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Kushinagar News: तीन महीने के लिए नरक बन जाती है जिंदगी, हर साल बेघर करती है नदी

Fri, 28 Aug 2026 02:08 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Fri, 28 Aug 2026 02:08 AM IST
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Life turns into hell for three months; the river renders people homeless every year.
महदेवा गांव में अपने दरवाजे पर बैठे लोग।संवाद
कुशीनगर। नेपाल में भूस्खलन के बाद नारायणी नदी का वेग तेज हो गया है। जलस्तर में उतार-चढ़ाव के बावजूद नदी के किनारे बसे गांव वालों के मन में बाढ़ का खौफ सता रहा है। दहशत और सतर्कता के बीच किसी तरह रात बुधवार की कटी। बृहस्पतिवार को दिन में महादेवा गांव में प्रशासनिक इंतजाम और बाढ़ से बचाव को लेकर लोगों में चर्चाएं जारी रही।
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गांव में दाखिल होते ही आकाश चौहान की किराना की दुकान पर मौजूद शैलेश व रमाशंकर ने बताया कि हर साल नदी उजाड़ती है। तीन महीने तो जिंदगी नरक बन जाती है। प्रशासन हर साल विस्थापित करने का दावा करता है लेकिन अब तक कोई स्थायी इंतजाम नहीं हो सका। वहां से आगे बढ़ने पर गौरीशंकर के दरवाजे पर कुछ महिलाएं बैठी थीं। वहां लकड़ी का ढेर लगा था। पूछने पर एक महिला ने बताया कि नदी में लकड़िया, पशुओं के शव व घरेलू सिलिंडर बहकर आ रहे हैं। गांव के लोगों ने सुबह नदी से निकाला है। वही लकड़िया रखी गई है।
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गांव के दक्षिणी छोर पर पहुंचने पर नदी गांव से सटकर बहर रही थी। यहां नदी दो पाट में दिखी। मुख्यधारा करीब पांच किमी दूर, जबकि नदी का दूसरे पाट की धारा गांव से सटकर बह रही है। गांव के युवक और महिलाएं नदी से लकड़ियों का बोटा निकालने में व्यस्त दिखे। कुछ महिलाओं से बाढ़ और रात में जारी किए गए अलर्ट पर चर्चा की गई, तो वे सिस्टम को कोसने लगीं। सिंदा देवी ने बताया कि मेरी दो बकरियां कल पानी में बह गईं। हर साल नदी गांव को काटती है। करीब एक दशक पहले नदी ढाई किमी दूर थी। अब पास आ गई है। गांव के बीस से अधिक घर नदी में विलीन हो चुके हैं।
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सनकेती देवी ने बताया कि अधिकारी गांव में आकर लोगों को दूसरी जगह विस्थापित होने के लिए कहते हैं लेकिन बाढ़ का सीजन खत्म होने के बाद मुद्दा खत्म हो जाता है। हर साल नदी में पानी बढ़ता है, तो बाढ़ की चिंता सताती है और दिनचर्या प्रभावित हो जाती है। सुरेंद्र कुशवाहा ने बताया कि महादेवा गांव का करीब ढ़ाई किमी हिस्सा नदी में कट चुका है। नदी कटान करती गई। लोग वहां से हटकर मकान बनाते गए। कटान को रोकने के लिए मजबूत व्यवस्था नहीं की गई। इसको लेकर गांव के लोगों में नाराजगी दिखी। संवाद
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