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सब्जबाग दिखाकर छले गए मुसलमान: डॉ. अयूब
kushinagar
Updated Tue, 27 Sep 2016 11:50 PM IST
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राजनीितति
- फोटो : santosh verma
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पडरौना।
मुसलमानों और अन्य पिछड़ी जातियों के लोगों को नौकरी, शिक्षा, सुरक्षा और सुविधाएं दिलाने का सब्जबाग दिखाकर कांग्रेस, भाजपा और सपा सत्ता में आती रहीं, लेकिन उसके बाद इन जातियों का नहीं बल्कि अगड़ी जातियों और खुद का हित साधती रहीं। मुसलमान, मौर्य और मछुआरा की प्रदेश में काफी तादाद में होने के बावजूद न तो सत्ता में भागीदारी मिली और न ही आर्थिक और सामाजिक स्तर ऊपर उठ सका। यादव बिरादरी को छोड़कर यही हाल अन्य पिछड़ी जातियों का भी है। ये बातें पीस पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अयूब ने पडरौना नगर के उदित नारायण स्नातकोत्तर महाविद्यालय के मैदान में पीस पार्टी, महान दल और निषाद पार्टी की ओर से आयोजित एआईएनई समझौता गठबंधन की संयुक्त रैली को संबोधित करते हुए कहीं।
उन्होंने कहा कि सपा ने 2012 के विधानसभा चुनाव में मुसलमानों को 18 प्रतिशत आरक्षण देने की घोषणा की थी, लेकिन सत्ता में आने के बाद उसे पूरा नहीं किया। दरोगा, शिक्षक सहित विभिन्न महकमों में नौकरी केवल एटा और मैनपुरी के लोगों को दी गई, जिसमें ज्यादातर संख्या यादव बिरादरी की थी। मुस्लिम, मौर्य और मछुआरों को नौकरी ही नहीं मिली। अलबत्ता इस सपा सरकार में दंगे सबसे अधिक हुए। उन्होंने भाजपा और कांग्रेस पर जहां अगणी बिरादरी के लोगों को लाभ देने का आरोप मढ़ा, वहीं, बसपा पर दलित बिरादरी का। उन्होंने तीनों जातियों के लोगों को इस गठबंधन के साथ मिलकर चलने की अपील की।
महान दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष केशवदेव मौर्य ने कहा कि बिरादरी के लोगों की उपेक्षा को देखते हुए वर्ष 2008 में इस दल की नींव रखी गई थी। प्रदेश में मुस्लिम, मौर्य और मछुआरा जाति के लोगों की संख्या काफी अधिक है। जिस तरह बसपा और सपा अपने जातिगत वोटों के बल पर सत्तारूढ़ होती रहीं, वैसे ही ये तीनों बिरादरियां एक हो जाएं तो प्रदेश में इनका ही परचम लहराएगा। इसी सोच के तहत तीनों दलों का गठबंधन हुआ है।
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गठबंधन के तीसरे घटक निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. संजय निषाद ने कहा कि इलाहाबाद से तीन किलोमीटर दूरी पर खुदाई में जो अवशेष मिले, उनके आधार पर अनुमान लगाया जाता है कि वहां राजा गुह्यराज की राजधानी थी। इससे स्पष्ट होता है कि निषाद समाज ने भी शासन किया था। जब इस बिरादरी का इतिहास इतना समृद्ध है तो इसे भी राजनीति में आना चाहिए। यही उद्देश्य लेकर पार्टी बनाई गई और आज गठबंधन में शामिल हुई है। उन्होंने कहा कि हमें राजनीति में हिस्सेदारी के लिए भी भागीदारी की जरूरत है, तभी अपने बिरादरी का भला हो सकता है।
पीस पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अब्दुल मन्नान ने कहा कि अब तक दूसरी पार्टियां मुसलमानों के वोट से सत्ता में जाती रहीं, लेकिन अपनी आने वाली पीढ़ियों के लिए मुसलमानों को संगठित होकर सत्ता में भागीदारी करनी होगी। दूसरे नेताओं ने अब तक इस कौम को केवल छला है।
इस रैली को डॉ. संजय निषाद की पत्नी मालती निषाद, महान दल की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सुमन शाक्या, प्रदेश अध्यक्ष शिवकुमार यादव, प्रदेश महामंत्री मोहम्मद यूनुस, सुनीत सिंह, महामंत्री अफरोज बादल, किशोर यादव, रामानंद सैनी, जेपी मौर्य सहित कई लोगों ने संबोधित किया। इससे पहले तीनों दलों के राष्ट्रीय अध्यक्षों को 51 किलोग्राम की माला पहनाकर मंच पर स्वागत किया गया। रैली में पीस पार्टी के कार्यकर्ताओं के साथ-साथ कुशवाहा, मौर्य और निषाद बिरादरी के लोगों ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
इस दौरान पीस पार्टी के जिलाध्यक्ष अजीमुल्लाह उर्फ गुड्डू अंसारी, पडरौना विधानसभा प्रभारी राजेंद्र यादव उर्फ मुन्ना, महान दल के जिला प्रभारी राजेश मौर्या, अजय राव, सतवंत यादव, मतीउल्लाह एडवोकेट, अमीरुल्लाह अंसारी, पहलवान जनार्दन यादव, चंद्रशेखर कुशवाहा, नैय्यर जमाल सहित सभी विधानसभा क्षेत्र के अध्यक्ष और अन्य पदाधिकारी मौजूद थे।
पिछड़ों के लिए अगड़ों पर निशाना
पडरौना। पीस पार्टी, महान दल और निषाद पार्टी की समझौता गठबंधन की संयुक्त रैली में तीनों दलों के पार्टी मुखिया ने पिछड़ों को अपने पाले में खींचने के लिए अगड़ों पर निशाना साधा। यहां तक कि अपने वक्तव्य में भारतीय वर्ण व्यवस्था का उल्लेख करते हुए अगड़ी-पिछड़ी का भेदभाव दिखाकर रैली में मौजूद लोगों का ध्यान खींचने की पुरजोर कोशिश की।
नगर के उदित नारायण स्नातकोत्तर महाविद्यालय के मैदान आयोजित इन तीनों दलों की संयुक्त रैली में महान दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष केशवदेव मौर्य ने ब्राह्मण बिरादरी पर निशाना साधते हुए कहा दलित और पिछड़ी जातियों से यह कौम भेदभाव करती है। धार्मिक स्थलों पर उन्हीं का वर्चस्व होता है, जबकि मुस्लिम धर्म के बारे में कहा कि किसी भी मजहब का व्यक्ति उसे अपनाने के बाद उसे नमाज, मजलिस, निकाह सहित कई कार्यों में बराबरी का हक मिल जाता है। उन्होंने भाजपा के कुछ नेताओं को आतंकवादी तक की संज्ञा दे डाली। उन्होंने कहा कि सभी उच्च पदों पर फारवर्ड बिरादरी के लोगों का ही दबदबा है। यदि मुस्लिम, मौर्य (कुशवाहा) और मछुआरा जाति के लोग इस गठबंधन के बैनर तले संगठित हो जाएं तो प्रधान से लगायत प्रधानमंत्री तक का पद जीत सकते हैं। उन्होंने रामचरित मानस के बारे में भी चर्चा की।
पीस पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अयूब ने कहा कि सत्ता में आने के बाद प्रदेश में सपा की राजनीति परिवारवाद और बिरादरीवाद तक सिमटकर रह गई। भाजपा और कांग्रेस में सवर्णों को बढ़ावा मिल रहा है, वहीं, बसपा के कार्यकाल में दलितों को मिला। लेकिन यादव बिरादरी की बात छोड़ दी जाए अन्य पिछड़ी जातियों का ख्याल किसी ने नहीं रखा। उन्होंने भी भाजपा के एक सांसद को आतंकवादी तक कहा।
निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. संजय निषाद ने कहा कि मौर्य, मुसलमान और मछुआरा का खून एक है। इसका डीएनए टेस्ट कराकर चेक किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि जिन लोगों के चलते बाबरी मस्जिद ध्वस्त हुई थी और कई लोगों की जान गई, गठबंधन के सत्ता में आने के बाद उनके विरुद्ध हत्या का मुकदमा दर्ज कराया जाएगा। इस तरह रैली में शामिल वक्ताओं का सर्वाधिक प्रयास सवर्णों पर धावा बोलकर मुस्लिम, कुशवाहा और मछुआरा बिरादरी के लोगों को अपने पाले में खींचना था।
