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Kushinagar News: अश्व पर होगा माता रानी का आगमन, हाथी पर होंगी विदा

Mon, 08 Apr 2024 12:38 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर Updated Mon, 08 Apr 2024 12:38 AM IST
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Mata Rani will arrive on horse, will depart on elephant
पडरौना। नौ अप्रैल से चैत्र नवरात्र की शुरुआत होने जा रही है। नवरात्र का समापन 17 अप्रैल को होगा। इस बार मां दुर्गा का अश्व पर आगमन और हाथी पर विदाई होगी। घोड़े पर सवार होकर माता रानी का धरती पर आगमन शुभ नहीं माना जाता है, जबकि उनका प्रस्थान शुभ फलदायी है।
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नव संवत्सर और वासंतिक नवरात्र का शुभारंभ नौ अप्रैल से होगा। इस बार माता रानी अश्व (घोड़े) पर सवार होकर आएंगी और हाथी पर जाएंगी। ज्योतिषाचार्य राजकिशोर मिश्र उर्फ हनुमान जी ने बताया कि आठ अप्रैल को रात 11:51 बजे प्रतिपदा लगेगी, जो नौ अप्रैल को रात 8:29 बजे तक रहेगी। उदया तिथि की प्रधानता के मुताबिक नौ अप्रैल को ही नव संवत्सर और वासंतिक नवरात्र का शुभारंभ होगा। उन्होंने बताया कि इस साल 09 अप्रैल दिन मंगलवार को चैत्र नवरात्र का प्रारंभ हो रहा है। दिन के आधार पर इस साल मां दुर्गा घोड़े पर सवार होकर पृथ्वी पर आएंगी। घोड़े को युद्ध का प्रतीक माना जाता है। माता का आगमन घोड़े पर होता है, तो समाज में अस्थिरता, तनाव अचानक बड़ी दुर्घटना, भूकंप चक्रवात, सत्ता परिवर्तन, युद्ध आदि की स्थिति उत्पन्न होने की आशंका रहती है। जबकि नवरात्र का समापन 17 अप्रैल को होगा। इस दिन माता रानी हाथी पर प्रस्थान करेंगी। हाथी की सवारी काफी शुभ मानी जाती है। जिससे माता रानी भक्तों को सुख-समृद्धि देकर विदा होंगी। यह अच्छी बारिश, खुशहाली और तरक्की का संकेत है। नव संवत्सर के राजा मंगल और मंत्री शनि होने से यह वर्ष उथल-पुथल वाला रहेगा।
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घट स्थापना का मुहूर्त

घट स्थापना का मुहूर्त सुबह 6:24 से 10:28 बजे तक रहेगा। इस दिन सुबह 7:32 बजे से पूरे दिन अमृत सिद्धि व सर्वार्थ सिद्धि योग भी रहेगा। अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:30 से 12:54 बजे तक रहेगा।
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ऐसे करें पूजा

इस बार माता घोड़े पर आ रही हैं, जो कि शुभ नहीं माना जाता है। ऐसे में इस नवरात्र में माता की पूजा क्षमा प्रार्थना के साथ किया जाना नितांत आवश्यक है। प्रत्येक दिन विधिवत पूजा करने के बाद क्षमा प्रार्थना करने से माता प्रसन्न होंगी और शुभ फल देंगी।

09 अप्रैल-. शैलपुत्री
10 अप्रैल- ब्रह्मचारिणी

11 अप्रैल- चंद्रघंटा
12- अप्रैल-कूष्मांडा

13 -अप्रैल स्कंदमाता
14 अप्रैल- कात्यायनी
15 अप्रैल- कालरात्रि

16 अप्रैल-महागौरी

17 अप्रैल -.सिद्धिदात्री
कोटेश्वरी देवी मंदिर में तैयारियां शुरू

-मां मैनपुर कोटेश्वरी देवी करती हैं भक्तों की मुरादें पूरी

फोटो है
संवाद न्यूज एजेंसी
कसया। मैनपुर में तीन ओर से कंदराओं से घिरा मां मैनपुर कोटेश्वरी देवी आस्था और अध्यात्म का केंद्र है। देवी मंदिर में नवरात्र की तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। मंदिर परिसर की साफ सफाई के अलावा यहां श्रद्धालुओं के लिए दर्शन आदि की व्यवस्था में मंदिर की कमेटी लग चुकी है। नवरात्र में भक्त कलश स्थापना के बाद 9 दिनों तक मां भगवती के नौ स्वरूपों की विधि विधान से पूजा अर्चना करते हैं। वैसे तो इस मंदिर में बारहों महीने भक्त पूजा अर्चना करते हैं, लेकिन नवरात्र की शुरुआत होते ही मां का मंदिर और भी जगमगाने लगता है। हजारों की संख्या में भक्तों की भीड़ माता का आशीर्वाद लेने और माथा टेकने मंदिर पहुंचती हैं।

मैनपुर कोट स्थित शक्तिपीठ के अतीत की कहानी काफी गौरवशाली और आध्यात्मिक है। इसका वर्णन दीपवंश धर्म ग्रंथ में मिलता है। यहां पांडवों ने अज्ञातवास के दौरान देवी की अराधना की थी। ऐतिहासिक कुशीनारा (वर्तमान कुशीनगर) का वर्णन बौद्ध धर्मग्रंथ दीपवंश में भी मिलता है। वर्णन के मुताबिक कुशीनगर मल्लों की राजधानी थी। मल्लों ने मैनपुर को अपनी छावनी बनाया था। इसमें भगवान बुद्ध की निर्वाण स्थली के उल्लेख के साथ ही मैनपुर को छावनी के रूप में वर्णित किया गया है।

मल्लों की उद्धारक देवी थीं मां मैनपुर कोटेश्वरी
दीपवंश ग्रंथ यह बताता है कि मैनपुर कोट की देवी मल्लों की उद्धारक थीं। कोई आपदा हो या युद्ध में जाने का समय, पहले माता का पूजन-अर्चन होता था। इसके बाद ही निदान या युद्ध घोष किया जाता था। माता के कृपा से ही मल्लों और उनके राज्य के लोगों के उद्धार का विश्वास था। जनश्रुति के मुताबिक, मैनपुर कोट का संबंध महाभारत काल से भी है। ऐसा कहा जाता है कि अज्ञातवास के समय पांडव यहां भी कुछ समय बिताए थे। उस समय यह क्षेत्र देवारण्य के रूप में विख्यात था। बंजारों की कुल देवी थीं भगवती कोटेश्वरी, बेतों के घने जंगल से घिरे इस क्षेत्र में आसपास बंजारों की आबादी थी। वे मैनपुर की भगवती को अपना कुल देवी मानते थे। पुजारी मौनी बाबा ने बताया कि यहां पर साल भर श्रद्धालु माता कोटेश्वरी का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। शारदीय और चैत्र नवरात्र में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़़ती है। सुरक्षा के लिए मंदिर परिक्षेत्र में सीसीटीवी कैमरे भी लगे हैं।
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