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फार्मासिस्टों के भरोसे हैं 12 होम्योपैथिक अस्पताल
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जिला अस्पताल परिसर में संचालित राजकीय होम्योपैथिक चिकित्सालय में मौजूद फार्मासिस्ट, वार्ड बॉय ?
- फोटो : KUSHINAGAR
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फार्मासिस्टों के भरोसे हैं 12 होम्योपैथिक अस्पताल
कुशीनगर। असाध्य रोगों में भी कारगर मानी जाने वाली होम्योपैथिक चिकित्सा पद्धति से इलाज कराने वालों की संख्या अच्छी-खासी है, लेकिन इसके अस्पतालों में पर्याप्त डॉक्टर नहीं हैं। ऐसे में फार्मासिस्टों के भरोसे अस्पताल चल रहे हैं। इससे मरीजों को लाभ नहीं मिल पा रहा है।
पडरौना शहर का पुरुष एवं नेत्र चिकित्सालय में चल रहा होम्योपैथिक अस्पताल फार्मासिस्ट और वार्ड ब्वॉय के सहारे है तो जिला संयुक्त अस्पताल के परिसर में स्थित राजकीय होम्योपैथिक अस्पताल में दो-दो दिन के लिए दो डॉक्टर संबद्ध किए गए हैं। ग्रामीण क्षेत्र के अस्पतालों में भी डॉक्टर समय से उपलब्ध नहीं रहते हैं।
पहले जिले में 45 राजकीय होम्योपैथिक अस्पताल थे। छह माह पहले पडरौना क्षेत्र के सरयाडीह में नया अस्पताल खुला है। पडरौना शहर के पुरुष एवं नेत्र चिकित्सालय में संचालित राजकीय होम्योपैथिक अस्पताल एक कमरे में है, जहां फार्मासिस्ट, वार्ड ब्वॉय और मरीजों के लिए रखे कुर्सी-मेज से ही कक्ष भरा हुआ है। डॉक्टर के बैठने लायक जगह नहीं है।
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जिला अस्पताल परिसर में चल रहे राजकीय होम्योपैथिक अस्पताल में स्थायी डॉक्टर की तैनाती नहीं है। जनपद मुख्यालय का होम्योपैथिक अस्पताल होने के कारण इसके महत्व को देखते हुए महुअवा कारखाना राजकीय होम्योपैथिक चिकित्सालय के डॉ. जितेंद्र सिंह और रामपुर पट्टी के डॉ. गिरजेश मिश्र को दो-दो दिन के लिए इस अस्पताल से संबद्ध किया गया है। इसके अलावा पडरौना क्षेत्र के ही सरयाडीह में छह माह पहले एक राजकीय होम्योपैथिक चिकित्सालय खुला था, लेकिन वहां भी स्थायी रूप से किसी डॉक्टर की तैनाती नहीं हुई है। राजकीय होम्योपैथिक चिकित्सालय पैकोली के डॉ. अंशुमान गौड़ को दो दिन के लिए इस अस्पताल से संबद्ध किया गया है।
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60 से 100 के बीच प्रतिदिन आते हैं मरीज
जिला अस्पताल परिसर में संचालित राजकीय आयुर्वेदिक अस्पताल और पडरौना के पुरुष एवं नेत्र चिकित्सालय में संचालित राजकीय होम्योपैथिक अस्पताल में मरीज ठीक-ठाक संख्या में आते हैं। जिला अस्पताल परिसर में संचालित राजकीय होम्योपैथिक चिकित्सालय के फार्मासिस्ट रामदरश कुशवाहा ने बताया कि यहां औसतन 60 से 80 मरीज प्रतिदिन आते हैं। पडरौना के पुरुष एवं नेत्र चिकित्सालय में संचालित राजकीय होम्योपैथिक चिकित्सालय की फार्मासिस्ट पूजा गुप्ता ने बताया कि इस अस्पताल में 100 से अधिक मरीज प्रतिदिन आते हैं।
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इन अस्पतालों को फार्मासिस्ट करते हैं संचालित
राजकीय होम्योपैथिक चिकित्सालय जटहां बाजार, नौका टोला (पडरौना), कठकुइयां, रवींद्रनगर, दुदही, पृथ्वीपुर, रामपुर बरहन, बांसगांव चौरिया, दशहवां, परसौनी बुजुर्ग, अहिरौलीदान और सरयाडीह में डॉक्टर की तैनाती नहीं है। इन अस्पतालों में तैनात फार्मासिस्ट ही मरीजों का उपचार करते हैं।
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कोट
जनपद के राजकीय होम्योपैथिक चिकित्सालयों में डॉक्टरों की संख्या पहले से बढ़ी है, लेकिन 12 अस्पताल में डॉक्टर नहीं हैं। वहां तैनात फार्मासिस्ट ही मरीजों को दवा देते हैं। जिला अस्पताल में स्थित राजकीय होम्योपैथिक चिकित्सालय में दो डॉक्टरों को दो-दो दिन के लिए संबद्ध किया गया है। सरयाडीह में पैकौली के डॉक्टर को दो दिन के लिए संबद्ध किया गया है।
