फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Kushinagar News ›   Morari bapu ramkatha in kushinagar

ईर्ष्या, द्वेष व निंदा का जीवन में कोई काम नहीं: मोरारी बापू

Sun, 24 Jan 2021 10:56 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Sun, 24 Jan 2021 10:56 PM IST
विज्ञापन
Morari bapu ramkatha in kushinagar
कुशीनगर में रामकथा सुनाते मोरारी बापू। अमर उजाला - फोटो : GORAKHPUR CITY
ईर्ष्या, द्वेष व निंदा का जीवन में कोई काम नहीं: मोरारी बापू
विज्ञापन

- युवा पीढ़ी चिंता करे लेकिन सावधान भी रहे
अमर उजाला ब्यूरो
कसया (कुशीनगर)। काम, क्रोध, लोभ और मोह सांसारिक जीवन का हिस्सा है। प्रत्येक व्यक्ति में इसका भाव होना स्वाभाविक है लेकिन ईर्ष्या, द्वेष व निंदा का जीवन में कोई काम नहीं है। यह समुद्र मंथन से निकले हलाहल (विष) के समान है। हालांकि अब धर्म क्षेत्र में भी ईर्ष्या, द्वेष व निंदा का असर है जो उचित नहीं है। कलियुग में सभी समस्याओं का निदान केवल रामनाम संकीर्तन में है। इसका जप करने के लिए कोई नियम या विद्वता की जरूरत नहीं।

यह बातें कुशीनगर में रामकथा सुनाने आए मोरारी बापू ने दूसरे दिन की कथा सुनाते हुए कहीं। मानस निर्वाण शीर्षक के तहत आयोजित इस रामकथा की शुरूआत दूसरे दिन भी हनुमानजी की वंदना से हुई। मानस में वर्णित आठ निर्वाण की व्याख्या करते हुए मोरारी बापू ने कहा कि हमारा निर्वाण हमारी मुट्ठी में है। मेरे लिए रामचरित मानस ही निर्वाण है। इसमें गोस्वामी तुलसीदास ने ईश्वर की भक्ति का मार्ग बताया है। वैष्णव कभी मुक्ति नहीं चाहते। मंत्रों का जाप करने के लिए विधियों का ज्ञान और पालन जरूरी है जबकि राम नाम का संकीर्तन करने के लिए किसी भी प्रकार के उपाय की जरूरत नहीं है। आप, सोते-जागते, घूमते जब भी मौका मिले, राम नाम का जाप कर सकते हैं। निर्वाण की चर्चा के दौरान ही मोरारी बापू ने महाभारत काल का उल्लेख करते हुए कि भीष्म को बाणों की शैय्या पर लेटकर वक्त बदलने का इंतजार करना पड़ा। इसका कारण समझाते हुए कहा कि हर घर में एक भीष्म पाया जाता है। जो अपने प्रियजनों की भलाई के लिए हर कुर्बानी देता है लेकिन वही प्रियजन अगर गलत काम करते हैं तो उसका प्रायश्चित भी उस परिवार के भिष्म को करना पड़ता है। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति अपने परिवार के भीष्म को खोजे और यह सोचे कि वह जो कष्ट पा रहे हैं वह हमारी किस गलती का परिणाम है। सांसारिक जीवन के बंधनों की चर्चा करते हुए मोरारी बापू ने कहा कि जीवन को चलाने के लिए काम भी जरूरी है। व्यवस्थाएं ठीक रहें, इसके लिए क्रोध भी करना पड़ता है। धन का लोभ होना भी स्वाभाविक है लेकिन इसमें से किसी की भी अधिकता नहीं होनी चाहिए। अगर ये सभी संतुलित रहें तो जीवन को सुखमय बनाती हैं। परंतु जीवन में ईर्ष्या, द्वेष और निंदा का कोई काम नहीं। इसके बिना ही जीवन बेहतर चल सकता है। आध्यात्मिक लोग इससे ऊपर होने का दावा करते हैं लेकिन अब धर्म क्षेत्र भी इससे अछूता नहीं है। सामने आने पर दंडवत करते हैं और पीठ पीछे डंडा उठाने की मानसिकता भी रखते हैं। भोग और प्रेम का अंतर समझाते हुए कहा कि भोग से जीवन में शिथिलता आती है जबकि प्रेम से जीवन में उत्साह का संचार होता है। प्रेम मिलने पर बुजुर्ग भी खुद को नौजवान समझने लगता है। अंत में भातृहरि और गोपीचंद की कथा सुनाते हुए दूसरे दिन की कथा को विश्राम दिया गया। इस दौरान अमर तुलस्यान, गौरव बथवाल, विक्रम अग्रवाल, प्रांजल तुलस्यान, सुधीर वर्मा, सुमित त्रिपाठी, अजय कुमार पोद्दार, देवांश पोद्दार, मारकंडेय शाही,आशीष रूंगटा समेत कई लोग मौजूद रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed