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Kushinagar News: अचानक गांव में बिगड़ गया माहौल, काफी देर तक बना रहा तनाव

Sat, 08 Jul 2023 11:48 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर Updated Sat, 08 Jul 2023 11:48 PM IST
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pelting on ex minister fleet
चिरइयहवा गांव में शुक्रवार की रात पूर्व मंत्री व सुहेलदेव समाज पार्टी के राष्ट्रीय प्रमुख महासच
पूर्व राज्यमंत्री डॉ. अरविंद राजभर के चिरइयहवा गांव से निकलने के बाद हुई घटना
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संवाद न्यूज एजेंसी

मंसाछापर। पडरौना कोतवाली क्षेत्र के चिरइयहवा गांव में शुक्रवार की देर शाम को माहौल एकाएक बिगड़ गया था। पूर्व राज्य मंत्री डॉ. अरविंद राजभर पडरौना में पार्टी के संगठन की बैठक के लिए आए थे। वहां से अपने समर्थकों के साथ चिरइयहवा गांव में पहुंचे। वह मारपीट में घायल बुजुर्ग विश्वनाथ राजभर के परिवार से मिलकर घटना के बारे में जानकारी लेने पहुंचे थे। करीब एक घंटा तक पीड़ित परिवार के घर रहे। जब वह लौटने लगे तो गांव में ही करीब 200 से अधिक लोगों ने उनके काफिले को रोक दिया।
पूर्व मंत्री का आरोप था कि इस घटना के समय उन्होंने एसपी और कोतवाल को कई बार कॉल की लेकिन कोई रिस्पांस नहीं मिला। करीब एक घंटे बाद कोतवाल घटनास्थल पर पहुंचे। पूर्व राज्य मंत्री अरविंद राजभर का आरोप है कि उनके और काफिले में शामिल दूसरे वाहनों के आगे का हिस्सा क्षतिग्रस्त हुआ है।
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आधा कट्ठा जमीन के लिए था विवाद

मृतक विश्वनाथ राजभर की गांव में ही जमीन है। उसके आगे कुछ खाली जमीन थी। उसी पर गांव के ही तीन लोगों का कब्जा था। कब्जा हटवाने के लिए विश्वनाथ ने शिकायती पत्र दिया था। 23 जून को राजस्व विभाग और कोतवाली पुलिस की मौजूदगी में कब्जा हटा। आरोप था कि उसी दिन शाम करीब चार बजे दूसरे पक्ष के लोगों ने आक्रोशित हो गए और लाठी-डंडे से हमला कर एक महिला समेत दो लोगों को गंभीर रूप से घायल कर दिया। बुजुर्ग विश्वनाथ राजभर की मौत अगले दिन 24 जून को मेडिकल कॉलेज गोरखपुर में हो गई। इसके पूर्व कोतवाली पुलिस ने गांव के पूर्व ग्राम प्रधान समेत चार लोगों के विरुद्ध मारपीट का मुकदमा दर्ज कर लिया था। शव आने के बाद परिजनों ने कार्रवाई की मांग को लेकर 25 जून को रोके रखा। कोतवाल की तरफ से चारों की गिरफ्तारी का आश्वासन देने के बाद मामला शांत हुआ।
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पूर्व ग्राम प्रधान को हिरासत में लेकर छोड़ देना रहा चर्चा का विषय

कोतवाली पुलिस की भूमिका पर पीड़ित परिवार लगातार उंगली उठा रहा है। पीड़ित परिवार की महिला दुर्गावती का कहना था कि पुलिस ने जब चारों को हिरासत में लिया था तो केवल तीन को ही क्यों जेल भेजा और पूर्व ग्राम प्रधान को बिना कार्रवाई किए क्यों छोड़ दिया। पीड़ित परिवार का कहना है कि पूर्व ग्राम प्रधान की शह पर ही यह पूरी घटना हुई है। आईजी के सामने ही दो गवाह और पीड़ित परिवार के लोग किसी अनहोनी से परेशान थे। उनका आरोप था कि उनके परिवार को जान से मारने की धमकी दी जा रही है।

कोट
पूर्व राज्यमंत्री के काफिले पर हमले की बात गलत है। कोई पथराव नहीं हुआ है। अगर ऐसा हुआ होता तो उन्हें तहरीर देनी चाहिए थी। मुकदमा दर्ज किया जाता। आरोपियों को गिरफ्तार किया जाता, लेकिन रात के नौ बजने जा रहे हैं। अब तक तहरीर नहीं पड़ी है। जानकारी करने पर पता चला है कि पूर्व राज्यमंत्री मृतक के घर पहुंचे थे। लौटने पर दूसरे पक्ष के कुछ ग्रामीण अपनी बात भी बताने के लिए उनसे मिलना चाह रहे थे कि यदि एक पक्ष की बात सुने हैं तो उनकी भी सुन लें। उनके काफिले पर हमला करने का कोई वीडियो मुझे अब तक नहीं मिला है।
-धवल जायसवाल, एसपी
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