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Kushinagar News: नेपाल में भूस्खलन के बाद काली पड़ी नारायणी नदी, किनारे पर पहुंच रहीं मछलियां

Wed, 14 Oct 2026 01:37 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Wed, 14 Oct 2026 01:37 AM IST
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Narayani River turns black following landslide in Nepal; fish washing up on the banks.
अहिरौली दान में कटान की वजह से गंडक नदी बह रही मटमैला पानी । 
नेपाल के गोरखा जिले में 11 अक्तूबर 2026 को ऊपरी पहाड़ी क्षेत्र में हुआ था भूस्खलन
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नदी की मछलियां आ गईं किनारे पर, पानी में बह रहा है कीचड़, जलीय जीवों पर खतरा
तरयासुजान। नेपाल के गोरखा जिले में 11 अक्तूबर 2026 को ऊपरी पहाड़ी क्षेत्र में भूस्खलन हुआ था। भूस्खलन के मलबे की वजह से नारायणी नदी (गंडक) का पानी अत्यधिक मटमैला और दूषित हो गया है। नदी में मिट्टी, गाद और मलबे की भारी मात्रा मिलने से पानी में ऑक्सीजन स्तर घटने आशंका जताई जा रही है। इससे चलते नदी का जलीय पारिस्थितिकी तंत्र प्रभावित हुआ है।
मंगलवार की सुबह तरयासुजान क्षेत्र के अहिरौलीदान में नारायणी नदी का पानी मटमैला और काला दिखाई दिया। इसकी वजह भूस्खलन के चलते नदी के पानी में काली मिट्टी का घुलना बताया जा रहा है। तटवर्ती इलाके के लोगों को कहना है कि नदी के पानी से दुर्गंध आ रही है। पानी मटमैला और काला हो गया है और ऑक्सीजन स्तर के कम होने की आशंका जताई जा रही है। ऐसे में मछलियां नदी के किनारे पहुंच रही हैं। मुन्ना सिंह, सुरेंद्र सिंह, रामनाथ सिंह,मनउर अंसारी, बीरेंद्र सिंह ने बताया कि रात से नदी का पानी मैला व काला आ रहा है। मछलियां नदी के किनारे आ रही है, शिकारियों की भीड़ जुट रही है,मछली पानी के अंदर भाग नहीं पा रही है। पिछले बार नेपाल में आई त्रासदी में नदी का पानी काला नहीं हुआ था,सिर्फ सामान बह कर आ रहा था।
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खैरखूंटा में कटान हुई तेज
नारायणी नदी में पानी कम होने के बावजूद खैरखूंटा गांव के सामने तेज धारा के चलते कटान जारी है। नोनियापट्टी के सामने नदी में काफी सिल्ट जमा हो गया है। इसके चलते यहां पर नदी दो पाटों में बंट रही है। ऐसे में नदी की एक धारा खैरखूंटा गांव के पास तटबंध से टकरा रही है। जारी कटान के चलते 24 घंटे में करीब चार से पांच मीटर हिस्सा नदी में समा गया है। इससे किसानों में दहशत का माहौल है। तटबंधों के किनारे रहने वाले लोगों का कहना है कि कटान की रफ्तार को कम करने के लिए बोल्डर व जियो बैग डाले जा रहे हैं लेकिन तेज धारा के चलते जियो बैग व बोल्डर पानी के साथ बह जा रहे हैं। खैरखूंटा टोला, नोनियापट्टी और बाघाचौर के लोगों ने प्रशासन से कटान रोकने के लिए स्थायी ठोकर का निर्माण कराया जाने की मांग की है।
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कोट
नदी में कटान स्थलों को लेकर लगातार निगरानी किया जा रहा है। बोल्डर व जियो बैग पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है। तटबंध के किनारे मौजूदा समय में कोई खतरा नहीं है। जिम्मेदार विभागीय कर्मियों की ओर से भ्रमण कर हालात का जायजा लिया जा रहा है। नेपाल में हाल ही में आए उफान से पानी का रंग काला व मैला हुआ है।
-महेश कुमार सिंह,एक्सईएन, बाढ़ खंड कुशीनगर
नेपाल में भूस्खलन के कारण नारायणी नदी में अचानक भारी मात्रा में मिट्टी, गाद और चट्टानी मलबा मिल गया है। पानी में इस अत्यधिक गंदगी के कारण मछलियों के गलफड़े बंद हो जाते हैं और वे सांस नहीं ले पाती हैं। मलबे के कारण पानी में घुलित ऑक्सीजन का स्तर अचानक गिर जाता है। इसी वजह से मछलियां हांफते हुए व बेहोशी की हालत में पानी की सतह और नदी के किनारों की तरफ भागतीं हैं। वहीं तेज बहाव के चलते चोटिल होने और मैदानी पर्यावरण में आने के कारण इनमें से अधिकांश मछलियां तो रास्ते में दम तोड़ देती हैं।

- डॉ. ज्ञानेश सिंह, एसोसिएट प्रोफेसर, भूगोल विभाग बुद्ध पीजी कॉलेज कुशीनगर
नदियों के तटबंधों के किनारे लोगों ने आवास बना लिए हैं। इसमें छोटे-छोटे कस्बे बस गए हैं। नदियों का पानी पहले बरसात के मौसम में चारों तरफ फैल जाता था, अब वह ऐसा नहीं हो पा रहा है। इनके मार्ग में इन कस्बों के पड़ने के चलते भारी जान-माल की क्षति भी हो रही है। ये कहना कि पहले इस तरह की घटनाएं नहीं होती थीं, अब अधिक हो रही हैं। यह सर्वथा गलत है। क्योंकि नदियों के मार्ग को रोकेंगे तो इस तरह के घटनाओं के लिए तैयार भी रहना होगा।

- डॉ. संजय सिंह, विभागाध्यक्ष, भूगोल विभाग, उदित नारायण पीजी कॉलेज पडरौना

गंडक बराज के 36 फाटक खुले, गाद से जलीय संकट
खड्डा। नेपाल में हुई जल प्रलय के बाद गंडक नदी में भारी मात्रा में काले रंग का मलबा और गादयुक्त पानी आ गया है। इस गाद और कचरे को बाहर निकालने के लिए वाल्मीकिनगर बराज के सभी 36 फाटक खोल दिए गए हैं। नदी में निर्बाध प्रवाह के जरिये गाद-कचरे को आगे बहाकर पानी साफ करने की प्रक्रिया अपनाई जा रही है। खड्डा क्षेत्र से गुजरने वाली नदी में कई जगह इस तरह का पानी बहता हुआ दिखाई दिया। मुख्य पश्चिमी गंडक नहर में सोमवार को करीब 4,000 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा था। गादयुक्त पानी को नहर में जाने से रोकने के लिए सोमवार रात आठ बजे इसकी आपूर्ति बंद कर दी गई। मंगलवार रात आठ बजे वाल्मीकिनगर बराज से गंडक नदी में 69,200 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा था।
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