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Kushinagar News: दो साल में ही टूटने लगा पडरौना-झुलनीपुर हाईवे...खतरा बढ़ा
Mon, 11 Aug 2025 01:29 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Mon, 11 Aug 2025 01:29 AM IST
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हरपुर गांव के पास बना रेनकट व सड़क से जाते राहगीर। संवाद
पडरौना/पकड़ियार बाजार। पडरौना शहर के बीच से गुजरा और गंडक नहर की पटरी पर बना नेपाल सीमा स्थित झुलनीपुर हाईवे दो वर्ष में ही टूटने लगा है। इसके निर्माण पर करीब 75 करोड़ रुपये खर्च हुए थे। इस टू-लेन सड़क का निर्माण करीब दो वर्ष पहले हुआ था। महराजगंज और नेपाल को जोड़ने वाली इस सड़क की समय पर देखरेख नहीं होने से कई जगह रैट होल बन गए हैं। इसकी वजह से सड़क कई जगह टूट चुकी है। इस सड़क के रात के समय टूटने पर जानकारी के अभाव में कई गांव में तबाही मच सकती है। इसे लेकर बड़ी गंडक नहर के किनारे बसे 500 से अधिक गांव व शहरवासियों को इसकी चिंता सताने लगी है।
नेपाल के त्रिवेणी स्थित वाल्मिकीनगर बैराज से निकली मुख्य पश्चिमी गंडक नहर झुलनीपुर के पास भारत की सीमा में प्रवेश करती है। इसके बाद चंदागुलभार, खड्डा, ढोरहा होते हुए पडरौना के रास्ते तमकुहीराज के आगे यह मुख्य पश्चिमी गंडक नहर बिहार के गोपालगंज जिले में प्रवेश करती है। नेपाल जाने के लिए बिहार और कुशीनगर के लोग पहले गोरखपुर के रास्ते सोनौली या खड्डा के रास्ते सिसवा बाजार होते हुए ठूठीबारी स्थित इंडो-नेपाल सीमा में प्रवेश को करते थे। इससे लोग अधिक समय के साथ किराए के नाम पर अधिक रुपये खर्च करते थे। वहीं पडरौना के रास्ते खड्डा और कप्तानगंज की तरफ से जाने वाले लोगों को पडरौना शहर में जाम की समस्या से परेशान होना पड़ता था। इस समयस्या को देखते हुए सांसद विजय कुमार दुबे ने वर्ष 2021 में प्रदेश के लोक निर्माण मंत्री व डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्या से मुख्य पश्चिमी गंडक नही की पटरी पर पडरौना से झुलनीपुर तक टू-लेन सड़क निर्माण कराने का प्रस्ताव दिया। सांसद का तर्क था कि इस सड़क का निर्माण होने के बाद नेपाल जाने वाले लोगों को करीब 20 किलोमीटर की दूरी कम होने के साथ खड्डा और कप्तागनंज की तरफ से वाले वाहनों को पडरौना शहर में लगने वाले जाम से भी निजात मिली जाएगी। यही नहीं महराजगंज व वाल्मिकीनगर तक आवागमन आसान होने के साथ कुशीनगर के लोगों को नेपाल की नेपाल यात्रा सुगम हो जाएगी। नेपाल के भी नागरिक अंतरराष्ट्रीय पर्यटन और अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट कुशीनगर बड़े आराम से आ-जा सकेंगे। नेपाल के लुंबिनी और कुशीनगर बौद्ध पर्यटन की दृष्टिकोण से भी यह मार्ग महत्वपूर्ण साबित होगा, जिससे पर्यटकों का सीधा जुड़ाव दो पर्यटन स्थल से हो जाएगा। सांसद के प्रस्ताव पर डिप्टी सीएम ने मंजूरी दी तो। 2022 में सड़क का निर्माण शुरू हुआ। करीब 75 किलोमीटर लंबी (पडरौना-झुलनीपुर) तक इस सड़क के निर्माण पर करीब 75.65 करोड़ रुपये खर्च किए गए, लेकिन सड़क निर्माण होने के करीब एक वर्ष बाद ही बढ़या फार्म और नंदन छपरा के पास इस मार्ग पर गढ्ढे बन गए। रोआरी और सेखुई मिश्री गांव के पास नहर की पटरी जगह-जगह दब गई है। उसका मरम्मत कराया गया। 