{"_id":"6ab2dce12a377d5d27037d70","slug":"patients-and-their-attendants-kept-wandering-in-search-of-wheelchairs-and-stretchers-kushinagar-news-c-205-1-ksh1049-168528-2026-09-23","type":"story","status":"publish","title_hn":"Kushinagar News: व्हील चेयर और स्ट्रेचर के लिए भटकते रहे मरीज-तीमारदार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Kushinagar News: व्हील चेयर और स्ट्रेचर के लिए भटकते रहे मरीज-तीमारदार
विज्ञापन
व्हील चेयर नहीं मिलने पर पैदल जाता मरीज।
पडरौना। मेडिकल कॉलेज में मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के दावों की जमीनी हकीकत मंगलवार को कुछ और ही नजर आई। इलाज के लिए पहुंचे मरीज और उनके तीमारदार व्हील चेयर व स्ट्रेचर के लिए इधर-उधर भटकते रहे। गंभीर, बुजुर्ग और चलने में असमर्थ मरीजों को परिजन हाथ और कंधे का सहारा देकर सीढ़ियों से ओपीडी और वार्ड तक ले जाते दिखाई दिए।
मेडिकल कॉलेज की नई बिल्डिंग में आईसीयू से लेकर जनरल वार्ड तक आने-जाने के लिए दो लिफ्ट लगाई गई हैं। इनमें से एक लिफ्ट कई माह से बंद है। ऐसे में सिर्फ एक लिफ्ट के चालू होने से ओपीडी से लेकर वार्ड तक मरीजों और तीमारदारों की भीड़ लगी रहती है। मंगलवार को पुरानी बिल्डिंग से लेकर नई बिल्डिंग तक यही स्थिति देखने को मिली। मरीजों और उनके तीमारदारों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। तीमारदार इमरजेंसी से लेकर ड्यूटी कक्ष तक व्हील चेयर और स्ट्रेचर के लिए चक्कर लगाते रहे लेकिन समय पर सुविधा उपलब्ध नहीं हो सकी। मजबूर होकर कई मरीजों को परिजन सहारा देकर ले जाते नजर आए।
एक्स-रे कराने के लिए पैदल गईं दर्द से परेशान मरीज
मंगलवार सुबह 11:50 बजे पुरानी बिल्डिंग की गैलरी में जमुनिया निवासी 50 वर्षीय संगीता देवी बैठी थीं। उन्होंने बताया कि वह सुबह करीब 10 बजे अस्पताल पहुंची थीं। ओपीडी में चिकित्सक ने पैर का एक्स-रे कराने की सलाह दी। व्हील चेयर नहीं मिलने के कारण पैर में दर्द होने के बावजूद उन्हें पैदल ही एक्स-रे कक्ष तक जाना पड़ा। वहां 80 मरीजों का एक्स-रे जांच पूरा होने का हवाला देकर उन्हें लौटा दिया गया।
विज्ञापन
फर्श पर चादर बिछाकर दादी को लेटाया
दोपहर 12:05 बजे हाटा की शालिनी बर्नवाल अपनी दादी बादामी को लेकर इमरजेंसी पहुंचीं। वहां व्हील चेयर और स्ट्रेचर नहीं मिला। मजबूरी में उन्होंने हाथ और कंधे का सहारा देकर दादी को इमरजेंसी वार्ड के बाहर फर्श पर चादर बिछाकर लिटाया। इसके बाद भी स्ट्रेचर के लिए करीब एक घंटे तक भटकना पड़ा।
सीढ़ियों के सहारे उतरने को मजबूर मरीज
12:15 बजे ओपीडी में उपचार कराने के बाद सिधुआ मिश्रौली निवासी मधुरानी सीढ़ियों से रेलिंग के सहारे उतर रही थीं। उन्होंने बताया कि सीढ़ियों पर चढ़ने और उतरने में परेशानी होती है। यहां व्हील चेयर की सुविधा होनी चाहिए, लेकिन कोई इंतजाम नहीं है। गंभीर, बुजुर्ग और पैर से चलने में असमर्थ मरीजों के लिए अलग व्यवस्था की जानी चाहिए। वहीं, 12:20 बजे रामकोला क्षेत्र के चंदरपुर बरवा निवासी जवाहर शुक्ल प्लास्टर कराने के बाद सीढ़ियों से उतर रहे थे। उन्होंने बताया कि हड्डी रोग विभाग में प्लास्टर तो कर दिया गया लेकिन व्हील चेयर की व्यवस्था नहीं है। मजबूरी में बिना व्हील चेयर के सीढ़ियों से उतरना पड़ रहा है। उनका कहना था कि मरीजों की सुविधा को लेकर मेडिकल कॉलेज प्रशासन को गंभीरता से व्यवस्था करनी चाहिए।
