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Kushinagar News: ट्रेनों से शराब की तस्करी, संदेह के घेरे में जीआरपी के निगहबान
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पडरौना। जिले के रास्ते बिहार जाने वाली ट्रेनों से लगातार शराब की खेप बरामद होने के बाद रेलवे के जिम्मेदारों का जीआरपी के कुछ सिपाहियों पर संदेह गहरा गया है। जिले के थानों में तैनात बीस से अधिक सिपाही हाल ही में जीआरपी में आए हैं।
बताया जा रहा है कि इन सिपाहियों ने मनचाही जीआरपी चौकियों पर अपनी तैनाती करा ली है। शराब तस्करी के मामले बढ़ने के बाद रेलवे के अधिकारियों की ओर से निगरानी तेज कर दी गई है। इसके पीछे के नेटवर्क और शह देने वालों की गोपनीय जांच शुरू कर दी गई है।
गोरखपुर-नरकटियागंज और कप्तानगंज-थावे रूट से लंबी दूरी के अलावा लोकल ट्रेनें भी बिहार तक जाती हैं। अधिकारियों के मुताबिक मई और जून में बिहार जाने वाली ट्रेनों से शराब तस्करी के मामलों में इजाफा हुआ है। बगहा और नरकटियागंज में लंबी दूरी की ट्रेनों से शराब की कई खेप पकड़ी जा चुकी है। ट्रेनों की पैंट्रीकार में काम करने वाले कर्मचारियों की संलिप्तता इसमें सामने आ चुकी है।
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पिछले दिनों दिल्ली से कप्तानगंज के रास्ते बिहार के मुजफ्फरपुर जाने वाली सप्तक्रांति एक्सप्रेस की पैंट्रीकार में बेतिया स्टेशन के पास शराब पकड़ी गई थी। कुशीनगर से ट्रेन गुजर गई, लेकिन गोरखपुर से लेकर कुशीनगर की आरपीएफ और, जीआरपी को भनक तक नहीं लगी। ऐसे मामले सामने आने के बाद जीआरपी के सिपाहियों की भूमिका पर सवाल उठने लगे थे।
बगहा और नरकटियागंज की आरपीएफ की पूछताछ में कुशीनगर, महराजगंज के तस्करों के अलावा जीआरपी के कुछ सिपाहियों के नाम भी सामने आए थे। इसके बाद रेलवे के अफसरों ने कुशीनगर में जीआरपी की चौकियों व स्टेशनों पर तैनात सिपाहियों की निगरानी बढ़ा दी है।
सूत्रों के मुताबिक कुशीनगर के थानों से जीआरपी में आए सिपाहियों की थानों पर तैनाती के दौरान कई बार संदिग्ध भूमिका मिल चुकी थी, लेकिन विभाग में पकड़ के कारण सिपाही कार्रवाई से बच निकले थे। जीआरपी में आने के बाद इनकी भूमिका पर सवाल खड़ा होने लगे हैं।
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बताया जा रहा है कि इन सिपाहियों ने मनचाही जीआरपी चौकियों पर अपनी तैनाती करा ली है। शराब तस्करी के मामले बढ़ने के बाद रेलवे के अधिकारियों की ओर से निगरानी तेज कर दी गई है। इसके पीछे के नेटवर्क और शह देने वालों की गोपनीय जांच शुरू कर दी गई है।
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गोरखपुर-नरकटियागंज और कप्तानगंज-थावे रूट से लंबी दूरी के अलावा लोकल ट्रेनें भी बिहार तक जाती हैं। अधिकारियों के मुताबिक मई और जून में बिहार जाने वाली ट्रेनों से शराब तस्करी के मामलों में इजाफा हुआ है। बगहा और नरकटियागंज में लंबी दूरी की ट्रेनों से शराब की कई खेप पकड़ी जा चुकी है। ट्रेनों की पैंट्रीकार में काम करने वाले कर्मचारियों की संलिप्तता इसमें सामने आ चुकी है।
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पिछले दिनों दिल्ली से कप्तानगंज के रास्ते बिहार के मुजफ्फरपुर जाने वाली सप्तक्रांति एक्सप्रेस की पैंट्रीकार में बेतिया स्टेशन के पास शराब पकड़ी गई थी। कुशीनगर से ट्रेन गुजर गई, लेकिन गोरखपुर से लेकर कुशीनगर की आरपीएफ और, जीआरपी को भनक तक नहीं लगी। ऐसे मामले सामने आने के बाद जीआरपी के सिपाहियों की भूमिका पर सवाल उठने लगे थे।
बगहा और नरकटियागंज की आरपीएफ की पूछताछ में कुशीनगर, महराजगंज के तस्करों के अलावा जीआरपी के कुछ सिपाहियों के नाम भी सामने आए थे। इसके बाद रेलवे के अफसरों ने कुशीनगर में जीआरपी की चौकियों व स्टेशनों पर तैनात सिपाहियों की निगरानी बढ़ा दी है।
सूत्रों के मुताबिक कुशीनगर के थानों से जीआरपी में आए सिपाहियों की थानों पर तैनाती के दौरान कई बार संदिग्ध भूमिका मिल चुकी थी, लेकिन विभाग में पकड़ के कारण सिपाही कार्रवाई से बच निकले थे। जीआरपी में आने के बाद इनकी भूमिका पर सवाल खड़ा होने लगे हैं।