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जिले में कोल्ड स्टोरेज का टोटा, सिकुड रहा आलू का रकबा
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एक दशक से बंद पड़ा कोल्ड स्टोरेज।
- फोटो : KUSHINAGAR
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कोल्ड स्टोरेज का टोटा, सिकुड़ रहा आलू का रकबा
पडरौना। कुशीनगर में कोल्ड स्टोरेज की कमी के चलते दिन पर दिन आलू की फसल का रकबा सिकुड़ रहा है। जिले में आलू बुआई के लिए उपयुक्त मानी जानी वाली मिट्टी पर किसान अन्य फसलों की बुआई की तरजीह दे रहे हैं। पडरौना व कसया समेत जिले में पांच जगहों पर आलू भंडारण के लिए कोल्ड स्टोरेज तो थे लेकिन दो दशक में कसया को छोड़कर अन्य कोल्ड स्टोरेज पर ताला लग गया। इसके चलते सीजन में आलू भंडारण की समस्या के चलते किसानों ने आलू की बुआई करनी कम कर दी है।
कुशीनगर जिले में वर्ष 2013 से 2015 तक 1600 हेक्टेयर में आलू की बुआई की गई, जिससे हर वर्ष 33600 मीट्रिक टन फैदावार हुआ। वर्ष 2016 में आलू का रकबा बढ़ा और 1650 हेक्टेयर में किसानों ने आलू की बुआई कर 35650 मीट्रिक टन उत्पादन किया। लेकिन वर्ष वर्ष 2017 से लगातार आलू की बुआई का क्षेत्रफल कम होता गया। अब आलम यह है कि जिले में महज 1400 हेक्टेयर में इसकी खेती की गई है। इससे 29000 मीट्रिक टन आलू का पैदावार हुआ। इस वर्ष भी जिले में आलू की बुआई 1400 हेक्टेयर में की गई है, जिससे बीते वर्ष के समान ही उत्पादन होने की संभावना है। किसानों का कहना है कि जिले में कोल्ड स्टोरेज की कमी के चलते उन्हें सीजन में भंडारण के लिए भटकना पड़ता है। इसके चलते फसल की बुआई कम हो रही है। दरअसल, आलू उत्पादन के बाद उसको सुरक्षित रखने के लिए उनके आसपास साधन नही है। कृषि विभाग किसानों को सहफसली और वैज्ञानिक खेती को बढ़ावा देने के लिए जागरूक कर रहा है। गन्ने की फसल के साथ प्याज और लहसुन आदि की बुआई के लिए किसानों को प्रेरित कर रहे है। यदि जिले में पर्याप्त क्षमता वाले कोल्ड स्टोरेज उपलब्ध कराया जाए तो प्याज व लहसुन की तरह गन्ने की फसल के साथ आलू की सहफसली खेती कर किसान अपनी आय बढ़ा सकते हैं।
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जिले में स्थापित कोल्ड स्टोरेज की वास्तविक स्थिति
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कोल्ड स्टोरेज का नाम स्थान क्षमता (एमटी ) कब बंद हुआ
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लारी कोल्ड स्टोरे कसया 2200 चालू है
कोल्ड स्टोरेज---------------क्षमता------------बंद है
भुवनेश्वरी शीत गृह कठकुइया--- 1800---2005 से बंद
राजकीय शीत गृह कसया---2000--------1999 से बंद
रामकोला शीत गृह रामकोला--1250-----1998 से बंद
सहकारी शीत गृह फाजिलनगर --4000-- 1995
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प्रभारी जिला उद्यान अधिकारी श्रीराम ने बताया कि कसया में स्थापित राजकीय शीत गृह खराब है। इसे सही कराने के लिए विभाग को पत्र लिखा गया है। इसके अलावा निजी क्षेत्र के लोगों को शीतगृह स्थापित करने के लिए सरकार की तरफ से अनुदान की व्यवस्था है। इसके बारे में अधिक जानकारी के लिए कार्यालय से संपर्क किया जा सकता है। विभाग की तरफ से जिले में आलू का क्षेत्रफल बढ़ाने के लिए भरपूर प्रयास किया जा रहा है।