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मुसलमानों और अन्य पिछड़ी जातियों के लोगों को नौकरी, शिक्षा, सुरक्षा और सुविधाएं दिलाने का सब्जबाग दिखाकर कांग्रेस, भाजपा और सपा सत्ता में आती रहीं, लेकिन उसके बाद इन जातियों का नहीं बल्कि अगड़ी जातियों और खुद का हित साधती रहीं। मुसलमान, मौर्य और मछुआरा की प्रदेश में काफी तादाद में होने के बावजूद न तो सत्ता में भागीदारी मिली और न ही आर्थिक और सामाजिक स्तर ऊपर उठ सका। यादव बिरादरी को छोड़कर यही हाल अन्य पिछड़ी जातियों का भी है। ये बातें पीस पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अयूब ने पडरौना नगर के उदित नारायण स्नातकोत्तर महाविद्यालय के मैदान में पीस पार्टी, महान दल और निषाद पार्टी की ओर से आयोजित एआईएनई समझौता गठबंधन की संयुक्त रैली को संबोधित करते हुए कहीं।
उन्होंने कहा कि सपा ने 2012 के विधानसभा चुनाव में मुसलमानों को 18 प्रतिशत आरक्षण देने की घोषणा की थी, लेकिन सत्ता में आने के बाद उसे पूरा नहीं किया। दरोगा, शिक्षक सहित विभिन्न महकमों में नौकरी केवल एटा और मैनपुरी के लोगों को दी गई, जिसमें ज्यादातर संख्या यादव बिरादरी की थी। मुस्लिम, मौर्य और मछुआरों को नौकरी ही नहीं मिली। अलबत्ता इस सपा सरकार में दंगे सबसे अधिक हुए। उन्होंने भाजपा और कांग्रेस पर जहां अगणी बिरादरी के लोगों को लाभ देने का आरोप मढ़ा, वहीं, बसपा पर दलित बिरादरी का। उन्होंने तीनों जातियों के लोगों को इस गठबंधन के साथ मिलकर चलने की अपील की।
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महान दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष केशवदेव मौर्य ने कहा कि बिरादरी के लोगों की उपेक्षा को देखते हुए वर्ष 2008 में इस दल की नींव रखी गई थी। प्रदेश में मुस्लिम, मौर्य और मछुआरा जाति के लोगों की संख्या काफी अधिक है। जिस तरह बसपा और सपा अपने जातिगत वोटों के बल पर सत्तारूढ़ होती रहीं, वैसे ही ये तीनों बिरादरियां एक हो जाएं तो प्रदेश में इनका ही परचम लहराएगा। इसी सोच के तहत तीनों दलों का गठबंधन हुआ है।
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गठबंधन के तीसरे घटक निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. संजय निषाद ने कहा कि इलाहाबाद से तीन किलोमीटर दूरी पर खुदाई में जो अवशेष मिले, उनके आधार पर अनुमान लगाया जाता है कि वहां राजा गुह्यराज की राजधानी थी। इससे स्पष्ट होता है कि निषाद समाज ने भी शासन किया था। जब इस बिरादरी का इतिहास इतना समृद्ध है तो इसे भी राजनीति में आना चाहिए। यही उद्देश्य लेकर पार्टी बनाई गई और आज गठबंधन में शामिल हुई है। उन्होंने कहा कि हमें राजनीति में हिस्सेदारी के लिए भी भागीदारी की जरूरत है, तभी अपने बिरादरी का भला हो सकता है।
पीस पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अब्दुल मन्नान ने कहा कि अब तक दूसरी पार्टियां मुसलमानों के वोट से सत्ता में जाती रहीं, लेकिन अपनी आने वाली पीढ़ियों के लिए मुसलमानों को संगठित होकर सत्ता में भागीदारी करनी होगी। दूसरे नेताओं ने अब तक इस कौम को केवल छला है।
