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मतदान से वंचित हुए कई गांवों के मतदाता
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 17 Oct 2015 11:52 PM IST
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हाटा। मतदाता सूची में नाम नहीं होने से कई गांवों के मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करने से वंचित रह गए। वे अपना निर्वाचन कार्ड लेकर बूथों पर पहुंचे तो जरूर लेकिन सूची में नाम नहीं होने की वजह से मतदानकर्मियों ने उन्हें वापस कर दिया।
इसे लेकर कुछ बूथों पर मतदाताओं की मतदानकर्मियों से कहासुनी भी हुई। तीसरे चरण के मतदान के लिए सुबह सात बजे जब बूथ खुले तो लोग वोट देने के लिए मतदाता कतार में खड़े होने लगे।
क्षेत्र के मोतीपाकड़ कबिलेसहा के टोला भड़गवा में क्षेत्र पंचायत सदस्य प्रत्याशी विजय प्रताप की मां कुंवरी देवी भी अपनी बारी आने पर मतदान के लिए पहुंची। कर्मचारी ने उन्हें बताया कि मतदाता सूची में उनका नाम नहीं है और उन्हें मतदान करने से रोक दिया।
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इसी बूथ पर गांव के असगर अली भी अपना वोट नहीं दे पाए। वह अपना निर्वाचन कार्ड लेकर इधर-उधर घूमते रह गए। मतदाता सूची में उनके मूल नाम की जगह पर पुकार का नाम अंकित हो गया था, जबकि निर्वाचन कार्ड उनके मूल नाम से था।
सुकरौली ब्लॉक के सेमरी महेशपुर गांव के 50 से अधिक मतदाता मतदान करने से वंचित हो गए। पुरानी सूची में उनका नाम दर्ज था, लेकिन जब वह मतदान केंद्र पर पहुंचे तो कर्मचारियों को उपलब्ध कराई गई सूची में उनका नाम ही नहीं था।
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इसे लेकर कुछ बूथों पर मतदाताओं की मतदानकर्मियों से कहासुनी भी हुई। तीसरे चरण के मतदान के लिए सुबह सात बजे जब बूथ खुले तो लोग वोट देने के लिए मतदाता कतार में खड़े होने लगे।
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क्षेत्र के मोतीपाकड़ कबिलेसहा के टोला भड़गवा में क्षेत्र पंचायत सदस्य प्रत्याशी विजय प्रताप की मां कुंवरी देवी भी अपनी बारी आने पर मतदान के लिए पहुंची। कर्मचारी ने उन्हें बताया कि मतदाता सूची में उनका नाम नहीं है और उन्हें मतदान करने से रोक दिया।
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इसी बूथ पर गांव के असगर अली भी अपना वोट नहीं दे पाए। वह अपना निर्वाचन कार्ड लेकर इधर-उधर घूमते रह गए। मतदाता सूची में उनके मूल नाम की जगह पर पुकार का नाम अंकित हो गया था, जबकि निर्वाचन कार्ड उनके मूल नाम से था।
सुकरौली ब्लॉक के सेमरी महेशपुर गांव के 50 से अधिक मतदाता मतदान करने से वंचित हो गए। पुरानी सूची में उनका नाम दर्ज था, लेकिन जब वह मतदान केंद्र पर पहुंचे तो कर्मचारियों को उपलब्ध कराई गई सूची में उनका नाम ही नहीं था।