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Kushinagar News: बांकखास के ग्राम प्रधान और तत्कालीन सचिव से वसूली का आदेश
Wed, 22 Apr 2026 12:38 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Wed, 22 Apr 2026 12:38 AM IST
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पडरौना। शिकायत के आधार पर हुई विभागीय जांच में सेवरही ब्लॉक की ग्राम पंचायत बांकखास में दुकान से किराया वसूली में अनियमितता और सरकारी धन के दुरुपयोग की पुष्टि हुई है। जांच में आरोप सही मिलने पर डीएम ने ग्राम प्रधान गायत्री देवी व तत्कालीन सचिव के खिलाफ वसूली का आदेश जारी किया है।
गांव के गोविंद यादव ने डीएम को शिकायती पत्र देकर जांच की मांग की थी। डीएम महेंद्र सिंह तंवर ने शिकायत की जांच के लिए डीपीआरओ व जिला लेखा परीक्षा अधिकारी को जांच अधिकारी नामित कर रिपोर्ट देने के निर्देश दिए थे। जांच में पता चला कि जून 2021 से जुलाई 2025 तक 43 दुकानों से प्रति माह 600 रुपये के हिसाब से कुल 12.64 लाख रुपये की वसूली होनी चाहिए थी, लेकिन ग्राम निधि व ओएसआर खाते में मात्र 3.003 लाख रुपये ही जमा किए गए। शेष 9.63 लाख रुपये का कोई हिसाब नहीं मिला।
जांच रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया कि किराया वसूली से संबंधित रजिस्टर प्रस्तुत नहीं किए गए और न ही पंचायत की ओर से किसी को अधिकृत किया गया था। इसके साथ ही किराया वृद्धि या वसूली से संबंधित कोई वैध प्रस्ताव भी उपलब्ध नहीं कराया गया। ग्राम प्रधान ने अपने स्पष्टीकरण में दुकानों के निर्माण पर करीब 5.51 लाख रुपये खर्च करने की बात कही, लेकिन प्रस्तुत प्राक्कलन पर आवश्यक अधिकारियों के हस्ताक्षर नहीं पाए गए। जांच में यह भी तथ्य सामने आया कि ग्राम पंचायत की कार्रवाई जांच के बाद जल्दबाजी में तैयार की गई। इस मामले को गंभीर मानते हुए कुल गबन की गई 9,63,900 रुपये धनराशि में से आधी धनराशि ग्राम प्रधान व तत्कालीन सचिव से वसूलने के डीएम ने आदेश दिया है। डीएम ने संबंधित ग्राम प्रधान और सचिव को एक माह के भीतर गबन की धनराशि ग्राम पंचायत के ओएसआर खाते में जमा कर उसकी रसीद जिला पंचायत राज अधिकारी को प्रस्तुत करने का निर्देश दिए हैं।
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गांव के गोविंद यादव ने डीएम को शिकायती पत्र देकर जांच की मांग की थी। डीएम महेंद्र सिंह तंवर ने शिकायत की जांच के लिए डीपीआरओ व जिला लेखा परीक्षा अधिकारी को जांच अधिकारी नामित कर रिपोर्ट देने के निर्देश दिए थे। जांच में पता चला कि जून 2021 से जुलाई 2025 तक 43 दुकानों से प्रति माह 600 रुपये के हिसाब से कुल 12.64 लाख रुपये की वसूली होनी चाहिए थी, लेकिन ग्राम निधि व ओएसआर खाते में मात्र 3.003 लाख रुपये ही जमा किए गए। शेष 9.63 लाख रुपये का कोई हिसाब नहीं मिला।
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जांच रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया कि किराया वसूली से संबंधित रजिस्टर प्रस्तुत नहीं किए गए और न ही पंचायत की ओर से किसी को अधिकृत किया गया था। इसके साथ ही किराया वृद्धि या वसूली से संबंधित कोई वैध प्रस्ताव भी उपलब्ध नहीं कराया गया। ग्राम प्रधान ने अपने स्पष्टीकरण में दुकानों के निर्माण पर करीब 5.51 लाख रुपये खर्च करने की बात कही, लेकिन प्रस्तुत प्राक्कलन पर आवश्यक अधिकारियों के हस्ताक्षर नहीं पाए गए। जांच में यह भी तथ्य सामने आया कि ग्राम पंचायत की कार्रवाई जांच के बाद जल्दबाजी में तैयार की गई। इस मामले को गंभीर मानते हुए कुल गबन की गई 9,63,900 रुपये धनराशि में से आधी धनराशि ग्राम प्रधान व तत्कालीन सचिव से वसूलने के डीएम ने आदेश दिया है। डीएम ने संबंधित ग्राम प्रधान और सचिव को एक माह के भीतर गबन की धनराशि ग्राम पंचायत के ओएसआर खाते में जमा कर उसकी रसीद जिला पंचायत राज अधिकारी को प्रस्तुत करने का निर्देश दिए हैं।
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