मरीजों को समय पर व्हील चेयर और स्ट्रेचर उपलब्ध कराने के लिए निर्णय लिया गया है। मेडिकल कॉलेज के व्हील चेयर और स्ट्रेचर का इस्तेमाल अब डायलिसिस यूनिट में नहीं किया जाएगा। डायलिसिस यूनिट पीपीपी मॉडल पर संचालित है। इसलिए डायलिसिस यूनिट को अपने व्हील चेयर और स्ट्रेचर की व्यवस्था करनी होगी। इससे आ रही दिक्कत जल्द दूर हो जाएगी।
डाॅ. दिलीप कुमार, सीएमएस, मेडिकल कॉलेज कुशीनगर
विज्ञापन
मेडिकल कॉलेज की नई बिल्डिंग में आईसीयू से लेकर जनरल वार्ड तक आने-जाने के लिए दो लिफ्ट लगाई गई हैं। इनमें से एक लिफ्ट कई माह से बंद है। ऐसे में सिर्फ एक लिफ्ट के चालू होने से ओपीडी से लेकर वार्ड तक मरीजों और तीमारदारों की भीड़ लगी रहती है। मंगलवार को पुरानी बिल्डिंग से लेकर नई बिल्डिंग तक यही स्थिति देखने को मिली। मरीजों और उनके तीमारदारों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। तीमारदार इमरजेंसी से लेकर ड्यूटी कक्ष तक व्हील चेयर और स्ट्रेचर के लिए चक्कर लगाते रहे लेकिन समय पर सुविधा उपलब्ध नहीं हो सकी। मजबूर होकर कई मरीजों को परिजन सहारा देकर ले जाते नजर आए।
विज्ञापन
एक्स-रे कराने के लिए पैदल गईं दर्द से परेशान मरीज
मंगलवार सुबह 11:50 बजे पुरानी बिल्डिंग की गैलरी में जमुनिया निवासी 50 वर्षीय संगीता देवी बैठी थीं। उन्होंने बताया कि वह सुबह करीब 10 बजे अस्पताल पहुंची थीं। ओपीडी में चिकित्सक ने पैर का एक्स-रे कराने की सलाह दी। व्हील चेयर नहीं मिलने के कारण पैर में दर्द होने के बावजूद उन्हें पैदल ही एक्स-रे कक्ष तक जाना पड़ा। वहां 80 मरीजों का एक्स-रे जांच पूरा होने का हवाला देकर उन्हें लौटा दिया गया।
विज्ञापन
फर्श पर चादर बिछाकर दादी को लेटाया
दोपहर 12:05 बजे हाटा की शालिनी बर्नवाल अपनी दादी बादामी को लेकर इमरजेंसी पहुंचीं। वहां व्हील चेयर और स्ट्रेचर नहीं मिला। मजबूरी में उन्होंने हाथ और कंधे का सहारा देकर दादी को इमरजेंसी वार्ड के बाहर फर्श पर चादर बिछाकर लिटाया। इसके बाद भी स्ट्रेचर के लिए करीब एक घंटे तक भटकना पड़ा।
सीढ़ियों के सहारे उतरने को मजबूर मरीज
12:15 बजे ओपीडी में उपचार कराने के बाद सिधुआ मिश्रौली निवासी मधुरानी सीढ़ियों से रेलिंग के सहारे उतर रही थीं। उन्होंने बताया कि सीढ़ियों पर चढ़ने और उतरने में परेशानी होती है। यहां व्हील चेयर की सुविधा होनी चाहिए, लेकिन कोई इंतजाम नहीं है। गंभीर, बुजुर्ग और पैर से चलने में असमर्थ मरीजों के लिए अलग व्यवस्था की जानी चाहिए। वहीं, 12:20 बजे रामकोला क्षेत्र के चंदरपुर बरवा निवासी जवाहर शुक्ल प्लास्टर कराने के बाद सीढ़ियों से उतर रहे थे। उन्होंने बताया कि हड्डी रोग विभाग में प्लास्टर तो कर दिया गया लेकिन व्हील चेयर की व्यवस्था नहीं है। मजबूरी में बिना व्हील चेयर के सीढ़ियों से उतरना पड़ रहा है। उनका कहना था कि मरीजों की सुविधा को लेकर मेडिकल कॉलेज प्रशासन को गंभीरता से व्यवस्था करनी चाहिए।
मरीजों को समय पर व्हील चेयर और स्ट्रेचर उपलब्ध कराने के लिए निर्णय लिया गया है। मेडिकल कॉलेज के व्हील चेयर और स्ट्रेचर का इस्तेमाल अब डायलिसिस यूनिट में नहीं किया जाएगा। डायलिसिस यूनिट पीपीपी मॉडल पर संचालित है। इसलिए डायलिसिस यूनिट को अपने व्हील चेयर और स्ट्रेचर की व्यवस्था करनी होगी। इससे आ रही दिक्कत जल्द दूर हो जाएगी।
डाॅ. दिलीप कुमार, सीएमएस, मेडिकल कॉलेज कुशीनगर