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लोककला को संरक्षित करने का अभियान है लोकरंग
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जोगिया जनूबी पट्टी में लोकरंग सांस्कृतिक कार्यक्रम।
- फोटो : KUSHINAGAR
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लोककला को संरक्षित करने का अभियान है लोकरंग
फाजिलनगर क्षेत्र के जोगिया जनूबीपट्टी में 14 और 15 अप्रैल को होगा कार्यक्रम
नीदरलैंड, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, बिहार और महाराष्ट्र की सांस्कृतिक टीमें होंगी शामिल
पडरौना। फाजिलनगर क्षेत्र के जोगिया जनूबीपट्टी में 14 और 15 अप्रैल को लोकरंग कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। इसमें देश-विदेश की कई सांस्कृतिक टीमें हिस्सा लेंगी। इसकी तैयारी शुरू कर दी गई है।
इस कार्यक्रम की जानकारी लोकरंग सांस्कृतिक समिति जोगिया जनूबीपट्टी के अध्यक्ष सुभाष चंद्र कुशवाहा ने दी। उन्होंने बताया कि लोक संस्कृतियों को सहेजने की दिशा में प्रतिबद्ध एक गंवई संस्था है, जिसने मात्र 15 वर्षों में इस आयोजन को अंतरराष्ट्रीय मंच पर स्थापित कर दिया है। इसके सार्थक प्रयासों का परिणाम है कि आयोजन में विदेशी टीमें स्वयं के संसाधनों से प्रतिवर्ष शिरकत कर रही हैं। विगत वर्षों में गयाना, सूरीनाम, नीदरलैंड और मॉरीशस से टीमें आ चुकी हैं।
उन्होंने बताया कि लोकरंग-2022 के लोक उत्सव में पहली बार महाराष्ट्र का लावणी, गोंध और कोली लोकनृत्य प्रस्तुत किया जा रहा है। राजस्थान के बाड़मेर से भुंगरखान मंगणियार एवं साथी कलाकार, राजस्थानी लोक नृत्य प्रस्तुत करेंगे तो ‘ताल’ नृत्य संस्थान, भागलपुर (बिहार) की ओर से झिझिया, गोदना और जट-जटिन लोकनृत्य व बिदेशिया और डोमकच नृत्य नाटिका की प्रस्तुतियां देखने को मिलेंगी।
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इस आयोजन में दो महत्वपूर्ण नाटक देखने को मिलेंगे। नाद संस्था पटना मृदंगिया नाटक प्रस्तुत करेगी। आजमगढ़ की सूत्रधार संस्था 1857 विद्रोह के गुमनाम नायक बोधू सिंह अहीर के जीवन पर नाटक प्रस्तुत करेगी। झूमर गीत, बांसुरी वादन, जांघिया और पंवरिया नृत्य देखने को मिलेगा। नीदरलैंड से सरनामी भोजपुरी गायक राजमोहन इस कार्यक्रम में शामिल होंगे। इनके अलावा स्थानीय टीमों को भी स्थान दिया गया है।
गाजीपुर की संस्था संभावना कला मंच की तरफ से वृत्त चित्रों और कविता पोस्टर का प्रदर्शन किया जाएगा। विचार गोष्ठी का विषय ‘लोक संस्कृति का जन-जागरुकता से रिश्ता’ है। इसमें देश के कई प्रमुख साहित्यकार और कला विशेषज्ञ भाग लेंगे। इस आयोजन की तैयारी व्यवस्था में हदीश अंसारी, विष्णुदेव राय, इसरायल, संजय कुशवाहा, सिकंदर, हबीब और भुवनेश्वर राय सहयोग दे रहे हैं।
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फाजिलनगर क्षेत्र के जोगिया जनूबीपट्टी में 14 और 15 अप्रैल को होगा कार्यक्रम
नीदरलैंड, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, बिहार और महाराष्ट्र की सांस्कृतिक टीमें होंगी शामिल
पडरौना। फाजिलनगर क्षेत्र के जोगिया जनूबीपट्टी में 14 और 15 अप्रैल को लोकरंग कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। इसमें देश-विदेश की कई सांस्कृतिक टीमें हिस्सा लेंगी। इसकी तैयारी शुरू कर दी गई है।
इस कार्यक्रम की जानकारी लोकरंग सांस्कृतिक समिति जोगिया जनूबीपट्टी के अध्यक्ष सुभाष चंद्र कुशवाहा ने दी। उन्होंने बताया कि लोक संस्कृतियों को सहेजने की दिशा में प्रतिबद्ध एक गंवई संस्था है, जिसने मात्र 15 वर्षों में इस आयोजन को अंतरराष्ट्रीय मंच पर स्थापित कर दिया है। इसके सार्थक प्रयासों का परिणाम है कि आयोजन में विदेशी टीमें स्वयं के संसाधनों से प्रतिवर्ष शिरकत कर रही हैं। विगत वर्षों में गयाना, सूरीनाम, नीदरलैंड और मॉरीशस से टीमें आ चुकी हैं।
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उन्होंने बताया कि लोकरंग-2022 के लोक उत्सव में पहली बार महाराष्ट्र का लावणी, गोंध और कोली लोकनृत्य प्रस्तुत किया जा रहा है। राजस्थान के बाड़मेर से भुंगरखान मंगणियार एवं साथी कलाकार, राजस्थानी लोक नृत्य प्रस्तुत करेंगे तो ‘ताल’ नृत्य संस्थान, भागलपुर (बिहार) की ओर से झिझिया, गोदना और जट-जटिन लोकनृत्य व बिदेशिया और डोमकच नृत्य नाटिका की प्रस्तुतियां देखने को मिलेंगी।
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इस आयोजन में दो महत्वपूर्ण नाटक देखने को मिलेंगे। नाद संस्था पटना मृदंगिया नाटक प्रस्तुत करेगी। आजमगढ़ की सूत्रधार संस्था 1857 विद्रोह के गुमनाम नायक बोधू सिंह अहीर के जीवन पर नाटक प्रस्तुत करेगी। झूमर गीत, बांसुरी वादन, जांघिया और पंवरिया नृत्य देखने को मिलेगा। नीदरलैंड से सरनामी भोजपुरी गायक राजमोहन इस कार्यक्रम में शामिल होंगे। इनके अलावा स्थानीय टीमों को भी स्थान दिया गया है।
गाजीपुर की संस्था संभावना कला मंच की तरफ से वृत्त चित्रों और कविता पोस्टर का प्रदर्शन किया जाएगा। विचार गोष्ठी का विषय ‘लोक संस्कृति का जन-जागरुकता से रिश्ता’ है। इसमें देश के कई प्रमुख साहित्यकार और कला विशेषज्ञ भाग लेंगे। इस आयोजन की तैयारी व्यवस्था में हदीश अंसारी, विष्णुदेव राय, इसरायल, संजय कुशवाहा, सिकंदर, हबीब और भुवनेश्वर राय सहयोग दे रहे हैं।