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बिजली की संभावनाएं समेटे है कोजन प्लांट

Tue, 25 Oct 2016 11:18 PM IST
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kushinagar Updated Tue, 25 Oct 2016 11:18 PM IST
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many possibilitiesfor electricity in kojan plant
तकनीक - फोटो : santosh verma
पडरौना। प्रदेश में रह-रहकर गहराने वाले बिजली संकट को कम करने में कोजन प्लांट बेहतर विकल्प बन सकते हैं। इनसे न केवल चीनी मिलों की आय बढ़ जाएगी, बल्कि पॉवर कारपोरेशन को भी बिजली बेचकर अपनी आर्थिक स्थिति सुदृढ़ कर सकेंगे। जनपद की ढाढ़ा चीनी मिल में स्थापित कोजन प्लांट इसकी बानगी है। चीनी मिल ने पिछले पेराई सत्र में 72,369 मेगावाट बिजली उत्पादित की, जिसमें से 51,031 मेगावाट बिजली पॉवरग्रिड को 4.99 रुपये प्रति यूनिट की दर से 2546.43 लाख रुपये में बिजली बेची। 
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बिजली समस्या पूरे प्रदेश के लिए है तो दूसरी ओर चीनी मिलें भी घाटे के कारण एक-एक कर बंद होती गईं। यही वजह है कि जिले में स्थापित 10 चीनी मिलों में से मौजूदा समय में केवल पांच ही चीनी मिलें संचालित हो रही हैं। जानकारों की मानी जाए तो गन्ना अपने आप में इतनी समृद्ध फसल है कि जड़ से लेकर पत्ती तक उसका एक-एक हिस्सा उपयोगी है। गन्ने से शीरा, बगास, फ्र्रेशसमड सहित अनेक पदार्थ निकलते हैं, जो अल्कोहल से लगायत दवाइयों तक में उपयोगी माने जाते हैं, फिर भी न तो इनका उत्पादन करने वाले किसानों की स्थिति सुदृढ़ हो पाती और न ही चीनी मिलों की।
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ऐसे में कोजन प्लांट चीनी मिलों के वजूद और पॉवरग्रिड दोनों के लिए उपयोगी साबित हो सकते हैं। इनसे बिजली उत्पादित कर न केवल चीनी मिलें अपनी आर्थिक स्थिति सुदृढ़ कर सकती हैं, बल्कि पॉवरग्रिड को बिजली बेचकर बिजली संकट को कम कर सकती हैं। इसका उदाहरण जनपद की ढाढ़ा स्थित चीनी मिल में स्थापित कोजन प्लांट है।
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चीनी मिल ने बेची 2546.43 लाख रुपये की बिजली
ढाढ़ा चीनी मिल के महाप्रबंधक और डीसीओ के मुताबिक 35 मेगावाट की क्षमता वाले इस कोजन प्लांट में पेराई सत्र 2015-16 में 72369 मेगावाट बिजली का उत्पादन हुआ। इसमें से 51031.00 मेगावाट बिजली 4.99 रुपये प्रति यूनिट की दर से पॉवरग्रिड को 2546.43 लाख रुपये में बेची गई। इस धनराशि में से पॉवरग्रिड ने 789.20 लाख रुपये चीनी मिल को भुगतान किया, जबकि अब तक पॉवरग्रिड पर 1757.23 लाख रुपये चीनी मिल का बकाया है।
कोट
गन्ने का प्रत्येक हिस्सा उपयोगी है। इससे प्रेसमड, शीरा, बगास आदि का सही ढंग से प्रयोग कर चीनी मिलें अपना मुनाफा बढ़ा सकती हैं। कोजन प्लांट के जरिए बिजली उत्पादन ऐसा ही माध्यम है, जो चीनी मिलों की आर्थिक स्थिति और भी सुदृढ़ बनाने में सहायक हो सकता है।
वेद प्रकाश सिंह, 
जिला गन्ना अधिकारी।
कोट
ढाढ़ा चीनी मिल में कोजन प्लांट वर्ष 2009 में स्थापित हुआ था। तब से प्रत्येक पेराई सत्र में चीनी मिल बिजली भी उत्पादित करती है। पेराई सत्र और उसके बाद औसतन चार महीने तक कोजन प्लांट संचालित होता है। तैयार बिजली पॉवरग्रिड को भी बेची जाती है। चूंकि इसका संचालन बगास यानी ईधन पर निर्भर होता है, इसलिए जब तक बगास उपलब्ध रहती है, तब तक कोजन प्लांट का संचालन किया जाता है।

पीके सैनी, महाप्रबंधक
ढाढ़ा चीनी मिल।

कोजन क्या है
ढाढ़ा चीनी मिल के महाप्रबंधक पीके सैनी बताते हैं कि चीनी मिलों का व्यवसाय घाटे में जाने के बाद करीब 10 वर्ष पूर्व पॉवर प्लांट लगने शुरू हुए। पॉवर प्लांट लग जाने से चीनी मिलों का घाटा कम हुआ। कोजन का अभिप्राय को-जेनरेशन से है। यानी चीनी मिलों को आर्थिक संकट से उबारने के लिए ऐसे प्लांट लगाना। सरकार से इस चीनी मिल का पॉवर परचेज एग्रीमेंट हुआ है, जिसके आधार पर सरकार को बिजली बेची जाती है। जनपद की सेवरही, रामकोला और कप्तानगंज सहित अन्य चीनी मिलें अपने यहां का बगास बेच देती हैं, जिन्हें खरीदने के साथ ही खुद की मिल से निकले बगास से भी इस पॉवर प्लांट को चलाया जाता है। 
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