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Kushinagar News: डीजे की तेज आवाज पर पुलिस का पहरा, संचालकों पर कसेगा शिकंजा
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पडरौना शहर में डीजे बराते युवक।स्रोत-सोशल मीडिया
कुशीनगर। मूर्ति विसर्जन के दौरान तेज आवाज में डीजे बजाने और अश्लील गीतों पर नृत्य कराने वालों के खिलाफ पुलिस ने सख्ती शुरू कर दी है। ध्वनि मानकों का उल्लंघन करने वाले डीजे संचालकों और आयोजकों पर कार्रवाई की जाएगी।
जिले के सभी थानों और चौकियों पर आयोजित शांति समिति की बैठकों में 100 से अधिक डीजे संचालकों को नोटिस जारी कर निर्धारित मानकों के अनुसार ही ध्वनि विस्तारक यंत्रों का इस्तेमाल करने की चेतावनी दी गई है। पुलिस के अनुसार, उच्च न्यायालय के आदेशों और ध्वनि प्रदूषण संबंधी नियमों के बावजूद कई आयोजनों में तेज आवाज में डीजे बजाए जाते हैं। इससे आसपास रहने वाले लोगों को परेशानी होती है। डोल मेले के दौरान प्रतिबंध के बावजूद तेज आवाज में डीजे बजाने और अश्लील गीतों पर नृत्य कराने के मामले में पुलिस प्राथमिकी दर्ज करा चुकी है। इस मामले में न्यायालय में आरोपपत्र भी दाखिल किया जा चुका है।
पुलिस ने डीजे संचालकों और आयोजकों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि कार्यक्रमों में अश्लील गीत न बजाए जाएं। डीजे ट्रॉली पर लगाए जाने वाले साउंड सिस्टम निर्धारित मानकों के अनुरूप हों और ध्वनि की तीव्रता तय सीमा में रखी जाए। नियमों की अनदेखी करने वालों पर कार्रवाई की जाएगी।
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निर्धारित मानकों के अनुसार ही बजा सकेंगे डीजे
ध्वनि प्रदूषण नियंत्रण के लिए अलग-अलग क्षेत्रों में ध्वनि की अधिकतम सीमा निर्धारित है। इसके अनुसार रिहायशी क्षेत्रों में दिन के समय 55 और रात में 45 डेसीबल, व्यावसायिक क्षेत्रों में दिन में 65 और रात में 55 डेसीबल तथा औद्योगिक क्षेत्रों में दिन में 75 और रात में 70 डेसीबल की सीमा है। शांत क्षेत्रों में दिन में 50 और रात में 40 डेसीबल तक ध्वनि की सीमा निर्धारित है।
कोट
सार्वजनिक आयोजनों में ध्वनि प्रदूषण रोकने और शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए निगरानी की जा रही है। डीजे संचालकों को नोटिस जारी कर चेतावनी दी गई है। इसके बाद भी नियमों की अनदेखी करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। तेज आवाज में डीजे बजाने वालों की वीडियोग्राफी भी कराई जाएगी।
- सिद्धार्थ वर्मा, एएसपी कुशीनगर
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लोग बोले-
डीजे बजने से स्कूलों की पढ़ाई के साथ-साथ घरों में लोगों को रहना मुश्किल हो जा रहा है। इससे लोग बीमार हो रहे हैं। घरों की दीवारे,खिड़कियों में कंपन हो रहा है। कम आवाज में डीजे बजाना चाहिए।
-शैलेंद्र शुक्ला, प्राचार्य, हनुमान इंटर कॉलेज पडरौना
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सड़क से डीजे गुजरने पर होटल की कुर्सियां, शीशे में कंपन होने लगता है, घबराहट भी तेज आवाज से होती है, अंदर बैठे ग्राहक कुछ मांगते हैं तो सुनाई तक नहीं देता है,तय मानक पर डीजे की आवाज होनी चाहिए।
-श्याम गुप्ता, होलट संचालक, रामकोला रोड
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बीमार लोगों को डीजे के तेज आवाज से परेशानी तो होती ही है, स्वस्थ लोगों को भी बेचैनी होने लगती है, घरों का दरवाजा बंद करने के बाद तेज आवाज पहुंचता है। प्रशासन को इस रोक लगाने के लिए पहल करना चाहिए।
-मनोज मोदरनवाल, दुकानदार, सुभाष चौक
