और वरासत आदि के कार्य होते हैं। इनके अन्य क्षेत्र में होने अथवा व्यस्तता के चलते इनसे मुलाकात होना लोगों के लिए अक्सर ही मुश्किल रहता है।
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राजस्व निरीक्षक व लेखपाल के सृजित पदों के सापेक्ष तहसीलवार संख्या
तहसील राजस्व निरीक्षक के सृजित पद तैनात लेखपाल के सृजित पद तैनात
पडरौना 12 05 88 69
हाटा 09 04 58 47
कसया 10 04 72 52
तमकुहीराज 14 04 95 77
कप्तानगंज 09 06 61 41
खड्डा 08 05 53 33
योग 63 29 427 319
बोले पदाधिकारी-
राजस्व निरीक्षक संघ के जिला मंत्री दिनेश लाल श्रीवास्तव का कहना है कि वरिष्ठ लेखपाल पदोन्नति के बाद राजस्व निरीक्षक के पद पर नियुक्त होते हैं। राजस्व निरीक्षकों की संख्या सेवानिवृत्ति के चलते घटती जा रही है, जो बचे हैं उनमें भी अधिकतर लोग आगामी तीन वर्षों में सेवानिवृत्त हो जाएंगे। संख्या कम होने से जनता और विभागीय कार्य प्रभावित होता है।
उत्तर प्रदेश लेखपाल संघ कुशीनगर के अध्यक्ष निलेश रंजन राव ने बताया कि लेखपाल और राजस्व निरीक्षक यदि सृजित पदों के सापेक्ष तैनात रहते तो कार्य समय से होते। लेखपालों की संख्या कम होनेे के कारण शेष लोगों को अतिरिक्त जिम्मेदारी संभालनी पड़ती है। ऐसे में कार्य प्रभावित होता है।
केस-एक
सदर तहसील क्षेत्र के कंठीछपरा गांव के जगदीश बताते हैं कि उनके एक खेत का रकबा पुराने अभिलेख में 1.98 एकड़ है। मौके पर इतना खेत भी उपलब्ध है, लेकिन तहसील से निकलने वाली कंप्यूटराइज्ड खतौनी में यह घटकर 1.52 एकड़ हो गया है। खतौनी दुरुस्त कराने के लिए पिछले कई वर्षों से हलका लेखपाल से लेकर तहसील तक भटक रहे हैं, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हो रहा है।
केस-दो
पडरौना शहर के बेलवा चुंगी निवासी वकील अहमद बताते हैं कि वरासत कराने के लिए छह साल से संबंधित लेखपाल से लगायत तहसील तक भटक रहे हैं। कभी लेखपाल व्यस्त मिलते हैं तो कभी उनसे मुलाकात नहीं हो पाती। इस वजह से इतने दिन बीत गए हैं। इसी उद्देश्य से सोमवार को तहसील में आए थे।
कोट
राजस्व विभाग में पदोन्नति राजस्व परिषद की तरफ से होनी है। शासन स्तर पर इस बारे में प्रक्रिया चल रही है। जनता को राजस्व विभाग से संबंधित किसी प्रकार की परेशानी न हो, इसके लिए संबंधित अधिकारियों-कर्मचारियों को निर्देश दिए गए हैं। उम्मीद है कि यह समस्या शीघ्र दूर होगी।
-भूपेंद्र एस चौधरी, डीएम