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Kushinagar News: गंडक की लहरों पर ‘परक्यूपाइन’ का पहरा, कम लागत में कटान रोकने में सफल
Sun, 14 Jun 2026 12:39 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Sun, 14 Jun 2026 12:39 AM IST
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खडडा क्षेत्र के छितौनी तटबंध के पास लगाया जा रहा परक्यूपाइन
खड्डा (कुशीनगर)। गंडक नदी की कटान को रोकने के लिए अब पारंपरिक उपायों के साथ किफायती तकनीक परक्यूपाइन का प्रयोग धड़ल्ले से किया जा रहा है। इस तकनीक की सबसे बड़ी खासियत यह है कि कम समय में नदी की तेज धारा को तटबंध, आबादी और खेतों से दूर मोड़ सकती है।
चार बर्ष पूर्व खड्डा क्षेत्र के महदेवा गांव को कटान से बचाने के लिए हाईलेवल कमेटी (एचएलसी) ने बांध की जगह परक्यूपाइन का सुझाव दिया था। पहले साल लगभग 1750 मीटर लंबाई और दूसरे वर्ष 900 मीटर लंबाई में नदी के तट पर परक्यूपाइन का निर्माण कराया गया। यह तकनीक काम कर गई और नदी की मुख्य धारा गांव से दूर हो गई है। इस प्रयोग के सफल होने पर अब हर वर्ष छितौनी तटबंध के किनारे आवश्यकतानुसार परक्यूपाइन का निर्माण कराया जा रहा है। वर्तमान में छितौनी तटबंध के किलोमीटर 5.00 के आसपास इसका कार्य चल रहा है। सबसे अच्छी बात यह है कि इसे कम श्रम व समय में लगाया जा रहा है। इसमें पेड़ों की डालियां, झाड़ियां आदि भरकर नदी में स्थापित किया जा रहा है।
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चार बर्ष पूर्व खड्डा क्षेत्र के महदेवा गांव को कटान से बचाने के लिए हाईलेवल कमेटी (एचएलसी) ने बांध की जगह परक्यूपाइन का सुझाव दिया था। पहले साल लगभग 1750 मीटर लंबाई और दूसरे वर्ष 900 मीटर लंबाई में नदी के तट पर परक्यूपाइन का निर्माण कराया गया। यह तकनीक काम कर गई और नदी की मुख्य धारा गांव से दूर हो गई है। इस प्रयोग के सफल होने पर अब हर वर्ष छितौनी तटबंध के किनारे आवश्यकतानुसार परक्यूपाइन का निर्माण कराया जा रहा है। वर्तमान में छितौनी तटबंध के किलोमीटर 5.00 के आसपास इसका कार्य चल रहा है। सबसे अच्छी बात यह है कि इसे कम श्रम व समय में लगाया जा रहा है। इसमें पेड़ों की डालियां, झाड़ियां आदि भरकर नदी में स्थापित किया जा रहा है।
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