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वर्मी मंदिर में की बैठक
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मुख्य महापरिनिर्वाण मंदिर में प्रवेश शुल्क के प्रस्ताव पर जताया रोष
कसया ( कुशीनगर)। मुख्य महापरिनिर्वाण मंदिर में प्रस्तावित प्रवेश शुल्क के विरोध में कुशीनगर भिक्षु संघ ने शनिवार को वर्मी मंदिर सभागार में बैठक कर विरोध जताया। भिक्षु संघ का आरोप है कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग की तरफ से लिए जाने वाला यह फैसला बौद्ध अनुयायियों की आस्था के साथ खिलवाड़ है। बैठक में मौजूद अलग अलग बौद्ध विहारों के प्रबंधक व संचालकों ने प्रस्ताव वापस न लेने पर आंदोलन की चेतावनी दी है। बैठक की अध्यक्षता कुशीनगर भिक्षु संघ के अध्यक्ष भिक्षु ज्ञानेश्वर महाथेरो और संचालन संयुक्त सचिव भिक्षु नंदरतन ने किया।
इस दौरान भिक्षु शील प्रकाश, भिक्षु महेंद्र, भिक्षु विनय कीर्ति, भिक्षु इंद्र श्री, भिक्षु अशोक, भिक्षु सागर, भंते उपालि, भंते राजिंद,भंते ओवासा, शांत रक्षित आदि मौजूद रहे।
आगरा व सारनाथ में शुल्क तो कुशीनगर में क्यों नहीं
कसया। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के उपमंडल कार्यालय, कुशीनगर के संरक्षण सहायक शादाब खान का तर्क है कि अगर आगरा के ताजमहल व सारनाथ में शुल्क लिया जाता है तो कुशीनगर मुख्य महापरिनिर्वाण मंदिर में क्यों नहीं। उनका कहना है कि कुशीनगर में भी शुल्क लिया जाना चाहिए। प्रत्येक दिन आने वाले स्थानीय लोगों से न्यूनतम शुल्क लिया जाए, तो सात से आठ लाख रुपये राजस्व की प्राप्ति होगी। जिला स्तरीय बैठक में यह मुद्दा पुरातत्व विभाग ने उठाया था। इस डीएम व सांसद समेत जन प्रतिनिधियों ने सहमति जताई थी।
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कसया ( कुशीनगर)। मुख्य महापरिनिर्वाण मंदिर में प्रस्तावित प्रवेश शुल्क के विरोध में कुशीनगर भिक्षु संघ ने शनिवार को वर्मी मंदिर सभागार में बैठक कर विरोध जताया। भिक्षु संघ का आरोप है कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग की तरफ से लिए जाने वाला यह फैसला बौद्ध अनुयायियों की आस्था के साथ खिलवाड़ है। बैठक में मौजूद अलग अलग बौद्ध विहारों के प्रबंधक व संचालकों ने प्रस्ताव वापस न लेने पर आंदोलन की चेतावनी दी है। बैठक की अध्यक्षता कुशीनगर भिक्षु संघ के अध्यक्ष भिक्षु ज्ञानेश्वर महाथेरो और संचालन संयुक्त सचिव भिक्षु नंदरतन ने किया।
इस दौरान भिक्षु शील प्रकाश, भिक्षु महेंद्र, भिक्षु विनय कीर्ति, भिक्षु इंद्र श्री, भिक्षु अशोक, भिक्षु सागर, भंते उपालि, भंते राजिंद,भंते ओवासा, शांत रक्षित आदि मौजूद रहे।
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आगरा व सारनाथ में शुल्क तो कुशीनगर में क्यों नहीं
कसया। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के उपमंडल कार्यालय, कुशीनगर के संरक्षण सहायक शादाब खान का तर्क है कि अगर आगरा के ताजमहल व सारनाथ में शुल्क लिया जाता है तो कुशीनगर मुख्य महापरिनिर्वाण मंदिर में क्यों नहीं। उनका कहना है कि कुशीनगर में भी शुल्क लिया जाना चाहिए। प्रत्येक दिन आने वाले स्थानीय लोगों से न्यूनतम शुल्क लिया जाए, तो सात से आठ लाख रुपये राजस्व की प्राप्ति होगी। जिला स्तरीय बैठक में यह मुद्दा पुरातत्व विभाग ने उठाया था। इस डीएम व सांसद समेत जन प्रतिनिधियों ने सहमति जताई थी।
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