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ओवरहेड टैंक का सिर्फ ढांचा ही तैयार, प्यास बुझाने में विफल
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ओवरहेड टैंक का सिर्फ ढांचा ही तैयार, प्यास बुझाने में विफल
कई स्थानों पर टेस्टिंग के दौरान फट गई पाइप, बंद हो गई आपूर्ति
इंसेफेलाइटिस प्रभावित जनपद में शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के लिए बनाए गए थे ओवरहेड टैंक
संवाद न्यूज एजेंसी
कुशीनगर। जिले के मासूमों को इंसेफेलाइटिस से बचाने और स्वच्छ पेयजल के लिए बनाए गए कई ओवरहेड टैंकों से अब तक पानी की आपूर्ति शुरू नहीं हो सकी है। कहीं पाइप लाइन बिछाने के बाद टेस्टिंग के दौरान पाइप फट गई तो कहीं किन्हीं कारणों से पेयजल की आपूर्ति शुरू नहीं हो सकी। ऐसे में लोगों को शुद्ध पेयजल नहीं मिल पा रहा है।
50 हजार से अधिक आबादी को नहीं मिल रहा ओवरहेड टैंक से पानी
दुदही। क्षेत्र के बांसगांव में 50 हजार से अधिक आबादी को शुद्ध पेयजल आपूर्ति करने के लिए बना ओवरहेड टैंक लोगों के लिए बेकार साबित हो रहा है। वॉल की खराबी और जगह-जगह पाइप फट जाने से करीब एक वर्ष से पानी की आपूर्ति नहीं हो रही है। गांव के लोगों ने पाइप की मरम्मत कराने की मांग की है। एक सप्ताह में कार्य पूर्ण नहीं होने पर धरना-प्रदर्शन करने की चेतावनी दी है।
बांसगांव 30 पुरवों में बंटा है। जटवलिया टोला में वर्ष 2009 में 750 लाख लीटर पानी की क्षमता वाला ओवरहेड टैंक बनाया गया है। इससे 15 से अधिक पुरवे खाखड़ टोला, गिदहवा, जटवलिया, खरसाल, तिलंगवापट्टी, सरगटिया, घूरपट्टी, खैरवा, बैरिया, नैनहा में पाइप बिछाई गई है। पानी की आपूर्ति के दौरान ही पाइप जगह-जगह फट गई। इसका वॉल और मोटर भी खराब होने से पानी की आपूर्ति नहीं हो रही है। बम बहादुर, दिनेश गुप्ता, पवन कुशवाहा, हरिलाल प्रसाद, राधेश्याम रौनियार, सत्यनारायण गुप्ता, रवि कुमार, हासन अंसारी, रमाशंकर गुप्ता, श्रीराम बरनवाल आदि ने पानी की आपूर्ति शुरू कराने की मांग की है। जेई रितेश यादव का कहना है कि कुछ खराबी आई थी। मरम्मत के बाद पानी की आपूर्ति शुरू करा दी जाएगी।
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टैंक बन गया, ग्रामीणों को नहीं मिलता शुद्ध पानी
पकड़ियार बाजार। नेबुआ नौरंगिया क्षेत्र के महुअवा गांव में वर्ष 2004 में एक करोड़ 82 लाख रुपये की लागत से बने ओवरहेड टैंक से पानी की आपूर्ति शुरू नहीं हो सकी है। शुरुआत में एक वर्ष तक जलापूर्ति हुई, लेकिन बाद में पाइप ध्वस्त हो जाने के कारण आपूर्ति बंद कर दी गई। नीर निर्मल परियोजना के तहत ग्राम सभा कुर्मीपट्टी में करीब दो करोड़ 16 लाख रुपये की लागत से वर्ष 2016 में पानी की टंकी और पंप हाउस का निर्माण कराया गया था। पूरे गांव में पाइप लाइन बिछाई गई थी। जगह-जगह पर पानी भरने के लिए वाटर पोस्ट भी बनाए गए। करीब एक साल तक पानी की आपूर्ति हुई, लेकिन बाद में बंद कर दी गई। ग्राम पंचायत मड़ार बिंदवलिया के मलाहीपट्टी टोला में करीब आठ करोड़ की लागत से वर्ष 2012 में बने टैंक से जुड़ी पाइप भी क्षतिग्रस्त हो जाने से पानी की आपूर्ति नहीं हो पा रही है। गांव