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Kushinagar News: गंडक ने बदला रास्ता, महदेवा गांव के अस्तित्व पर मंडरा रहा खतरा टला

Wed, 19 Jul 2023 12:34 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर Updated Wed, 19 Jul 2023 12:34 AM IST
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Mahdeva village was averted
महदेवा के पास नदी का तेवर पड़ा नरम ।
पिछले पांच साल में कटान करते हुए महदेवा के काफी करीब पहुंच गई थी नदी
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अब गांव के कटान स्थल के पास जमा होने लगी है सिल्ट, लोगों ने ली राहत की सांस

संवाद न्यूज एजेंसी
खड्डा। करीब पांच साल से महदेवा गांव के अस्तित्व को समाप्त करने पर आमादा गंडक नदी ने अपना रास्ता बदल लिया है। इससे महदेवा गांव के नदी में समाने का खतरा टल गया है। कटान स्थल पर सिल्ट जमा होने लगी है। लोगों ने उम्मीद जताई है कि अब उनका गांव बंच जाएगा।
पिछले कई सालों से गंडक नदी महदेवा गांव की ओर कटान कर रही थी। धीरे-धीरे गांव नदी के करीब आता जा रहा था। इससे गांव वालों को अपने मकान नदी में समाने का खतरा महसूस हो रहा था। इस साल नदी की धारा प्राकृतिक रूप से मुड़ने लगी है। इससे महदेवा गांव के कटान स्थल पर सिल्ट जमा होने से दियारा बन गया है। गांव के लोगों ने बताया कि नदी पनियहवा पुल के आगे स्थित दियारा को काट रही है। वही मिट्टी यहां आकर जमा हो रही है। इस वजह से नदी अपने पुराने कटान स्थल के कुछ दूर हो गई है। बस एक पतली धारा इस ओर बने दियारा से टकरा रही है।
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नदी की कटान को रोकने के लिए प्रशासन की ओर से परक्यूपाइन लगाए गए हैं। ये भी कटान रोकने व सिल्ट जमा होने की मुख्य वजह हैं। प्रधान के प्रतिनिधि नथुनी कुशवाहा, पूर्व प्रधान जितेंद्र, जोगेंद्र, रमायन गुप्ता, विनोद आदि ने बताया कि पिछले पांच साल से नदी का रुख देख गांव के लोग भयभीत थे। इस साल नदी ने अपना रास्ता बदला है। इससे उम्मीद जगी है कि उनका गांव बच जाएगा। इस संबंध में बाढ़ खंड के एसडीओ मनोरंजन चौधरी ने बताया कि परक्यूपाइन अपना काम कर रहा है। सिल्ट जमा हुई है। नदी की धारा भी बदली हैं। कटान बंद है। स्थिति पर नजर रखी जा रही है।
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पांच वर्ष से कटान का दंश झेल रहे महदेवा के लोग

महदेवा से पांच वर्ष पूर्व नदी तीन किमी दूर बहती थी। नदी व गांव के बीच उपजाऊ मिट्टी का दियारा था। इस पर लोग खेती करते थे। नदी उफनाती तो पानी गांव में पहुंच जाता था। जब जलस्तर कम होता तो स्थित सामान्य हो जाता था, लेकिन अचानक नदी की धारा बदली और कटान शुरू हो गया। उपजाऊ जमीन का दियारा दो वर्षों में कट कर समाप्त हो गया। बचाव पर कोई ध्यान नहीं दिया गया। नदी गांव के पास पहुंच गई। खेती-बारी समाप्त होने से परेशान लोगों के लिए दोहरी मुसीबत सामने आ गई। कटान से गांव को बचाने के लिए वर्ष 2020 में गंभीरता से पहल हुई और बाढ़ खंड को जिम्मेदारी सौंपी गई, लेकिन नदी को रोकना आसान नहीं था। जब समझ में नहीं आया तो बिहार के बाढ़ विशेषज्ञ अब्दुल हमीद को बुलाया गया। उनके निर्देश में बांस व झाड़ियां डालकर जैसे-तैसे कटान रोकवाया गया।
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