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अस्पताल पड़ताल--
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रात के समय मरीजों को जलानी पड़ती है मोमबत्ती
हाटा। तहसील क्षेत्र के सुकरौली पीएचसी में बिजली का इंतजाम पर्याप्त नहीं है। इसके चलते प्रसव केंद्र पर रात में बिजली नहीं होने पर प्रसूताएं मोमबत्ती के सहारे रात गुजारती हैं। अस्पताल परिसर में शुद्ध पेयजल की व्यवस्था नहीं होने से यहां इलाज कराने आने वाले मरीजों को पेयजल के लिए परेशानी उठानी पड़ती है।
सुकरौली पीएचसी में शुक्रवार को 140 मरीजों की ओपीडी हुई। इसमें 27 मरीजों का अस्पताल के ब्लड जांच केंद्र पर जांच हुआ। टीबी के दो रोगियों को दवा वितरित की गई। अस्पताल में दो डॉक्टर, एक नेत्र चिकित्सक, एक एलटी, एक फार्मासिस्ट, दो वार्ड ब्वाय और एक महिला चिकित्सक की तैनाती है। शुक्रवार को सभी स्वास्थ्य कर्मी मौजूद थे। अस्पताल में सबसे बड़ी समस्या जर्जर भवन और बिजली की है। दिन के समय तो काम चल जाता है। लेकिन रात में मोमबत्ती के सहारे प्रसूताओं को रात गुजारनी पड़ती है। विभाग की ओर से जनरेटर की मांग कई बार की गई लेकिन, अस्पताल में जनरेटर उपलब्ध कराने की दिशा में कोई विभाग की तरफ से कोई सकारात्मक पहल नहीं हुई। अस्पताल परिसर में शुद्ध पेयजल का भी अभाव है जिससे लोग बाहर से पानी खरीद कर पीते हैं। क्योंकि अस्पताल परिसर में लगे इंडिया मार्का हैंडपंप दूषित पानी देता है।
इस संबंध में केंद्र प्रभारी डॉ. स्वप्निल श्रीवास्तव ने कहा कि कुछ दिन पहले ही उन्हें चार्ज मिला है। जनहित की सुविधाओं को उपलब्ध कराना हमारी प्राथमिकता है। शीघ्र ही इन समस्याओं के निराकरण के लिए उच्चाधिकारियों को अवगत कराकर समाधान कराई जाएगी।
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हाटा। तहसील क्षेत्र के सुकरौली पीएचसी में बिजली का इंतजाम पर्याप्त नहीं है। इसके चलते प्रसव केंद्र पर रात में बिजली नहीं होने पर प्रसूताएं मोमबत्ती के सहारे रात गुजारती हैं। अस्पताल परिसर में शुद्ध पेयजल की व्यवस्था नहीं होने से यहां इलाज कराने आने वाले मरीजों को पेयजल के लिए परेशानी उठानी पड़ती है।
सुकरौली पीएचसी में शुक्रवार को 140 मरीजों की ओपीडी हुई। इसमें 27 मरीजों का अस्पताल के ब्लड जांच केंद्र पर जांच हुआ। टीबी के दो रोगियों को दवा वितरित की गई। अस्पताल में दो डॉक्टर, एक नेत्र चिकित्सक, एक एलटी, एक फार्मासिस्ट, दो वार्ड ब्वाय और एक महिला चिकित्सक की तैनाती है। शुक्रवार को सभी स्वास्थ्य कर्मी मौजूद थे। अस्पताल में सबसे बड़ी समस्या जर्जर भवन और बिजली की है। दिन के समय तो काम चल जाता है। लेकिन रात में मोमबत्ती के सहारे प्रसूताओं को रात गुजारनी पड़ती है। विभाग की ओर से जनरेटर की मांग कई बार की गई लेकिन, अस्पताल में जनरेटर उपलब्ध कराने की दिशा में कोई विभाग की तरफ से कोई सकारात्मक पहल नहीं हुई। अस्पताल परिसर में शुद्ध पेयजल का भी अभाव है जिससे लोग बाहर से पानी खरीद कर पीते हैं। क्योंकि अस्पताल परिसर में लगे इंडिया मार्का हैंडपंप दूषित पानी देता है।
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इस संबंध में केंद्र प्रभारी डॉ. स्वप्निल श्रीवास्तव ने कहा कि कुछ दिन पहले ही उन्हें चार्ज मिला है। जनहित की सुविधाओं को उपलब्ध कराना हमारी प्राथमिकता है। शीघ्र ही इन समस्याओं के निराकरण के लिए उच्चाधिकारियों को अवगत कराकर समाधान कराई जाएगी।
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