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Kushinagar News: मानकों की धज्जियां उड़ाने पर पुलिस सख्त, आरोपी डीजे संचालक पर प्राथमिकी दर्ज
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कसया। श्री कृष्ण जन्माष्टमी के उपलक्ष्य में आयोजित डोल मेले में मानकों के उल्लंघन को लेकर पुलिस आरोपी डीजे संचालक के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर कार्रवाई में जुटी है। डोल मेले में डीजे के शोर से बच्चों से लेकर बुजुर्गों को काफी परेशानी हुई थी। देर रात तक कस्बे के भवनों की खिड़कियों में कंपन होता रहा। मानक से अधिक आवाज होने के चलते कारोबारी ग्राहकों तक से बात नहीं कर पा रहे थे। उन्हें काफी मुश्किल हुई थी।
कस्बे में बीते आठ और नौ सितंबर को गांधी चौक, अमिय चौक, सुभाष चौक और मुख्य बाजार में डोल मेले का जुलूस निकाला गया था। मेले में वार्ड नंबर-18 मथौली के एकता सेवा दल की ओर से आरएस डीजे का कानफोड़ू आवाज देर रात तक गूंजता रहा। घरों की खिड़कियां और दरवाजे हिल रहे थे। इस दौरान गांधी चौक पर मरीज लेकर एक एंबुलेंस गाड़ी फंस गई थी लेकिन शोर के बीच डीजे संचालक ने मरीज के जीवन की परवाह किए बिना मानक की खुलेआम धज्जियां उड़ाते हुए बजाया जाता रहा। वाहन पर 22 से 24 बड़े साउंड और 24 से 28 ट्विटर हार्न लगे हुए थे।
भीषण जाम में एंबुलेंस फंसने पर जब ड्यूटी पर तैनात एसआई मनोज द्विवेदी ने थाना क्षेत्र के सिरसिया खोहिया निवासी डीजे संचालक अभय प्रताप सिंह आवाज कम करने को कहा, तो संचालक ने निर्देश मानने से इनकार कर दिया। इस संबंध में एसओ इत्यानंद पांडेय ने बताया कि पुलिस ने साक्ष्य के तौर पर वीडियो/फोटो के साथ पर्यावरण संरक्षण अधिनियम और ध्वनि प्रदूषण नियंत्रण नियमों के तहत प्राथमिकी दर्ज की है।
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अधिवक्ता, कारोबारी और सामाजिक कार्यकर्ता बोले-
डीजे की तेज आवाज से पूरे नगर में लोगों को परेशानी हुई। आयोजन की आड़ में ध्वनि मानकों की अनदेखी नहीं होनी चाहिए। प्रशासन को निर्धारित सीमा में ही डीजे बजाए जाने की व्यवस्था सुनिश्चित करनी चाहिए। -ओंकारनाथ पांडेय, अधिवक्ता
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श्री कृष्ण जन्माष्टमी पर डोल मेले और धार्मिक आयोजन हमारी परंपरा का हिस्सा हैं लेकिन इससे आम लोगों की शांति और स्वास्थ्य प्रभावित नहीं होना चाहिए। तेज आवाज पर प्रभावी नियंत्रण जरूरी है। -आनंद राय, अधिवक्ता
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डोल मेले के दौरान दो दिनों तक कस्बे के प्रमुख मार्गों पर डीजे की तेज आवाज से कारोबार प्रभावित हुआ। ग्राहकों से बातचीत तक करने में परेशानी हुई। आवाज को नियंत्रित रखा जाना चाहिए था। -आनंद सिंह, कारोबारी
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डोल मेले में जुलूस के दौरान डीजे की आवाज इतनी तेज थी कि दुकान के अंदर भी कंपन महसूस हो रहा था। उत्सव मनाने के साथ आसपास के लोगों की सुविधा का भी ध्यान रखा जाना चाहिए। -ब्रह्मजीत कुमार, कारोबारी
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डोल मेला उत्सव का अवसर है, लेकिन तेज आवाज में डीजे बजाकर दूसरे लोगों की परेशानी बढ़ाना उचित नहीं है। प्रशासन को आयोजकों और डीजे संचालकों को ध्वनि मानकों का पालन कराने के लिए पहले से निर्देश दिया जाना चाहिए। -संजय कुमार, कसया
