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Kushinagar News: फर्जी जन्म प्रमाण पत्र बनाने वाले सरगना तक नहीं पहुंचा पा रही पुलिस
Thu, 16 Jan 2025 11:59 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Thu, 16 Jan 2025 11:59 PM IST
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पडरौना। रायबरेली के सलोन में हुए प्रमाणपत्र फर्जीवाड़े की जांच का तार कुशीनगर से जुड़ने के बाद भी सचिवों की आईडी से फर्जी तरीके से जन्म प्रमाणपत्र बनाने पर रोक नहीं लग पा रही है। हाटा ब्लॉक के सचिव की शिकायत के बाद साइबर सेल और पुलिस की टीम सक्रिय हुई है, लेकिन दूसरे प्रदेश में बैठे मास्टरमाइंड तक नहीं पहुंच पा रही है।
सुराग मिलने के बाद भी सीएससी संचालकों और दस से अधिक युवकों को हिरासत में लेकर पूछताछ करने बाद छोड़ दिया है। पुलिस के हाथ रकम मंगाने के लिए भेजा गया क्यूआर कोर्ड हाथ लगा है, जांच के लिए पुलिस साइबर सेल के माध्यम से बैंक को भेजी है कि किसके नाम से किस बैंक का क्यूआर कोड है। इसकी जांच कराई जा रही है। अभी तक पुलिस किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंची है।
रायबरेली के सलोन में बनाए गए फर्जी जन्म प्रमाणपत्र के मामले की एटीएस और पुलिस जांच कर रही है। जिले के भी कुछ गांवों में जन्म प्रमाणपत्रों में फर्जीवाड़े के संकेत मिलने पर पहुंची एटीएस कुशीनगर में भी पहुंची थी और तमकुहीराज ब्लॉक में तैनात कंप्यूटर ऑपरेटर को ट्रेस किया था। इसके अलावा तरयासुजान के सीएसपी संचालक संजीव कुमार सिंह और महराजगंज के रहने वाले विशुनपुरा सीएचसी में तैनात डाटा ऑपरेटर सतीश सोनी की गिरफ्तारी भी हुई थी।
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दोबारा फर्जी जन्म प्रमाणपत्र बनने की सीएमओ की जांच में पुष्टि हुई है। हाटा ब्लॉक में तैनात सचिव ने डीपीआरओ की आईडी हैक कर फर्जी तरीके से जन्म प्रमाणपत्र बनाने की सूचना करीब दस दिन पहले दी थी। डीपीआरओ ने साइबर सेल को इसकी जानकारी दी और सभी सचिवों को सतर्क करते हुए खुद आईडी पासवार्ड चलाने के निर्देश दिए।
साइबर सेल और पुलिस की अभी तक के जांच में पता चला है कि दूसरे प्रदेश में बैठा जालसाज फर्जी जन्म प्रमाणपत्र बनाने का काम कर रहा है। जिले के कई सीएससी संचालक या यहां काम करने वाले लोगों को व्हाट्सएप ग्रुप बनाकर जोड़ा है। इसमें जन्म प्रमाणपत्र, आयुष्मान कार्ड, कोविड रिपोर्ट समेत कई तरह के प्रमाणपत्र बनाने की बात की जाती है। इसका रेट भी अलग-अलग है। आधार और कागज भेजने के बाद वह रुपये मंगाने के लिए क्यूआर कोड भेजता है, जिस पर भुगतान किया जाता है। इसके बाद वह प्रमाणपत्र भेजता है। सूत्रों की मानें तो पुलिस सरगना तक पहुंचने के लिए उसके बैंक खाते की डिटेल खंगाल रही है, जिस क्यूआर कोड पर सरगना रकम मंगाता है। वह साइबर सेल के हाथ लग चुका है। इस पर जन्म प्रमाणपत्र बनवाने के लिए रकम भेजने वालों को भी साइबर सेल की टीम हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है।
एएसपी रितेश कुमार सिंह ने बताया कि साइबर सेल के माध्यम से पुलिस टीम जांच कर रही है। कुछ सुराग हाथ लगे हैं, जिस पर पुलिस टीम काम कर रही है।
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सुराग मिलने के बाद भी सीएससी संचालकों और दस से अधिक युवकों को हिरासत में लेकर पूछताछ करने बाद छोड़ दिया है। पुलिस के हाथ रकम मंगाने के लिए भेजा गया क्यूआर कोर्ड हाथ लगा है, जांच के लिए पुलिस साइबर सेल के माध्यम से बैंक को भेजी है कि किसके नाम से किस बैंक का क्यूआर कोड है। इसकी जांच कराई जा रही है। अभी तक पुलिस किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंची है।
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रायबरेली के सलोन में बनाए गए फर्जी जन्म प्रमाणपत्र के मामले की एटीएस और पुलिस जांच कर रही है। जिले के भी कुछ गांवों में जन्म प्रमाणपत्रों में फर्जीवाड़े के संकेत मिलने पर पहुंची एटीएस कुशीनगर में भी पहुंची थी और तमकुहीराज ब्लॉक में तैनात कंप्यूटर ऑपरेटर को ट्रेस किया था। इसके अलावा तरयासुजान के सीएसपी संचालक संजीव कुमार सिंह और महराजगंज के रहने वाले विशुनपुरा सीएचसी में तैनात डाटा ऑपरेटर सतीश सोनी की गिरफ्तारी भी हुई थी।
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दोबारा फर्जी जन्म प्रमाणपत्र बनने की सीएमओ की जांच में पुष्टि हुई है। हाटा ब्लॉक में तैनात सचिव ने डीपीआरओ की आईडी हैक कर फर्जी तरीके से जन्म प्रमाणपत्र बनाने की सूचना करीब दस दिन पहले दी थी। डीपीआरओ ने साइबर सेल को इसकी जानकारी दी और सभी सचिवों को सतर्क करते हुए खुद आईडी पासवार्ड चलाने के निर्देश दिए।
साइबर सेल और पुलिस की अभी तक के जांच में पता चला है कि दूसरे प्रदेश में बैठा जालसाज फर्जी जन्म प्रमाणपत्र बनाने का काम कर रहा है। जिले के कई सीएससी संचालक या यहां काम करने वाले लोगों को व्हाट्सएप ग्रुप बनाकर जोड़ा है। इसमें जन्म प्रमाणपत्र, आयुष्मान कार्ड, कोविड रिपोर्ट समेत कई तरह के प्रमाणपत्र बनाने की बात की जाती है। इसका रेट भी अलग-अलग है। आधार और कागज भेजने के बाद वह रुपये मंगाने के लिए क्यूआर कोड भेजता है, जिस पर भुगतान किया जाता है। इसके बाद वह प्रमाणपत्र भेजता है। सूत्रों की मानें तो पुलिस सरगना तक पहुंचने के लिए उसके बैंक खाते की डिटेल खंगाल रही है, जिस क्यूआर कोड पर सरगना रकम मंगाता है। वह साइबर सेल के हाथ लग चुका है। इस पर जन्म प्रमाणपत्र बनवाने के लिए रकम भेजने वालों को भी साइबर सेल की टीम हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है।
एएसपी रितेश कुमार सिंह ने बताया कि साइबर सेल के माध्यम से पुलिस टीम जांच कर रही है। कुछ सुराग हाथ लगे हैं, जिस पर पुलिस टीम काम कर रही है।