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Kushinagar News: हत्या के दोषी को आजीवन कारावास की सजा
Wed, 22 Feb 2023 11:43 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Wed, 22 Feb 2023 11:43 PM IST
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पडरौना। 23 साल पहले तरयासुजान थाना क्षेत्र के तुलसीपट्टी गांव में एक व्यक्ति को गोली मारकर हुई हत्या के मुकदमे की बुधवार को सुनवाई हुई। पांच हत्यारोपियों में से तीन की पहले ही मौत हो चुकी है, जबकि एक को साक्ष्य के अभाव में दोषमुक्त करार दे दिया गया। कोर्ट ने पांचवें को दोषी पाया और उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई। उस पर 20 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया।
वादी की तरफ से इस मुकदमे की पैरवी कर रहे विशेष शासकीय अधिवक्ता महेंद्र गोविंद राव ने बताया कि तुलसीपट्टी गांव की निवासी दीपना देवी ने वर्ष 2000 में थाने में तहरीर दी थी। उन्होंने बताया था कि 16 अगस्त 2000 की रात करीब दो बजे परिवार के सभी लोग घर के बाहर सो रहे थे। उत्तर तरफ से छह-सात की संख्या में लोग आए। उन लोगों ने सो रहे उनके पति घरभरन राम को घेर लिया।
आरोप था कि सुरेश नाम के व्यक्ति ने बंदूक से उनके पति पर फायर कर दिया, जबकि थोड़ी दूरी पर मौजूद वीरेंद सिंह ने बम से हमला कर दिया। इससे घरभरन राम की मौत हो गई। तरयासुजान थाने की पुलिस ने तहरीर के आधार पर शारदा तिवारी, रघुनाथ यादव, सुरेश, विश्वनाथ और विरेंद्र तिवारी पर हत्या सहित विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया और विवेचना के बाद आरोपपत्र न्यायालय में भेज दिया। तभी से यह मुकदमा न्यायालय में विचाराधीन था।
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बुधवार को इस मुकदमे की सुनवाई अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश व विशेष न्यायाधीश एससी-एसटी एक्ट विजय कुमार हिमांशु के न्यायालय में हुई। अधिवक्ता ने बताया कि शारदा, रघुनाथ एवं विश्वनाथ की पहले ही मौत हो चुकी है, जबकि विरेंद्र को साक्ष्य के अभाव में न्यायालय ने दोषमुक्त कर दिया। सुरेश यादव को हत्या का दोषी पाए जाने पर न्यायालय ने आजीवन कारावास और 20 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई।
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वादी की तरफ से इस मुकदमे की पैरवी कर रहे विशेष शासकीय अधिवक्ता महेंद्र गोविंद राव ने बताया कि तुलसीपट्टी गांव की निवासी दीपना देवी ने वर्ष 2000 में थाने में तहरीर दी थी। उन्होंने बताया था कि 16 अगस्त 2000 की रात करीब दो बजे परिवार के सभी लोग घर के बाहर सो रहे थे। उत्तर तरफ से छह-सात की संख्या में लोग आए। उन लोगों ने सो रहे उनके पति घरभरन राम को घेर लिया।
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आरोप था कि सुरेश नाम के व्यक्ति ने बंदूक से उनके पति पर फायर कर दिया, जबकि थोड़ी दूरी पर मौजूद वीरेंद सिंह ने बम से हमला कर दिया। इससे घरभरन राम की मौत हो गई। तरयासुजान थाने की पुलिस ने तहरीर के आधार पर शारदा तिवारी, रघुनाथ यादव, सुरेश, विश्वनाथ और विरेंद्र तिवारी पर हत्या सहित विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया और विवेचना के बाद आरोपपत्र न्यायालय में भेज दिया। तभी से यह मुकदमा न्यायालय में विचाराधीन था।
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बुधवार को इस मुकदमे की सुनवाई अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश व विशेष न्यायाधीश एससी-एसटी एक्ट विजय कुमार हिमांशु के न्यायालय में हुई। अधिवक्ता ने बताया कि शारदा, रघुनाथ एवं विश्वनाथ की पहले ही मौत हो चुकी है, जबकि विरेंद्र को साक्ष्य के अभाव में न्यायालय ने दोषमुक्त कर दिया। सुरेश यादव को हत्या का दोषी पाए जाने पर न्यायालय ने आजीवन कारावास और 20 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई।