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Kushinagar News: फसल की स्थिति जानने के लिए सर्वे शुरू
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सुकरौली। कृषि विभाग की ओर से क्षेत्र में खसरा पड़ताल का कार्य शुरू हो गया है। कृषि विभाग के कर्मचारी खेतों में पहुंचकर जीपीएस के माध्यम से फसल की फोटो और अन्य विवरण ऑनलाइन अपलोड कर रहे हैं। इसे लेकर कुछ किसानों में भ्रम की स्थिति बन रही है। किसानों के मोबाइल पर खसरा पड़ताल पूर्ण होने अथवा जमीन के एग्रीकल्चर और नान एग्रीकल्चर के रूप में दर्ज होने से संबंधित संदेश मिल रहे हैं।
कृषि विभाग के अधिकारियों के अनुसार खसरा पड़ताल का उद्देश्य केवल यह जानकारी जुटाना है कि किस रकबे में कौन सी फसल बोई गई है और वास्तविक रूप से कितनी भूमि पर खेती हो रही है। इसके तहत खेतों की स्थिति का जीपीएस आधारित विवरण दर्ज किया जा रहा है। जहां कृषि भूमि पर सड़क, भवन अथवा अन्य निर्माण हो चुका है, वहां की वास्तविक स्थिति भी सर्वे के दौरान दर्ज की जा रही है।विभाग ने किसानों से अपील की है कि मोबाइल पर आने वाले ऐसे संदेशों को लेकर किसी तरह की आशंका न पालें।
यह विभागीय स्तर पर समय-समय पर होने वाली सामान्य प्रक्रिया है। खसरा पड़ताल का उद्देश्य किसानों को मिलने वाली सरकारी सहायता रोकना नहीं है। किसानों से सर्वे कार्य में सहयोग करने को कहा गया है। कृषि विभाग के एडीओ प्रवीण कुमार ओझा ने बताया कि क्षेत्र में खसरा पड़ताल का सर्वे चल रहा है। इसका उद्देश्य यह जानकारी जुटाना है कि किस रकबे में कौन सी फसल बोई गई है और कौन सा रकबा वास्तव में खेती में उपयोग हो रहा है। कहीं कृषि भूमि पर सड़क या भवन बना है तो उसकी स्थिति भी दर्ज की जाती है। उन्होंने कहा कि किसानों को इससे घबराने की जरूरत नहीं है।
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कृषि विभाग के अधिकारियों के अनुसार खसरा पड़ताल का उद्देश्य केवल यह जानकारी जुटाना है कि किस रकबे में कौन सी फसल बोई गई है और वास्तविक रूप से कितनी भूमि पर खेती हो रही है। इसके तहत खेतों की स्थिति का जीपीएस आधारित विवरण दर्ज किया जा रहा है। जहां कृषि भूमि पर सड़क, भवन अथवा अन्य निर्माण हो चुका है, वहां की वास्तविक स्थिति भी सर्वे के दौरान दर्ज की जा रही है।विभाग ने किसानों से अपील की है कि मोबाइल पर आने वाले ऐसे संदेशों को लेकर किसी तरह की आशंका न पालें।
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यह विभागीय स्तर पर समय-समय पर होने वाली सामान्य प्रक्रिया है। खसरा पड़ताल का उद्देश्य किसानों को मिलने वाली सरकारी सहायता रोकना नहीं है। किसानों से सर्वे कार्य में सहयोग करने को कहा गया है। कृषि विभाग के एडीओ प्रवीण कुमार ओझा ने बताया कि क्षेत्र में खसरा पड़ताल का सर्वे चल रहा है। इसका उद्देश्य यह जानकारी जुटाना है कि किस रकबे में कौन सी फसल बोई गई है और कौन सा रकबा वास्तव में खेती में उपयोग हो रहा है। कहीं कृषि भूमि पर सड़क या भवन बना है तो उसकी स्थिति भी दर्ज की जाती है। उन्होंने कहा कि किसानों को इससे घबराने की जरूरत नहीं है।
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