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टूटी झोपड़ियों या टिनशेड के घर में करना पड़ रहा गुजर-बसर
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आवास से वंचित हैं मुसहर बस्ती के लोग
कोइलसवा बुजुर्ग के मुसहर मजदूरी पर आश्रित हैं
कुछ परिवार जर्जर मकान में रहने को विवश हैं
संवाद न्यूज एजेंसी
बनकटा बाजार। फाजिलनगर क्षेत्र के कोइलसवा बुजुर्ग गांव की मुसहर बस्ती के अनेक परिवार आवास के लिए भटक रहे हैं। उन्हें या तो जर्जर घरों में गुजर-बसर करना पड़ रहा है या फिर टूटी झोपड़ियों या टीनशेड के घरों में। आवास नहीं मिलने की वजह से उन्हें बरसात में उनकी परेशानी बढ़ गई है।
मुसहर समाज के लोगों का जीवन स्तर ऊपर उठाने के लिए मौजूदा प्रदेश सरकार की तरफ से अनेक कल्याणकारी योजनाएं संचालित की जा रही हैं। फाजिलनगर क्षेत्र के कोइलसवा बुजुर्ग में भी लगभग 700 की आबादी में मुसहर बिरादरी के लोग निवास करते हैं। इनमें बहुत से लोगों के घर जर्जर हो गए हैं या टूटी झोपड़ियों अथवा टीनशेड के घरों में निवास करते हैं। मुसहर बस्ती में ज्यादातर लोगों को प्रधानमंत्री आवास आवंटित हो गया है। उनमें कुछ के आवास अभी भी अधूरे हैं, जबकि कुछ परिवार पात्र होने के बावजूद आवास से वंचित हैं। बरसात में उन्हें टपकते घरों में काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। श्रवण मुसहर ने बताया कि उन्हें आवास नहीं मिला है। ग्राम प्रधान से लेकर ग्राम पंचायत अधिकारी से कई बार मिलकर आग्रह कर चुके हैं। हालत यह है कि उन्हें परिवार के साथ पंचायत भवन में गुजर-बसर करना पड़ रहा है। इस गांव के बासुदेव मुसहर ने बताया कि मजदूरी ही परिवार की आजीविका का मुख्य आधार है। इनकी दो बेटियां हैं। 20 साल की एक बेटी अंशु कुमारी दिव्यांग है। उसे कोई सरकारी मदद भी नहीं मिलती है। बासुदेव को भी आवास नहीं मिला है। इस गांव की अतवारी देवी छोटे बच्चों को लेकर जीवन यापन कर रही हैं। आवास के लिए सभी जिम्मेदार अफसरों से आग्रह कीं, लेकिन लाभार्थियों की सूची में नाम नहीं शामिल किया गया। इस बाबत ग्राम विकास अधिकारी इम्तियाज अंसारी का कहना है कि इस गांव के अधिकांश मुसहर परिवारों को आवास आवंटित हो गया है। कुछ लोग छूटे हैं। उनका नाम सूची में शामिल क्यों नहीं हुआ है, इसका पता लगाकर उन्हें भी आवास से लाभांवित किया जाएगा।
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कोइलसवा बुजुर्ग के मुसहर मजदूरी पर आश्रित हैं
कुछ परिवार जर्जर मकान में रहने को विवश हैं
संवाद न्यूज एजेंसी
बनकटा बाजार। फाजिलनगर क्षेत्र के कोइलसवा बुजुर्ग गांव की मुसहर बस्ती के अनेक परिवार आवास के लिए भटक रहे हैं। उन्हें या तो जर्जर घरों में गुजर-बसर करना पड़ रहा है या फिर टूटी झोपड़ियों या टीनशेड के घरों में। आवास नहीं मिलने की वजह से उन्हें बरसात में उनकी परेशानी बढ़ गई है।
मुसहर समाज के लोगों का जीवन स्तर ऊपर उठाने के लिए मौजूदा प्रदेश सरकार की तरफ से अनेक कल्याणकारी योजनाएं संचालित की जा रही हैं। फाजिलनगर क्षेत्र के कोइलसवा बुजुर्ग में भी लगभग 700 की आबादी में मुसहर बिरादरी के लोग निवास करते हैं। इनमें बहुत से लोगों के घर जर्जर हो गए हैं या टूटी झोपड़ियों अथवा टीनशेड के घरों में निवास करते हैं। मुसहर बस्ती में ज्यादातर लोगों को प्रधानमंत्री आवास आवंटित हो गया है। उनमें कुछ के आवास अभी भी अधूरे हैं, जबकि कुछ परिवार पात्र होने के बावजूद आवास से वंचित हैं। बरसात में उन्हें टपकते घरों में काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। श्रवण मुसहर ने बताया कि उन्हें आवास नहीं मिला है। ग्राम प्रधान से लेकर ग्राम पंचायत अधिकारी से कई बार मिलकर आग्रह कर चुके हैं। हालत यह है कि उन्हें परिवार के साथ पंचायत भवन में गुजर-बसर करना पड़ रहा है। इस गांव के बासुदेव मुसहर ने बताया कि मजदूरी ही परिवार की आजीविका का मुख्य आधार है। इनकी दो बेटियां हैं। 20 साल की एक बेटी अंशु कुमारी दिव्यांग है। उसे कोई सरकारी मदद भी नहीं मिलती है। बासुदेव को भी आवास नहीं मिला है। इस गांव की अतवारी देवी छोटे बच्चों को लेकर जीवन यापन कर रही हैं। आवास के लिए सभी जिम्मेदार अफसरों से आग्रह कीं, लेकिन लाभार्थियों की सूची में नाम नहीं शामिल किया गया। इस बाबत ग्राम विकास अधिकारी इम्तियाज अंसारी का कहना है कि इस गांव के अधिकांश मुसहर परिवारों को आवास आवंटित हो गया है। कुछ लोग छूटे हैं। उनका नाम सूची में शामिल क्यों नहीं हुआ है, इसका पता लगाकर उन्हें भी आवास से लाभांवित किया जाएगा।
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