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Kushinagar News: प्रमाण पत्र के लिए सुबह से लाइन लगाया, शाम को खाली लौटे दिव्यांग

Tue, 07 Nov 2023 12:57 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Tue, 07 Nov 2023 12:57 AM IST
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Lined up since morning for certificate, disabled returned empty handed in evening
- मुख्य चिकित्साधिकारी कार्यालय परिसर में ही चल रही डॉक्टरों की मनमानी
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- दिन भर बच्चे, महिलाएं, युवक व बुजुर्ग करते रहे इंतजार

पडरौना। दिव्यांग प्रमाण पत्र बनवाना आसान नहीं है। पिछले कई सोमवार से डॉक्टरों के न बैठने के कारण प्रमाण पत्र की आस लगाए दिव्यांग वापस चले जा रहे है। दिन भर लाइन लगाए रखने के बाद शाम को निराश होकर खाली लौट जा रहे हैं। मुख्य चिकित्साधिकारी कार्यालय परिसर में ही इसके लिए इंतजाम किए गए हैं। पर, हालत यह है कि डॉक्टरों की मनमानी से प्रमाण पत्र की आस लगाए लोगों को मायूस लौटना पड़ रहा है।
सरकार ने दिव्यांग जन पेंशन, नौकरी में आरक्षण, यात्रा में लाभ, जीविकोपार्जन के लिए प्राथमिकता योजना चला रही है। इन योजनाओं का लाभ लेने के लिए लाभार्थी को दिव्यांग प्रमाण पत्र की जरूरत होती है। इसके लिए सीएमओ कार्यालय परिसर में दिव्यांग जन कल्याण बोर्ड के कार्यालय के बाहर सुबह से ही भीड़ लगी थी। क्योंकि सप्ताह में केवल एक दिन सोमवार को ही इसके लिए निर्धारित किया गया है। वर्तमान में इस कमेटी के सदस्य डाॅ. कंदर्प यादव, डाॅ. उपेंद्र चौधरी व अन्य डॉक्टर हैं। जनपद के दूर-दराज इलाकों से आए दिव्यांगों और उनके परिजनों को इस सोमवार भी निराशा हाथ लगी, जब अनेंकों कठिनाइयों का सामना करने के बाद बोर्ड के दरवाजे पर पहुंचने के बाद डॉक्टर बीच में ही उठकर चले गए।
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क्या कहा दिव्यांगों और उनके परिजनों ने
पिछले एक साल से इस कार्यालय का चक्कर लगा रही हूं। लेकिन अब तक कोई सुनवाई नहीं हुई। बेटा दिव्यांग है। सोचती हूं कि उसका विकलांग प्रमाण पत्र बन जाए तो उसकी आजीविका थोड़ी आसान हो जाए।
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दिव्यांग परवेज की मां समीना देवी, निवासी धीरपट्टी।

बार-बार आने पर भी कोई सुनवाई नहीं होती है। यहां की व्यवस्था भगवान भरोसे है। विकलांग प्रमाण पत्र के लिए कई बार आया, हमेशा निराशा मिली।
इंतराज यादव, निवासी परसौनी कला


विकलांग प्रमाण पत्र के लिए चार बार बुलाया जा चुका है, लेकिन अभी भी केवल अगली 20 तारीख को आने के लिए समय दिया गया है। कैसे आ पाएंगे। 30 किलोमीटर दूर से बार-बार आना संभव नहीं हैं। अब तो इस प्रमाण पत्र की उम्मीद भी नहीं है।

प्रमिला देवी, तमकुहीरोड


पिछले 3 महीने से इस कार्यालय का चक्कर लगा रहा हूं, लेकिन आज भी निराशा ही हाथ लगी है। 48 साल की उम्र हो चुकी है, लेकिन विकलांग प्रमाण पत्र नहीं बन पाया है। यह प्रमाण पत्र होता तो कुछ सहारा होता।



अंबरीष पांडेय, निवासी लालाछपरा, लक्ष्मीगंज

दिव्यांगों को विकलांग प्रमाण पत्र उपलब्ध कराने के लिए प्रत्येक सोमवार को यह व्यवस्था हुई है। उसमें हड्डी रोग, फिजिशियन, ईएनटी सहित अन्य डॉक्टरों की तैनाती होती है। डॉक्टरों को सभी का चेकअप कर रिपोर्ट लगाने के बाद ही जाना होता है। वजह क्या रही, इस बारे में पूछताछ की जाएगी।
डॉ. आरडी कुशवाहा, प्रभारी सीएमओ
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