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कार्यक्रम के आयोजकों को इसको लेकर गंभीर होने की जरूरत है। डीजे की तेज आवाज लोगों को बीमार बना रहा है। मैं खुद घर से नहीं निकलता हूं, संस्थाओं में पढ़ाई प्रभावित होती है। तय मानक के अनुसार ही डीजे का इस्तेमाल होना चाहिए।
-मनोज सारस्वत, कॉलेज प्रबंधक
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जिले के सभी थानों और चौकियों पर आयोजित शांति समिति की बैठकों में 100 से अधिक डीजे संचालकों को नोटिस जारी कर निर्धारित मानकों के अनुसार ही ध्वनि विस्तारक यंत्रों का इस्तेमाल करने की चेतावनी दी गई है। पुलिस के अनुसार, उच्च न्यायालय के आदेशों और ध्वनि प्रदूषण संबंधी नियमों के बावजूद कई आयोजनों में तेज आवाज में डीजे बजाए जाते हैं। इससे आसपास रहने वाले लोगों को परेशानी होती है। डोल मेले के दौरान प्रतिबंध के बावजूद तेज आवाज में डीजे बजाने और अश्लील गीतों पर नृत्य कराने के मामले में पुलिस प्राथमिकी दर्ज करा चुकी है। इस मामले में न्यायालय में आरोपपत्र भी दाखिल किया जा चुका है।
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पुलिस ने डीजे संचालकों और आयोजकों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि कार्यक्रमों में अश्लील गीत न बजाए जाएं। डीजे ट्रॉली पर लगाए जाने वाले साउंड सिस्टम निर्धारित मानकों के अनुरूप हों और ध्वनि की तीव्रता तय सीमा में रखी जाए। नियमों की अनदेखी करने वालों पर कार्रवाई की जाएगी।
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निर्धारित मानकों के अनुसार ही बजा सकेंगे डीजे
ध्वनि प्रदूषण नियंत्रण के लिए अलग-अलग क्षेत्रों में ध्वनि की अधिकतम सीमा निर्धारित है। इसके अनुसार रिहायशी क्षेत्रों में दिन के समय 55 और रात में 45 डेसीबल, व्यावसायिक क्षेत्रों में दिन में 65 और रात में 55 डेसीबल तथा औद्योगिक क्षेत्रों में दिन में 75 और रात में 70 डेसीबल की सीमा है। शांत क्षेत्रों में दिन में 50 और रात में 40 डेसीबल तक ध्वनि की सीमा निर्धारित है।
कोट
सार्वजनिक आयोजनों में ध्वनि प्रदूषण रोकने और शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए निगरानी की जा रही है। डीजे संचालकों को नोटिस जारी कर चेतावनी दी गई है। इसके बाद भी नियमों की अनदेखी करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। तेज आवाज में डीजे बजाने वालों की वीडियोग्राफी भी कराई जाएगी।
- सिद्धार्थ वर्मा, एएसपी कुशीनगर
लोग बोले-
डीजे बजने से स्कूलों की पढ़ाई के साथ-साथ घरों में लोगों को रहना मुश्किल हो जा रहा है। इससे लोग बीमार हो रहे हैं। घरों की दीवारे,खिड़कियों में कंपन हो रहा है। कम आवाज में डीजे बजाना चाहिए।
-शैलेंद्र शुक्ला, प्राचार्य, हनुमान इंटर कॉलेज पडरौना
सड़क से डीजे गुजरने पर होटल की कुर्सियां, शीशे में कंपन होने लगता है, घबराहट भी तेज आवाज से होती है, अंदर बैठे ग्राहक कुछ मांगते हैं तो सुनाई तक नहीं देता है,तय मानक पर डीजे की आवाज होनी चाहिए।
-श्याम गुप्ता, होलट संचालक, रामकोला रोड
बीमार लोगों को डीजे के तेज आवाज से परेशानी तो होती ही है, स्वस्थ लोगों को भी बेचैनी होने लगती है, घरों का दरवाजा बंद करने के बाद तेज आवाज पहुंचता है। प्रशासन को इस रोक लगाने के लिए पहल करना चाहिए।
-मनोज मोदरनवाल, दुकानदार, सुभाष चौक
कार्यक्रम के आयोजकों को इसको लेकर गंभीर होने की जरूरत है। डीजे की तेज आवाज लोगों को बीमार बना रहा है। मैं खुद घर से नहीं निकलता हूं, संस्थाओं में पढ़ाई प्रभावित होती है। तय मानक के अनुसार ही डीजे का इस्तेमाल होना चाहिए।
-मनोज सारस्वत, कॉलेज प्रबंधक