के सुभाष और विनोद का कहना है कि हर सप्ताह सिर्फ मरम्मत होती है, लेकिन पानी की आपूर्ति नहीं होती। ग्राम पंचायत सेखुई खास में भी वर्ष 2014 में दो करोड़ 16 लाख रुपये की लागत से बना टैंक बेमतलब साबित हो रहा है। पकड़ियार बाजार में वर्ष 2014 में एक करोड़ 46 लाख रुपये की लागत से ओवरहेड टैंक का निर्माण हुआ, लेकिन पंपहाउस और पाइपलाइन बिछाने का काम पूरा नहीं हो सका। गांव के सगीर अंसारी, उमा, शंभू का कहना है कि पाइप फटने से पानी की आपूर्ति बाधित है। ग्राम पंचायत हरपुर माफी के हरिकेशवा टोला में भी वर्ष 2014 में एक करोड़ 48 लाख रुपये की लागत से बने टैंक से पानी की आपूर्ति नहीं हो रही है। कमोबेश यही हाल क्षेत्र के अन्य ओवरहेड टैंकों का भी है।
टेस्टिंग के दौरान ही फट गई पाइप
जौरा बाजार। फाजिलनगर क्षेत्र के जौरा बाजार गांव के गोविंद टोला में बना ओवरहेड टैंक टेस्टिंग के दौरान ही जवाब दे गया। उसके बाद उसे ठीक कराने की तरफ ध्यान नहीं दिया गया। ग्रामीणों का कहना है कि जब भी ओवरहेड टैंक में पानी भरा जाता है तो चारों तरफ फव्वारा निकलने लगता है। ऐसी दशा में आसपास मौजूद लोगों को वहां से हटना पड़ता है। जल निगम के जेई अभय पटेल ने कहा कि उन लोगों के पास ओवरहेड टैंक के रखरखाव के लिए रकम नहीं है।
वर्जन-
बांसगांव में ओवरहेड टैंक का काम चल रहा है। अभी एक-दो महीने में पूरा हो पाएगा। मड़ार बिंदवलिया की परियोजना पुुरानी हो गई है। इस परियोजना का पुनर्गठन किया जाना है। उससे शासन को अवगत कराया जाएगा। अन्य परियोजनाओं की स्थिति की जांच कराकर उन्हें ठीक कराया जाएगा।
अनुराग गौतम, एक्सईएन, जल निगम (ग्रामीण)
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कई स्थानों पर टेस्टिंग के दौरान फट गई पाइप, बंद हो गई आपूर्ति
इंसेफेलाइटिस प्रभावित जनपद में शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के लिए बनाए गए थे ओवरहेड टैंक
संवाद न्यूज एजेंसी
कुशीनगर। जिले के मासूमों को इंसेफेलाइटिस से बचाने और स्वच्छ पेयजल के लिए बनाए गए कई ओवरहेड टैंकों से अब तक पानी की आपूर्ति शुरू नहीं हो सकी है। कहीं पाइप लाइन बिछाने के बाद टेस्टिंग के दौरान पाइप फट गई तो कहीं किन्हीं कारणों से पेयजल की आपूर्ति शुरू नहीं हो सकी। ऐसे में लोगों को शुद्ध पेयजल नहीं मिल पा रहा है।
50 हजार से अधिक आबादी को नहीं मिल रहा ओवरहेड टैंक से पानी
दुदही। क्षेत्र के बांसगांव में 50 हजार से अधिक आबादी को शुद्ध पेयजल आपूर्ति करने के लिए बना ओवरहेड टैंक लोगों के लिए बेकार साबित हो रहा है। वॉल की खराबी और जगह-जगह पाइप फट जाने से करीब एक वर्ष से पानी की आपूर्ति नहीं हो रही है। गांव के लोगों ने पाइप की मरम्मत कराने की मांग की है। एक सप्ताह में कार्य पूर्ण नहीं होने पर धरना-प्रदर्शन करने की चेतावनी दी है।
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बांसगांव 30 पुरवों में बंटा है। जटवलिया टोला में वर्ष 2009 में 750 लाख लीटर पानी की क्षमता वाला ओवरहेड टैंक बनाया गया है। इससे 15 से अधिक पुरवे खाखड़ टोला, गिदहवा, जटवलिया, खरसाल, तिलंगवापट्टी, सरगटिया, घूरपट्टी, खैरवा, बैरिया, नैनहा में पाइप बिछाई गई है। पानी की आपूर्ति के दौरान ही पाइप जगह-जगह फट गई। इसका वॉल और मोटर भी खराब होने से पानी की आपूर्ति नहीं हो रही है। बम बहादुर, दिनेश गुप्ता, पवन कुशवाहा, हरिलाल प्रसाद, राधेश्याम रौनियार, सत्यनारायण गुप्ता, रवि कुमार, हासन अंसारी, रमाशंकर गुप्ता, श्रीराम बरनवाल आदि ने पानी की आपूर्ति शुरू कराने की मांग की है। जेई रितेश यादव का कहना है कि कुछ खराबी आई थी। मरम्मत के बाद पानी की आपूर्ति शुरू करा दी जाएगी।
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टैंक बन गया, ग्रामीणों को नहीं मिलता शुद्ध पानी
पकड़ियार बाजार। नेबुआ नौरंगिया क्षेत्र के महुअवा गांव में वर्ष 2004 में एक करोड़ 82 लाख रुपये की लागत से बने ओवरहेड टैंक से पानी की आपूर्ति शुरू नहीं हो सकी है। शुरुआत में एक वर्ष तक जलापूर्ति हुई, लेकिन बाद में पाइप ध्वस्त हो जाने के कारण आपूर्ति बंद कर दी गई। नीर निर्मल परियोजना के तहत ग्राम सभा कुर्मीपट्टी में करीब दो करोड़ 16 लाख रुपये की लागत से वर्ष 2016 में पानी की टंकी और पंप हाउस का निर्माण कराया गया था। पूरे गांव में पाइप लाइन बिछाई गई थी। जगह-जगह पर पानी भरने के लिए वाटर पोस्ट भी बनाए गए। करीब एक साल तक पानी की आपूर्ति हुई, लेकिन बाद में बंद कर दी गई। ग्राम पंचायत मड़ार बिंदवलिया के मलाहीपट्टी टोला में करीब आठ करोड़ की लागत से वर्ष 2012 में बने टैंक से जुड़ी पाइप भी क्षतिग्रस्त हो जाने से पानी की आपूर्ति नहीं हो पा रही है। गांव के सुभाष और विनोद का कहना है कि हर सप्ताह सिर्फ मरम्मत होती है, लेकिन पानी की आपूर्ति नहीं होती। ग्राम पंचायत सेखुई खास में भी वर्ष 2014 में दो करोड़ 16 लाख रुपये की लागत से बना टैंक बेमतलब साबित हो रहा है। पकड़ियार बाजार में वर्ष 2014 में एक करोड़ 46 लाख रुपये की लागत से ओवरहेड टैंक का निर्माण हुआ, लेकिन पंपहाउस और पाइपलाइन बिछाने का काम पूरा नहीं हो सका। गांव के सगीर अंसारी, उमा, शंभू का कहना है कि पाइप फटने से पानी की आपूर्ति बाधित है। ग्राम पंचायत हरपुर माफी के हरिकेशवा टोला में भी वर्ष 2014 में एक करोड़ 48 लाख रुपये की लागत से बने टैंक से पानी की आपूर्ति नहीं हो रही है। कमोबेश यही हाल क्षेत्र के अन्य ओवरहेड टैंकों का भी है।
टेस्टिंग के दौरान ही फट गई पाइप
जौरा बाजार। फाजिलनगर क्षेत्र के जौरा बाजार गांव के गोविंद टोला में बना ओवरहेड टैंक टेस्टिंग के दौरान ही जवाब दे गया। उसके बाद उसे ठीक कराने की तरफ ध्यान नहीं दिया गया। ग्रामीणों का कहना है कि जब भी ओवरहेड टैंक में पानी भरा जाता है तो चारों तरफ फव्वारा निकलने लगता है। ऐसी दशा में आसपास मौजूद लोगों को वहां से हटना पड़ता है। जल निगम के जेई अभय पटेल ने कहा कि उन लोगों के पास ओवरहेड टैंक के रखरखाव के लिए रकम नहीं है।
वर्जन-
बांसगांव में ओवरहेड टैंक का काम चल रहा है। अभी एक-दो महीने में पूरा हो पाएगा। मड़ार बिंदवलिया की परियोजना पुुरानी हो गई है। इस परियोजना का पुनर्गठन किया जाना है। उससे शासन को अवगत कराया जाएगा। अन्य परियोजनाओं की स्थिति की जांच कराकर उन्हें ठीक कराया जाएगा।
अनुराग गौतम, एक्सईएन, जल निगम (ग्रामीण)