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पडरौना। कुशीनगर में कोल्ड स्टोरेज की कमी के चलते दिन पर दिन आलू की फसल का रकबा सिकुड़ रहा है। जिले में आलू बुआई के लिए उपयुक्त मानी जानी वाली मिट्टी पर किसान अन्य फसलों की बुआई की तरजीह दे रहे हैं। पडरौना व कसया समेत जिले में पांच जगहों पर आलू भंडारण के लिए कोल्ड स्टोरेज तो थे लेकिन दो दशक में कसया को छोड़कर अन्य कोल्ड स्टोरेज पर ताला लग गया। इसके चलते सीजन में आलू भंडारण की समस्या के चलते किसानों ने आलू की बुआई करनी कम कर दी है।
कुशीनगर जिले में वर्ष 2013 से 2015 तक 1600 हेक्टेयर में आलू की बुआई की गई, जिससे हर वर्ष 33600 मीट्रिक टन फैदावार हुआ। वर्ष 2016 में आलू का रकबा बढ़ा और 1650 हेक्टेयर में किसानों ने आलू की बुआई कर 35650 मीट्रिक टन उत्पादन किया। लेकिन वर्ष वर्ष 2017 से लगातार आलू की बुआई का क्षेत्रफल कम होता गया। अब आलम यह है कि जिले में महज 1400 हेक्टेयर में इसकी खेती की गई है। इससे 29000 मीट्रिक टन आलू का पैदावार हुआ। इस वर्ष भी जिले में आलू की बुआई 1400 हेक्टेयर में की गई है, जिससे बीते वर्ष के समान ही उत्पादन होने की संभावना है। किसानों का कहना है कि जिले में कोल्ड स्टोरेज की कमी के चलते उन्हें सीजन में भंडारण के लिए भटकना पड़ता है। इसके चलते फसल की बुआई कम हो रही है। दरअसल, आलू उत्पादन के बाद उसको सुरक्षित रखने के लिए उनके आसपास साधन नही है। कृषि विभाग किसानों को सहफसली और वैज्ञानिक खेती को बढ़ावा देने के लिए जागरूक कर रहा है। गन्ने की फसल के साथ प्याज और लहसुन आदि की बुआई के लिए किसानों को प्रेरित कर रहे है। यदि जिले में पर्याप्त क्षमता वाले कोल्ड स्टोरेज उपलब्ध कराया जाए तो प्याज व लहसुन की तरह गन्ने की फसल के साथ आलू की सहफसली खेती कर किसान अपनी आय बढ़ा सकते हैं।
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जिले में स्थापित कोल्ड स्टोरेज की वास्तविक स्थिति
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कोल्ड स्टोरेज का नाम स्थान क्षमता (एमटी ) कब बंद हुआ
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लारी कोल्ड स्टोरे कसया 2200 चालू है
कोल्ड स्टोरेज---------------क्षमता------------बंद है
भुवनेश्वरी शीत गृह कठकुइया--- 1800---2005 से बंद
राजकीय शीत गृह कसया---2000--------1999 से बंद
रामकोला शीत गृह रामकोला--1250-----1998 से बंद
सहकारी शीत गृह फाजिलनगर --4000-- 1995
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प्रभारी जिला उद्यान अधिकारी श्रीराम ने बताया कि कसया में स्थापित राजकीय शीत गृह खराब है। इसे सही कराने के लिए विभाग को पत्र लिखा गया है। इसके अलावा निजी क्षेत्र के लोगों को शीतगृह स्थापित करने के लिए सरकार की तरफ से अनुदान की व्यवस्था है। इसके बारे में अधिक जानकारी के लिए कार्यालय से संपर्क किया जा सकता है। विभाग की तरफ से जिले में आलू का क्षेत्रफल बढ़ाने के लिए भरपूर प्रयास किया जा रहा है।
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