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डोल जुलूस के दौरान डीजे की तेज आवाज से बच्चे, बुजुर्ग और बीमार लोग परेशान रहे। ऐसे आयोजनों में समय और ध्वनि सीमा दोनों के लिए तय मानकों का अनुपालन किया किया जाना चाहिए। -अश्वनी पांडेय, कसया
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कस्बे में बीते आठ और नौ सितंबर को गांधी चौक, अमिय चौक, सुभाष चौक और मुख्य बाजार में डोल मेले का जुलूस निकाला गया था। मेले में वार्ड नंबर-18 मथौली के एकता सेवा दल की ओर से आरएस डीजे का कानफोड़ू आवाज देर रात तक गूंजता रहा। घरों की खिड़कियां और दरवाजे हिल रहे थे। इस दौरान गांधी चौक पर मरीज लेकर एक एंबुलेंस गाड़ी फंस गई थी लेकिन शोर के बीच डीजे संचालक ने मरीज के जीवन की परवाह किए बिना मानक की खुलेआम धज्जियां उड़ाते हुए बजाया जाता रहा। वाहन पर 22 से 24 बड़े साउंड और 24 से 28 ट्विटर हार्न लगे हुए थे।
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भीषण जाम में एंबुलेंस फंसने पर जब ड्यूटी पर तैनात एसआई मनोज द्विवेदी ने थाना क्षेत्र के सिरसिया खोहिया निवासी डीजे संचालक अभय प्रताप सिंह आवाज कम करने को कहा, तो संचालक ने निर्देश मानने से इनकार कर दिया। इस संबंध में एसओ इत्यानंद पांडेय ने बताया कि पुलिस ने साक्ष्य के तौर पर वीडियो/फोटो के साथ पर्यावरण संरक्षण अधिनियम और ध्वनि प्रदूषण नियंत्रण नियमों के तहत प्राथमिकी दर्ज की है।
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अधिवक्ता, कारोबारी और सामाजिक कार्यकर्ता बोले-
डीजे की तेज आवाज से पूरे नगर में लोगों को परेशानी हुई। आयोजन की आड़ में ध्वनि मानकों की अनदेखी नहीं होनी चाहिए। प्रशासन को निर्धारित सीमा में ही डीजे बजाए जाने की व्यवस्था सुनिश्चित करनी चाहिए। -ओंकारनाथ पांडेय, अधिवक्ता
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श्री कृष्ण जन्माष्टमी पर डोल मेले और धार्मिक आयोजन हमारी परंपरा का हिस्सा हैं लेकिन इससे आम लोगों की शांति और स्वास्थ्य प्रभावित नहीं होना चाहिए। तेज आवाज पर प्रभावी नियंत्रण जरूरी है। -आनंद राय, अधिवक्ता
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डोल मेले के दौरान दो दिनों तक कस्बे के प्रमुख मार्गों पर डीजे की तेज आवाज से कारोबार प्रभावित हुआ। ग्राहकों से बातचीत तक करने में परेशानी हुई। आवाज को नियंत्रित रखा जाना चाहिए था। -आनंद सिंह, कारोबारी
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डोल मेले में जुलूस के दौरान डीजे की आवाज इतनी तेज थी कि दुकान के अंदर भी कंपन महसूस हो रहा था। उत्सव मनाने के साथ आसपास के लोगों की सुविधा का भी ध्यान रखा जाना चाहिए। -ब्रह्मजीत कुमार, कारोबारी
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डोल मेला उत्सव का अवसर है, लेकिन तेज आवाज में डीजे बजाकर दूसरे लोगों की परेशानी बढ़ाना उचित नहीं है। प्रशासन को आयोजकों और डीजे संचालकों को ध्वनि मानकों का पालन कराने के लिए पहले से निर्देश दिया जाना चाहिए। -संजय कुमार, कसया
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डोल जुलूस के दौरान डीजे की तेज आवाज से बच्चे, बुजुर्ग और बीमार लोग परेशान रहे। ऐसे आयोजनों में समय और ध्वनि सीमा दोनों के लिए तय मानकों का अनुपालन किया किया जाना चाहिए। -अश्वनी पांडेय, कसया