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Kushinagar News: कीचड़ से होकर जा रहीं गर्भवतियां...चढ़ रहीं 44 सीढि़यां
Wed, 16 Jul 2025 12:08 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Wed, 16 Jul 2025 12:08 AM IST
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पडरौना। महिलाओं को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा व इलाज मुहैया कराने के लिए शासन की ओर से तरह-तरह की योजनाएं चलाई जा रही हैं। खासतौर पर गर्भवतियों पर उनका खास ध्यान है। लेकिन जिले में इन योजनाओं का असर नहीं नजर आ रहा है। 100 बेड के एमसीएच विंग (महिला अस्पताल) में लगी लिफ्ट खराब है।
गर्भवतियों को पहली मंजिल पर जाने के लिए 22 सीढि़यां चढ़नी पड़ रही है। अस्पताल में ड्रेनेज की व्यवस्था भी न होने से अस्पताल से निकलने वाला गंदा पानी परिसर में भर जा रहा है, जिससे मरीजों खास तौर पर गर्भवतियों को गंदे पानी और कीचड़ से होकर इलाज के लिए अंदर जाना पड़ रहा है।
महिलाओं व नवजात शिशुओं का इलाज बेहतर हो सके, इसे ध्यान में रखते हुए वर्ष 2020 में जिले स्तर जिला अस्पताल परिसर में एमसीएच विंग (महिला अस्पताल) का शुभारंभ हुआ था। आधुनिक सुविधाओं से लैस इस अस्पताल में प्रतिदिन 200 से अधिक गर्भवतियां इलाज के लिए आती हैं। अगर उन्हें प्रसव पीड़ा है तो पहले, दूसरे और तीसरे महले पर भर्ती किया जाता है। वहीं, चौथी मंजिल पर 12 बेड का आईसीयू बनाया गया है, जहां गंभीर रोगियों को भर्ती कर इलाज किया जाता है।
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इन मरीजों में ब्रेन हेमरेज, ब्लड कैंसर, ब्रेन ट्यूमर के अलावा गंभीर बीमारियों से जुड़े मरीजों को भर्ती कर इलाज किया जाता है। लिफ्ट खराब होने से एक तल पर जाने के लिए 22 सीढि़या चढ़नी पड़ रही है। अगर चौथे महले पर जाना है तो 88 सीढ़ी चढ़नी होगी।
मरीजों को खराब पानी से होकर परिसर में गुजरना पड़ रहा है। एंबुलेंस से जो गर्भवतियां आती हैं, उन्हें उतरकर अस्पताल में जाने में भी परेशानी होती है।
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गर्भवतियों को पहली मंजिल पर जाने के लिए 22 सीढि़यां चढ़नी पड़ रही है। अस्पताल में ड्रेनेज की व्यवस्था भी न होने से अस्पताल से निकलने वाला गंदा पानी परिसर में भर जा रहा है, जिससे मरीजों खास तौर पर गर्भवतियों को गंदे पानी और कीचड़ से होकर इलाज के लिए अंदर जाना पड़ रहा है।
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महिलाओं व नवजात शिशुओं का इलाज बेहतर हो सके, इसे ध्यान में रखते हुए वर्ष 2020 में जिले स्तर जिला अस्पताल परिसर में एमसीएच विंग (महिला अस्पताल) का शुभारंभ हुआ था। आधुनिक सुविधाओं से लैस इस अस्पताल में प्रतिदिन 200 से अधिक गर्भवतियां इलाज के लिए आती हैं। अगर उन्हें प्रसव पीड़ा है तो पहले, दूसरे और तीसरे महले पर भर्ती किया जाता है। वहीं, चौथी मंजिल पर 12 बेड का आईसीयू बनाया गया है, जहां गंभीर रोगियों को भर्ती कर इलाज किया जाता है।
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इन मरीजों में ब्रेन हेमरेज, ब्लड कैंसर, ब्रेन ट्यूमर के अलावा गंभीर बीमारियों से जुड़े मरीजों को भर्ती कर इलाज किया जाता है। लिफ्ट खराब होने से एक तल पर जाने के लिए 22 सीढि़या चढ़नी पड़ रही है। अगर चौथे महले पर जाना है तो 88 सीढ़ी चढ़नी होगी।
मरीजों को खराब पानी से होकर परिसर में गुजरना पड़ रहा है। एंबुलेंस से जो गर्भवतियां आती हैं, उन्हें उतरकर अस्पताल में जाने में भी परेशानी होती है।