23 अक्तूबर 2024 को नंदन छपरा गांव के सामने करीब पांच मीटर चौड़ा गड्ढा बन गया था। उसी जगह पर बीते जनवरी में भी गढ्ढे बन गए थे। बीते तीन अगस्त को भी नंदन छपरा गांव के सामने पुराने गढ्ढे के पास ही एक दूसरा बड़ा होल बन गया। गनीमत रहा कि इसकी जानकारी होने के बाद समय रहते उसकी मरम्मत हो गई। बार-बार गड्ढा बनने से गांव के लोगों की चिंता बढ़ गई है। लोगों का कहना है कि अबतक जब नहर की पटरी पर बनी सड़क टूटती है या गड्ढ़ा होता है तो दिन में पता चल गया है। अगर नहर का बांध रात में टूट जाए तो इसके किनारे बसे 10 से 12 गांव जलमग्न हो जाएंगे। करीब-करीब वर्ष भर नहर में पानी भरा रहता है, वहीं दूसरी तरफ 12 फीट गहरी खाई है। महराजगंज, बिहार, नेपाल के लिए सीधा मार्ग होने के चलते इस रास्ते छोटे बड़े वाहनों का आवागमन बढ़ गया है। ऐसे में एकाएक सड़क धंसने पर वाहन अनियंत्रित हुआ तो तेज रफ्तार से आने वाले वाहन या तो नहर में जाएंगे या गहरे गड्ढे में गिरेंगे। ऐसे में इस मार्ग पर बड़ी अनहोनी की आशंका बन गई है। गांव के फखरूद्दीन, आफताब, महेंद्र, बड़े अंसारी आदि ने कहा कि सड़क निर्माण के समय गुणवत्ता को लेकर आपत्ति जताई गई थी, लेकिन अधिकारियों ने उनकी शिकायत को नजरंदाज कर निर्माण करा दिया। निर्माण कार्य के दौरान हुई लापरवाही का परिणाम अब सामने आने लगा है। हर दिन मार्ग जगह-जगह धंस रहा है। इन लोगों ने कहा कि यदि समय रहते पूरे मार्ग की जांच कराकर समुचित मरम्मत नहीं कराई गई तो यह मार्ग किसी दिन बड़े हादसे का गवाह बन जाएगा।
रेनकट और रैट होल से नहर टूटी तो होगा बड़ा हादसा
गंडक नहर मार्ग के किनारे बने रेनकट और रैट होल से नहर के अस्तित्व पर खतरा मंडराने लगा है। ढोलहां, हरपुर, कोहरगड्डी, नंदन छपरा, बहोरछपरा, भज्जन छपरा, मदनपुर भेड़ियारी, सोहरौना आदि गांव के पास हुए रैट होला और रेन कट की वजह से सड़क के नीचे से मिट्टी कट गई है। इससे वहां बार-बार गढ्ढे बन जाते हैं। गंभीर बात तो यह है कि कई जगहों पर सड़क किराने बने रैट होल और रेन कट के उपर झाड़ियां उग आए हैं। ऐसे में किसी वाहन चालक से थोड़ी सी भी असावधानी हुई तो वह बड़े हादसे का शिकार बन सकता है। नहर मार्ग के बांधे टूट गए तो इन गांव में तो नहर का पानी भरेगा ही साथ ही सैकड़ों एकड़ में लगी धान और गन्ने की फसल नष्ट हो जाएगी।
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नेपाल के त्रिवेणी स्थित वाल्मिकीनगर बैराज से निकली मुख्य पश्चिमी गंडक नहर झुलनीपुर के पास भारत की सीमा में प्रवेश करती है। इसके बाद चंदागुलभार, खड्डा, ढोरहा होते हुए पडरौना के रास्ते तमकुहीराज के आगे यह मुख्य पश्चिमी गंडक नहर बिहार के गोपालगंज जिले में प्रवेश करती है। नेपाल जाने के लिए बिहार और कुशीनगर के लोग पहले गोरखपुर के रास्ते सोनौली या खड्डा के रास्ते सिसवा बाजार होते हुए ठूठीबारी स्थित इंडो-नेपाल सीमा में प्रवेश को करते थे। इससे लोग अधिक समय के साथ किराए के नाम पर अधिक रुपये खर्च करते थे। वहीं पडरौना के रास्ते खड्डा और कप्तानगंज की तरफ से जाने वाले लोगों को पडरौना शहर में जाम की समस्या से परेशान होना पड़ता था। इस समयस्या को देखते हुए सांसद विजय कुमार दुबे ने वर्ष 2021 में प्रदेश के लोक निर्माण मंत्री व डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्या से मुख्य पश्चिमी गंडक नही की पटरी पर पडरौना से झुलनीपुर तक टू-लेन सड़क निर्माण कराने का प्रस्ताव दिया। सांसद का तर्क था कि इस सड़क का निर्माण होने के बाद नेपाल जाने वाले लोगों को करीब 20 किलोमीटर की दूरी कम होने के साथ खड्डा और कप्तागनंज की तरफ से वाले