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Kushinagar News: राजकीय बौद्ध संग्रहालय में मनाया शहीद दिवस

Sun, 24 Mar 2024 03:47 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर Updated Sun, 24 Mar 2024 03:47 AM IST
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Martyr's Day celebrated in Government Buddhist Museum
पकवा इनार। राजकीय बौद्ध संग्रहालय में शनिवार को भगत सिंह, राजगुरु व सुखदेव के शहीद दिवस पर उन्हें नमन किया गया और श्रद्धांजलि अर्पित की गई।
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संग्रहालय के अध्यक्ष अमित कुमार द्विवेदी ने कहा कि 23 मार्च, 1931 को देश के तीन स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु को अंग्रेजी हुकूमत द्वारा फांसी की सजा दी गई थी। भारत में शहीद दिवस ऐसे योद्धाओं को याद करने के लिए मनाया जाता है, जिन्होंने अपने प्राण की परवाह न करते हुए देश की स्वतंत्रता, कल्याण और प्रगति के लिए हर संभव प्रयास किया। ये मातृभूमि पर सर्वस्व न्यौछावर किया था, जिसके चलते इन्हें शहीद-ए-आजम कहा जाता है। इस मौके पर तेज प्रताप शुक्ला, धीरेंद्र मिश्रा, श्रवण कुशवाहा, गोविंद, निगम, महेश कानू आदि मौजूद थे।
भगत सिंह करते थे शोषण विहीन समाज की कल्पना : अयोध्या लाल

कसया। भारत की कम्युनिस्ट पार्टी मार्क्सवादी ने शहीद पार्क में शहीदे आजम भगत सिंह, सुखेदव व राजगुरु को श्रद्धा सुमन अर्पित किया। जिला सचिव अयोध्या लाल श्रीवास्तव ने शहीद भगत सिंह के जीवन पर प्रकाश डालते हुए उन्हें महान सेनानी बताया। कहा कि भगत सिंह का जन्म किसान परिवार में हुआ था। परिवार के सभी सदस्य भारत की स्वाधीनता के समर्थक थे। अंग्रेज भारत की आम जनता का जिस तरह शोषण कर रहे थे, यह बात भगत सिंह को बचपन में ही समझ आ गया था। भारत में रजवाडों, सामंतों एवं जमींदारों के साथ अंग्रेजों का गठजोड़ भगत सिंह समझ लिए थे। देश में ऊंच-नीच, छूआछूत, जाति-पांति व शोषण चरम पर था। उनका मानना था कि भारत की आजादी केवल अंग्रेजो से ही नहीं बल्कि जमींदारों एवं सामंतों से लड़ना पड़ेगा। वे शोषण विहीन समाज की कल्पना करते थे। वह समाजवादी व्यवस्था के हिमायती थे। उनका मानना था कि देश में केवल दो वर्ग हैं शोषक एवं शोषित । गूंगे बहरे अग्रेजों को सुनाने के लिए तय किया कि संसद में की बम फोड़ा जाए। जिसमें कोई घायल न हो। उन्हें मालूम था कि वे पकड़े जाएंगे। फिर भी बम फोड़ने का जोखिम उठाया और गिरफ्तार होकर राजगुरु एवं सुखदेव के साथ फांसी के फंदे को चूम लिया। इनके बलिदान से आजादी मिली। आज चंद लोगों के हाथ में सिमट गई है। लोकतंत्र के बावजूद विचारों की अभिव्यक्ति पर रोक लगाई जा रही है। किसान जब अपने उपज का लाभकारी मूल्य की आवाज उठाता है तो रास्ते में कील-कांटे बिछाए जा रहे हैं। सरकार में बैठे हुए लागों की बातों से जो असहमति जताता है उन्हें फर्जी मुकदमों के द्वारा परेशान किया जाता है। वक्ताओं ने नफरत, कट्टरता, अंध विश्वास को मिटाकर
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राष्ट्रीय एकता एवं अखंडता, भाईचारा कायम करने की अपील की। इस दौरान एडवोकेट विजय कुमार श्रीवास्तव, बीपी गुप्ता, इद्रीश सिद्दकी, गेंदा सिंह, जवाहर शर्मा, कैलाश गिरी, कैलाश गोंड़, शंकर प्रसाद, राम किशुन, राम बहाल सिंह, केदार सिंह, शंभु चौहान आदि मौजूद रहे।
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