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कानूनी पेच में उलझा रहा दुष्कर्म पीड़िता का मेडिकल परीक्षण

Mon, 12 Aug 2019 11:24 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Mon, 12 Aug 2019 11:24 PM IST
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medicolegal not condected
कानूनी पेच में उलझा रहा दुष्कर्म पीड़िता का मेडिकल परीक्षण
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दुष्कर्म पीड़ित बच्ची को लिए नानी अस्पताल से लगायत थाने तक भटकती रही
मथौली बाजार (कुशीनगर)। दुष्कर्म की शिकार हुई साढ़े पांच साल की मासूम को लेकर उसकी नानी सोमवार को भी परेशान रही। जिला अस्पताल से बच्ची को डिस्चार्ज कराने के बाद पुलिस कप्तानगंज थाने ले गई। वहां से मथौली बाजार ले जाया गया, लेकिन महिला डॉक्टर न आने से मेडिकोलीगल नहीं हो पाया। बच्ची को लेकर उसकी नानी पुलिस के साथ अस्पताल से थाने और पुलिस चौकी का चक्कर लगाती रही।
कप्तानगंज थाना क्षेत्र के एक गांव में अपनी नानी के घर रह रही साढ़े पांच वर्ष की बच्ची नौ अगस्त की शाम करीब पांच बजे बिस्कुट खरीदने दुकान पर जा रही थी। तभी गांव का एक किशोर बहला फुसलाकर उसे अपनी बाइक पर बैठा लिया और खेत में ले जाकर उसके साथ दुष्कर्म किया था। अंदरूनी हिस्से से रक्तस्राव होने पर उसकी नानी गांव के चौराहे से लेकर कप्तानगंज तक निजी डॉक्टरों से उसका इलाज कराती रही, लेकिन स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो उसने थाने में शिकायत की। पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर आरोपी को हिरासत में ले लिया, लेकिन पीड़ित बच्ची का डॉक्टरी परीक्षण नहीं हो पाया।
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रविवार को पुलिस के साथ पीड़िता को जिला अस्पताल भेजा गया था, जहां भर्ती कर उसका इलाज किया गया, लेकिन अस्पताल प्रशासन ने साथ में महिला पुलिस न होने से डॉक्टरी परीक्षण से इनकार कर दिया। पुलिस सोमवार को बच्ची को डिस्चार्ज कराकर कप्तानगंज थाने ले गई, जहां से उसे मथौली बाजार सीएचसी भेजा गया। सादे ड्रेस में एक महिला पुलिसकर्मी और एक सिपाही सीएचसी पहुंचे, लेकिन महिला डॉक्टर न होने से वहां भी मेडिकोलीगल नहीं हो पाया।
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एसपी राजीव नारायण मिश्र ने बताया कि बच्ची की हालत ठीक होने के बाद उसे डिस्चार्ज करा दिया गया। पुलिस उसे कप्तानगंज थाने ले गई, जहां से महिला पुलिसकर्मी के साथ मथौली बाजार सीएचसी में डॉक्टरी परीक्षण के लिए भेजा गया, लेकिन वहां कोई महिला डॉक्टर नहीं आई। मंगलवार तक पीड़िता का डॉक्टरी परीक्षण करा दिया जाएगा।

सीएमओ डॉ. हरिचरण सिंह ने कहा कि दुष्कर्म के मामलों में मेडिकोलीगल के लिए आ रही समस्याओं को देखते हुए जिला अस्पताल में एक अलग पैनल बनाया जाएगा, जिसमें राउंडवार डॉक्टरों की ड्यूटी लगाई जाएगी। इससे दुष्कर्म पीड़ितों को सीएचसी या जिला अस्पताल में भटकना नहीं पड़ेगा। इसके लिए वह मंगलवार को ही आदेश जारी कर देंगे।
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