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Kushinagar News: जुलाई में पीएम कर सकते हैं कृषि विश्वविद्यालय का शिलान्यास
Wed, 28 Jun 2023 11:29 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Wed, 28 Jun 2023 11:29 PM IST
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कैबिनेट में महात्मा बुद्ध कृषि विश्वविद्यालय के प्रस्ताव पर लगी मुहर
संवाद न्यूज एजेंसी
पडरौना। फरवरी माह में पेश हुए बजट में जिले में महात्मा बुद्ध कृषि विश्वविद्यालय की स्थापना की मंजूरी मिली थी। बुधवार को हुई बैठक में प्रदेश के कैबिनेट ने इसे मंजूरी दे दी है। अब कुशीनगर जिले में महात्मा बुद्ध कृषि विश्वविद्यालय की स्थापना का रास्ता साफ हो गया है। इसका शिलान्यास प्रधानमंत्री मोदी के हाथों जुलाई माह में होने की संभावना जताई जा रही है। एक कार्यक्रम के दौरान कृषि एवं कृषि अनुसंधान मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने भी इसके बारे में संकेत दिए हैं।
कुशीनगर समेत गोरखपुर व बस्ती मंडल के सभी सात जिलों में गन्ना, हल्दी व सब्जी की खेती बहुतायत में होती है। यह क्षेत्र कृषि का हब माना जाता है। ऐसे में अब शिक्षार्थियों को कृषि शिक्षा के लिए अन्यत्र नहीं जाना पड़ेगा। कुशीनगर जनपद में बहुत से लोग कृषि पर निर्भर हैं। जिले के सीमावर्ती क्षेत्र से जुड़े कई इलाके आज भी पिछड़े क्षेत्रों में शुमार है, लेकिन किसान इस पिछड़े क्षेत्र की धरती से भी सोना उगलवाने का दमखम रखते हैं।
यहां के किसान बालू के टीले पर सागौन उगाकर व लीक से हटकर खेती से यह साबित भी कर रहे हैं। गन्ना बहुलता वाला जिला मूल रूप से कृषि पर आधारित है। यहां के युवा कृषि पर शोध एवं शिक्षा के लिए दूर जाते रहते थे। मंगलवार की दोपहर अपर मुख्य सचिव कृषि एवं कृषि अनुसंधान डॉ. देवेश चतुर्वेदी के साथ डीएम रमेश रंजन ने गाजीपुर स्थित फार्म सहित तीन जगहों पर निरीक्षण कर कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्विद्यालय की संभावना तलाशी है। इसके एक दिन बाद ही प्रस्ताव पास होने से संभावना जताई जा रही है कि कुशीनगर की धरती अब विश्व पटल पर आगे बढ़ेगी।
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विश्वविद्यालय खुलने से यह होगा फायदा
- कृषि विश्वविद्यालय के अधीन हॉर्टिकल्चर, फाॅरेस्ट्री एवं अन्य विभागों के महाविद्यालय खुलेंगे।
- अलग-अलग जगहों पर स्नातक, स्नातकोत्तर की कक्षाएं और विद्यार्थी शोध करेंगे।
- कृषि विवि गन्ना अनुसंधान केंद्र के साथ मिलकर नई तकनीक व प्रजातियों को विकसित करेगा।
- विवि क्षेत्र विशेष की जरूरतों के अनुरूप विभिन्न फसलों के लिए कृषि तकनीक विकसित करेगा।
- जैविक खेती के साथ प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दिया जाएगा।
- विवि किसानों, पशुपालकों, कृषक महिलाओं तथा ग्रामीण युवाओं के लिए विभिन्न प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रमों का भी संचालन करेगा।
- कृषि एवं प्रौद्योगिकी विवि में शिक्षक व गैर शिक्षकों की कुल हजार भर्तियां होंगी।
कृषि विश्वविद्यालय के लिए 300 एकड़ भूमि की है जरूरत
डीडी कृषि आशीष कुमार ने बताया कि जिले में कृषि विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए 300 एकड़ भूमि की जरूरत है। इतनी अधिक भूमि एक स्थान पर नहीं है। इसे देखते हुए मंगलवार काे आए अपर मुख्य सचिव कृषि एवं कृषि अनुसंधान डॉ. देवेश चतुर्वेदी ने हरका स्थित रामपुर फार्म, कुशीनगर के मैत्रेय परियोजना और कृषि विज्ञान केंद्र सरगटिया का निरीक्षण किया है। इसका शिलान्यास भी शीघ्र किया जाना है, लेकिन इस संबंध में अभी कोई विभागीय पत्र नहीं मिला है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
पडरौना। फरवरी माह में पेश हुए बजट में जिले में महात्मा बुद्ध कृषि विश्वविद्यालय की स्थापना की मंजूरी मिली थी। बुधवार को हुई बैठक में प्रदेश के कैबिनेट ने इसे मंजूरी दे दी है। अब कुशीनगर जिले में महात्मा बुद्ध कृषि विश्वविद्यालय की स्थापना का रास्ता साफ हो गया है। इसका शिलान्यास प्रधानमंत्री मोदी के हाथों जुलाई माह में होने की संभावना जताई जा रही है। एक कार्यक्रम के दौरान कृषि एवं कृषि अनुसंधान मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने भी इसके बारे में संकेत दिए हैं।
कुशीनगर समेत गोरखपुर व बस्ती मंडल के सभी सात जिलों में गन्ना, हल्दी व सब्जी की खेती बहुतायत में होती है। यह क्षेत्र कृषि का हब माना जाता है। ऐसे में अब शिक्षार्थियों को कृषि शिक्षा के लिए अन्यत्र नहीं जाना पड़ेगा। कुशीनगर जनपद में बहुत से लोग कृषि पर निर्भर हैं। जिले के सीमावर्ती क्षेत्र से जुड़े कई इलाके आज भी पिछड़े क्षेत्रों में शुमार है, लेकिन किसान इस पिछड़े क्षेत्र की धरती से भी सोना उगलवाने का दमखम रखते हैं।
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यहां के किसान बालू के टीले पर सागौन उगाकर व लीक से हटकर खेती से यह साबित भी कर रहे हैं। गन्ना बहुलता वाला जिला मूल रूप से कृषि पर आधारित है। यहां के युवा कृषि पर शोध एवं शिक्षा के लिए दूर जाते रहते थे। मंगलवार की दोपहर अपर मुख्य सचिव कृषि एवं कृषि अनुसंधान डॉ. देवेश चतुर्वेदी के साथ डीएम रमेश रंजन ने गाजीपुर स्थित फार्म सहित तीन जगहों पर निरीक्षण कर कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्विद्यालय की संभावना तलाशी है। इसके एक दिन बाद ही प्रस्ताव पास होने से संभावना जताई जा रही है कि कुशीनगर की धरती अब विश्व पटल पर आगे बढ़ेगी।
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विश्वविद्यालय खुलने से यह होगा फायदा
- कृषि विश्वविद्यालय के अधीन हॉर्टिकल्चर, फाॅरेस्ट्री एवं अन्य विभागों के महाविद्यालय खुलेंगे।
- अलग-अलग जगहों पर स्नातक, स्नातकोत्तर की कक्षाएं और विद्यार्थी शोध करेंगे।
- कृषि विवि गन्ना अनुसंधान केंद्र के साथ मिलकर नई तकनीक व प्रजातियों को विकसित करेगा।
- विवि क्षेत्र विशेष की जरूरतों के अनुरूप विभिन्न फसलों के लिए कृषि तकनीक विकसित करेगा।
- जैविक खेती के साथ प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दिया जाएगा।
- विवि किसानों, पशुपालकों, कृषक महिलाओं तथा ग्रामीण युवाओं के लिए विभिन्न प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रमों का भी संचालन करेगा।
- कृषि एवं प्रौद्योगिकी विवि में शिक्षक व गैर शिक्षकों की कुल हजार भर्तियां होंगी।
कृषि विश्वविद्यालय के लिए 300 एकड़ भूमि की है जरूरत
डीडी कृषि आशीष कुमार ने बताया कि जिले में कृषि विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए 300 एकड़ भूमि की जरूरत है। इतनी अधिक भूमि एक स्थान पर नहीं है। इसे देखते हुए मंगलवार काे आए अपर मुख्य सचिव कृषि एवं कृषि अनुसंधान डॉ. देवेश चतुर्वेदी ने हरका स्थित रामपुर फार्म, कुशीनगर के मैत्रेय परियोजना और कृषि विज्ञान केंद्र सरगटिया का निरीक्षण किया है। इसका शिलान्यास भी शीघ्र किया जाना है, लेकिन इस संबंध में अभी कोई विभागीय पत्र नहीं मिला है।