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मेडिकल कॉलेज : कवायद तमाम, दलालों पर नहीं लग पा रही लगाम
Sun, 03 Aug 2025 12:32 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Sun, 03 Aug 2025 12:32 AM IST
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मेडिकल कॉलेज में मरीजों का इलाज करते चिकित्सक। संवाद
पड़रौना। दलालों के नेटवर्क के सामने मेडिकल कॉलेज प्रशासन कमजोर पड़ रहा है। शुक्रवार देर रात प्राचार्य इमरजेंसी पर पहुंचे, लेकिन इसकी सूचना लीक हो गई और दलाल वहां से खिसक गए। कॉलेज प्रशासन की सक्रियता के बाद दलालों ने बचाव के लिए नया तरीका ढूंढ़ लिया है।
ड्यूटी पर तैनात स्वास्थ्यकर्मियों की मिलीभगत के अलावा गेट से लेकर इमरजेंसी गेट तक अपने लोगों को खड़ा कर रहे हैं। प्राचार्य का वाहन आते ही मोबाइल से सूचना पहुंच जा रही है और दलाल खिसक जा रहे हैं।
गेट से लेकर वार्ड, पैथाेलॉजी, इमरजेंसी और एक्सरे कक्ष तक दलालों का नेटवर्क सक्रिय है। इस खेल में कई ऐसे कई निजी अस्पताल संचालक हैं जिनको राजनीतिक संरक्षण मिल रहा है। प्रशिक्षु फार्मासिस्ट उमेश कुशवाहा की पिटाई के बाद मेडिकल कॉलेज प्रशासन की सक्रियता बढ़ी तो है, लेकिन दलालों की सक्रियता कम नहीं हो रही है। दिन में थोड़ा इनका आना-जाना कम है, लेकिन शाम ढलते ही पहुंच जा रहे हैं।
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शुक्रवार की रात करीब 11 बजे जैसे ही प्राचार्य की गाड़ी इंट्री की, डीआईओएस कार्यालय और जिला पंचायत कार्यालय के पास मौजूद दलालों ने फोन कर दिया, इसके चलते इमरजेंसी में मौजूद दलाल भाग गए और प्राचार्य को सब कुछ ठीक नजर आया।
रात करीब एक बजे तक प्राचार्य बैठे रहे। सूत्रों की मानें तो इस खेल में शहर के कई ऐसे अस्पताल संचालक हैं जिनको राजनीतिक संरक्षण खुल कर मिल रहा है। इसके चलते दलालों को संरक्षण दे रहे हैं और मेडिकल कॉलेज में आने वाले मरीजों को रात को बेहतर इलाज का झांसा देकर लेकर चले आ रहे हैं। प्राचार्य ने ड्यूटी पर तैनात स्टाफ व कई मरीजों के तीमारदारों से कहा गया है कि यदि कोई भी दलाल परेशान करता है तो उसकी तत्काल सूचना दें। ताकि उनके खिलाफ कार्रवाई की जा सके। शनिवार को दोपहर में मेडिकल कालेज परिसर से बाहर सड़क के किनारे कई निजी एंबुलेंस खड़ी रही। वहीं दलालों की पिटाई से घायल प्रशिक्षु फार्मासिस्ट अभी भी ड्यूटी पर नहीं आ रहा है। वह सहमा हुआ है, क्योंकि कई अस्पताल संचालक उसको फोन कर मुकदमा वापस करने के लिए धमका रहे हैं।
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ड्यूटी पर तैनात स्वास्थ्यकर्मियों की मिलीभगत के अलावा गेट से लेकर इमरजेंसी गेट तक अपने लोगों को खड़ा कर रहे हैं। प्राचार्य का वाहन आते ही मोबाइल से सूचना पहुंच जा रही है और दलाल खिसक जा रहे हैं।
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गेट से लेकर वार्ड, पैथाेलॉजी, इमरजेंसी और एक्सरे कक्ष तक दलालों का नेटवर्क सक्रिय है। इस खेल में कई ऐसे कई निजी अस्पताल संचालक हैं जिनको राजनीतिक संरक्षण मिल रहा है। प्रशिक्षु फार्मासिस्ट उमेश कुशवाहा की पिटाई के बाद मेडिकल कॉलेज प्रशासन की सक्रियता बढ़ी तो है, लेकिन दलालों की सक्रियता कम नहीं हो रही है। दिन में थोड़ा इनका आना-जाना कम है, लेकिन शाम ढलते ही पहुंच जा रहे हैं।
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शुक्रवार की रात करीब 11 बजे जैसे ही प्राचार्य की गाड़ी इंट्री की, डीआईओएस कार्यालय और जिला पंचायत कार्यालय के पास मौजूद दलालों ने फोन कर दिया, इसके चलते इमरजेंसी में मौजूद दलाल भाग गए और प्राचार्य को सब कुछ ठीक नजर आया।
रात करीब एक बजे तक प्राचार्य बैठे रहे। सूत्रों की मानें तो इस खेल में शहर के कई ऐसे अस्पताल संचालक हैं जिनको राजनीतिक संरक्षण खुल कर मिल रहा है। इसके चलते दलालों को संरक्षण दे रहे हैं और मेडिकल कॉलेज में आने वाले मरीजों को रात को बेहतर इलाज का झांसा देकर लेकर चले आ रहे हैं। प्राचार्य ने ड्यूटी पर तैनात स्टाफ व कई मरीजों के तीमारदारों से कहा गया है कि यदि कोई भी दलाल परेशान करता है तो उसकी तत्काल सूचना दें। ताकि उनके खिलाफ कार्रवाई की जा सके। शनिवार को दोपहर में मेडिकल कालेज परिसर से बाहर सड़क के किनारे कई निजी एंबुलेंस खड़ी रही। वहीं दलालों की पिटाई से घायल प्रशिक्षु फार्मासिस्ट अभी भी ड्यूटी पर नहीं आ रहा है। वह सहमा हुआ है, क्योंकि कई अस्पताल संचालक उसको फोन कर मुकदमा वापस करने के लिए धमका रहे हैं।