इस रैली को डॉ. संजय निषाद की पत्नी मालती निषाद, महान दल की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सुमन शाक्या, प्रदेश अध्यक्ष शिवकुमार यादव, प्रदेश महामंत्री मोहम्मद यूनुस, सुनीत सिंह, महामंत्री अफरोज बादल, किशोर यादव, रामानंद सैनी, जेपी मौर्य सहित कई लोगों ने संबोधित किया। इससे पहले तीनों दलों के राष्ट्रीय अध्यक्षों को 51 किलोग्राम की माला पहनाकर मंच पर स्वागत किया गया। रैली में पीस पार्टी के कार्यकर्ताओं के साथ-साथ कुशवाहा, मौर्य और निषाद बिरादरी के लोगों ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
इस दौरान पीस पार्टी के जिलाध्यक्ष अजीमुल्लाह उर्फ गुड्डू अंसारी, पडरौना विधानसभा प्रभारी राजेंद्र यादव उर्फ मुन्ना, महान दल के जिला प्रभारी राजेश मौर्या, अजय राव, सतवंत यादव, मतीउल्लाह एडवोकेट, अमीरुल्लाह अंसारी, पहलवान जनार्दन यादव, चंद्रशेखर कुशवाहा, नैय्यर जमाल सहित सभी विधानसभा क्षेत्र के अध्यक्ष और अन्य पदाधिकारी मौजूद थे।
पिछड़ों के लिए अगड़ों पर निशाना
पडरौना। पीस पार्टी, महान दल और निषाद पार्टी की समझौता गठबंधन की संयुक्त रैली में तीनों दलों के पार्टी मुखिया ने पिछड़ों को अपने पाले में खींचने के लिए अगड़ों पर निशाना साधा। यहां तक कि अपने वक्तव्य में भारतीय वर्ण व्यवस्था का उल्लेख करते हुए अगड़ी-पिछड़ी का भेदभाव दिखाकर रैली में मौजूद लोगों का ध्यान खींचने की पुरजोर कोशिश की।
नगर के उदित नारायण स्नातकोत्तर महाविद्यालय के मैदान आयोजित इन तीनों दलों की संयुक्त रैली में महान दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष केशवदेव मौर्य ने ब्राह्मण बिरादरी पर निशाना साधते हुए कहा दलित और पिछड़ी जातियों से यह कौम भेदभाव करती है। धार्मिक स्थलों पर उन्हीं का वर्चस्व होता है, जबकि मुस्लिम धर्म के बारे में कहा कि किसी भी मजहब का व्यक्ति उसे अपनाने के बाद उसे नमाज, मजलिस, निकाह सहित कई कार्यों में बराबरी का हक मिल जाता है। उन्होंने भाजपा के कुछ नेताओं को आतंकवादी तक की संज्ञा दे डाली। उन्होंने कहा कि सभी उच्च पदों पर फारवर्ड बिरादरी के लोगों का ही दबदबा है। यदि मुस्लिम, मौर्य (कुशवाहा) और मछुआरा जाति के लोग इस गठबंधन के बैनर तले संगठित हो जाएं तो प्रधान से लगायत प्रधानमंत्री तक का पद जीत सकते हैं। उन्होंने रामचरित मानस के बारे में भी चर्चा की।
पीस पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अयूब ने कहा कि सत्ता में आने के बाद प्रदेश में सपा की राजनीति परिवारवाद और बिरादरीवाद तक सिमटकर रह गई। भाजपा और कांग्रेस में सवर्णों को बढ़ावा मिल रहा है, वहीं, बसपा के कार्यकाल में दलितों को मिला। लेकिन यादव बिरादरी की बात छोड़ दी जाए अन्य पिछड़ी जातियों का ख्याल किसी ने नहीं रखा। उन्होंने भी भाजपा के एक सांसद को आतंकवादी तक कहा।
निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. संजय निषाद ने कहा कि मौर्य, मुसलमान और मछुआरा का खून एक है। इसका डीएनए टेस्ट कराकर चेक किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि जिन लोगों के चलते बाबरी मस्जिद ध्वस्त हुई थी और कई लोगों की जान गई, गठबंधन के सत्ता में आने के बाद उनके विरुद्ध हत्या का मुकदमा दर्ज कराया जाएगा। इस तरह रैली में शामिल वक्ताओं का सर्वाधिक प्रयास सवर्णों पर धावा बोलकर मुस्लिम, कुशवाहा और मछुआरा बिरादरी के लोगों को अपने पाले में खींचना था।