वाहनों को पडरौना शहर में लगने वाले जाम से भी निजात मिली जाएगी। यही नहीं महराजगंज व वाल्मिकीनगर तक आवागमन आसान होने के साथ कुशीनगर के लोगों को नेपाल की नेपाल यात्रा सुगम हो जाएगी। नेपाल के भी नागरिक अंतरराष्ट्रीय पर्यटन और अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट कुशीनगर बड़े आराम से आ-जा सकेंगे। नेपाल के लुंबिनी और कुशीनगर बौद्ध पर्यटन की दृष्टिकोण से भी यह मार्ग महत्वपूर्ण साबित होगा, जिससे पर्यटकों का सीधा जुड़ाव दो पर्यटन स्थल से हो जाएगा। सांसद के प्रस्ताव पर डिप्टी सीएम ने मंजूरी दी तो। 2022 में सड़क का निर्माण शुरू हुआ। करीब 75 किलोमीटर लंबी (पडरौना-झुलनीपुर) तक इस सड़क के निर्माण पर करीब 75.65 करोड़ रुपये खर्च किए गए, लेकिन सड़क निर्माण होने के करीब एक वर्ष बाद ही बढ़या फार्म और नंदन छपरा के पास इस मार्ग पर गढ्ढे बन गए। रोआरी और सेखुई मिश्री गांव के पास नहर की पटरी जगह-जगह दब गई है। उसका मरम्मत कराया गया। 23 अक्तूबर 2024 को नंदन छपरा गांव के सामने करीब पांच मीटर चौड़ा गड्ढा बन गया था। उसी जगह पर बीते जनवरी में भी गढ्ढे बन गए थे। बीते तीन अगस्त को भी नंदन छपरा गांव के सामने पुराने गढ्ढे के पास ही एक दूसरा बड़ा होल बन गया। गनीमत रहा कि इसकी जानकारी होने के बाद समय रहते उसकी मरम्मत हो गई। बार-बार गड्ढा बनने से गांव के लोगों की चिंता बढ़ गई है। लोगों का कहना है कि अबतक जब नहर की पटरी पर बनी सड़क टूटती है या गड्ढ़ा होता है तो दिन में पता चल गया है। अगर नहर का बांध रात में टूट जाए तो इसके किनारे बसे 10 से 12 गांव जलमग्न हो जाएंगे। करीब-करीब वर्ष भर नहर में पानी भरा रहता है, वहीं दूसरी तरफ 12 फीट गहरी खाई है। महराजगंज, बिहार, नेपाल के लिए सीधा मार्ग होने के चलते इस रास्ते छोटे बड़े वाहनों का आवागमन बढ़ गया है। ऐसे में एकाएक सड़क धंसने पर वाहन अनियंत्रित हुआ तो तेज रफ्तार से आने वाले वाहन या तो नहर में जाएंगे या गहरे गड्ढे में गिरेंगे। ऐसे में इस मार्ग पर बड़ी अनहोनी की आशंका बन गई है। गांव के फखरूद्दीन, आफताब, महेंद्र, बड़े अंसारी आदि ने कहा कि सड़क निर्माण के समय गुणवत्ता को लेकर आपत्ति जताई गई थी, लेकिन अधिकारियों ने उनकी शिकायत को नजरंदाज कर निर्माण करा दिया। निर्माण कार्य के दौरान हुई लापरवाही का परिणाम अब सामने आने लगा है। हर दिन मार्ग जगह-जगह धंस रहा है। इन लोगों ने कहा कि यदि समय रहते पूरे मार्ग की जांच कराकर समुचित मरम्मत नहीं कराई गई तो यह मार्ग किसी दिन बड़े हादसे का गवाह बन जाएगा।
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रेनकट और रैट होल से नहर टूटी तो होगा बड़ा हादसा
गंडक नहर मार्ग के किनारे बने रेनकट और रैट होल से नहर के अस्तित्व पर खतरा मंडराने लगा है। ढोलहां, हरपुर, कोहरगड्डी, नंदन छपरा, बहोरछपरा, भज्जन छपरा, मदनपुर भेड़ियारी, सोहरौना आदि गांव के पास हुए रैट होला और रेन कट की वजह से सड़क के नीचे से मिट्टी कट गई है। इससे वहां बार-बार गढ्ढे बन जाते हैं। गंभीर बात तो यह है कि कई जगहों पर सड़क किराने बने रैट होल और रेन कट के उपर झाड़ियां उग आए हैं। ऐसे में किसी वाहन चालक से थोड़ी सी भी असावधानी हुई तो वह बड़े हादसे का शिकार बन सकता है। नहर मार्ग के बांधे टूट गए तो इन गांव में तो नहर का पानी भरेगा ही साथ ही सैकड़ों एकड़ में लगी धान और गन्ने की फसल नष्ट हो जाएगी।
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