डॉ. अशोक कुमार गौंड़, जिला होम्योपैथिक चिकित्साधिकारी
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कुशीनगर। असाध्य रोगों में भी कारगर मानी जाने वाली होम्योपैथिक चिकित्सा पद्धति से इलाज कराने वालों की संख्या अच्छी-खासी है, लेकिन इसके अस्पतालों में पर्याप्त डॉक्टर नहीं हैं। ऐसे में फार्मासिस्टों के भरोसे अस्पताल चल रहे हैं। इससे मरीजों को लाभ नहीं मिल पा रहा है।
पडरौना शहर का पुरुष एवं नेत्र चिकित्सालय में चल रहा होम्योपैथिक अस्पताल फार्मासिस्ट और वार्ड ब्वॉय के सहारे है तो जिला संयुक्त अस्पताल के परिसर में स्थित राजकीय होम्योपैथिक अस्पताल में दो-दो दिन के लिए दो डॉक्टर संबद्ध किए गए हैं। ग्रामीण क्षेत्र के अस्पतालों में भी डॉक्टर समय से उपलब्ध नहीं रहते हैं।
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पहले जिले में 45 राजकीय होम्योपैथिक अस्पताल थे। छह माह पहले पडरौना क्षेत्र के सरयाडीह में नया अस्पताल खुला है। पडरौना शहर के पुरुष एवं नेत्र चिकित्सालय में संचालित राजकीय होम्योपैथिक अस्पताल एक कमरे में है, जहां फार्मासिस्ट, वार्ड ब्वॉय और मरीजों के लिए रखे कुर्सी-मेज से ही कक्ष भरा हुआ है। डॉक्टर के बैठने लायक जगह नहीं है।
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जिला अस्पताल परिसर में चल रहे राजकीय होम्योपैथिक अस्पताल में स्थायी डॉक्टर की तैनाती नहीं है। जनपद मुख्यालय का होम्योपैथिक अस्पताल होने के कारण इसके महत्व को देखते हुए महुअवा कारखाना राजकीय होम्योपैथिक चिकित्सालय के डॉ. जितेंद्र सिंह और रामपुर पट्टी के डॉ. गिरजेश मिश्र को दो-दो दिन के लिए इस अस्पताल से संबद्ध किया गया है। इसके अलावा पडरौना क्षेत्र के ही सरयाडीह में छह माह पहले एक राजकीय होम्योपैथिक चिकित्सालय खुला था, लेकिन वहां भी स्थायी रूप से किसी डॉक्टर की तैनाती नहीं हुई है। राजकीय होम्योपैथिक चिकित्सालय पैकोली के डॉ. अंशुमान गौड़ को दो दिन के लिए इस अस्पताल से संबद्ध किया गया है।
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60 से 100 के बीच प्रतिदिन आते हैं मरीज
जिला अस्पताल परिसर में संचालित राजकीय आयुर्वेदिक अस्पताल और पडरौना के पुरुष एवं नेत्र चिकित्सालय में संचालित राजकीय होम्योपैथिक अस्पताल में मरीज ठीक-ठाक संख्या में आते हैं। जिला अस्पताल परिसर में संचालित राजकीय होम्योपैथिक चिकित्सालय के फार्मासिस्ट रामदरश कुशवाहा ने बताया कि यहां औसतन 60 से 80 मरीज प्रतिदिन आते हैं। पडरौना के पुरुष एवं नेत्र चिकित्सालय में संचालित राजकीय होम्योपैथिक चिकित्सालय की फार्मासिस्ट पूजा गुप्ता ने बताया कि इस अस्पताल में 100 से अधिक मरीज प्रतिदिन आते हैं।
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इन अस्पतालों को फार्मासिस्ट करते हैं संचालित
राजकीय होम्योपैथिक चिकित्सालय जटहां बाजार, नौका टोला (पडरौना), कठकुइयां, रवींद्रनगर, दुदही, पृथ्वीपुर, रामपुर बरहन, बांसगांव चौरिया, दशहवां, परसौनी बुजुर्ग, अहिरौलीदान और सरयाडीह में डॉक्टर की तैनाती नहीं है। इन अस्पतालों में तैनात फार्मासिस्ट ही मरीजों का उपचार करते हैं।
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कोट
जनपद के राजकीय होम्योपैथिक चिकित्सालयों में डॉक्टरों की संख्या पहले से बढ़ी है, लेकिन 12 अस्पताल में डॉक्टर नहीं हैं। वहां तैनात फार्मासिस्ट ही मरीजों को दवा देते हैं। जिला अस्पताल में स्थित राजकीय होम्योपैथिक चिकित्सालय में दो डॉक्टरों को दो-दो दिन के लिए संबद्ध किया गया है। सरयाडीह में पैकौली के डॉक्टर को दो दिन के लिए संबद्ध किया गया है।
डॉ. अशोक कुमार गौंड़, जिला होम्योपैथिक चिकित्साधिकारी